
रायसेन। इस बार शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगीं और घोड़े पर सवार होकर विदा होंगी। सालों बाद दुर्गोत्सव के दौरान सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं।
जो जातकों के लिए शुभ फल दासी होंगी। आज से नवरात्रि का पर्व शुरू होगा। पूरे नौ दिन तक श्रद्धालु माता रानी की आराधना में व्यस्त रहेंगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा नवरात्रि में अपने मायके यानि कि धरती पर आती हैं। उनका आगमन हर साल अलग-अलग वाहनों पर होता है और विदाई के वक्त मां का वाहन अलग हो जाता है।
इस नवरात्रि माता रानी गज यानि हाथी पर सवार हो कर आएंगी। रविवार से मंदिरों में विभिन्न अनुष्ठान किए जाएंगे। मां की अखंड ज्योति जलाकर श्रद्धालु घट स्थापना करेंगे। पांडालों में प्रतिमा स्थापना कर मां की आराधना की जाएगी।
नवरात्रि में देवी मां का पहला रूप : मां शैलपुत्री ...
दिन : 29 सितंबर 2019 (रविवार -sunday )
मां शैलपुत्री का स्वरूप : आदि शक्ति ने अपने इस रूप में शैलपुत्र हिमालय के घर जन्म लिया था, इसी कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। शैलपुत्री नंदी नाम के वृषभ पर सवार होती हैं और इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है।
मां शैलपुत्री पूजा विधि : मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें और उसके नीचे लकडी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। इसके ऊपर केशर से शं लिखें और उसके ऊपर मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें। इसके बाद हाथ में लाल पुष्प लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें। और मंत्र बोलें-'ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:।'
मां शैलपुत्री का भोग : मां शैलपुत्री के चरणों में गाय का घी अर्पित करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है और उनका मन एवं शरीर दोनों ही निरोगी रहता है।
मां शैलपुत्री का मंत्र - 'ऊँ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।'
आशीर्वाद : हर तरह की बीमारी दूर करतीं हैं।
दूसरा नवरात्रा: देवी मां का दूसरा (द्वितीया) रूप: मां ब्रह्मचारिणी ...
दिन : 30 सितंबर 2019 (सोमवार- Monday )
मां का स्वरूप : भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया।
उन्हें त्याग और तपस्या की देवी माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी के धवल वस्त्र हैं। उनके दाएं हाथ में अष्टदल की जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित है।
मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से द्वितीय शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी का है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी।
देवी ब्रह्मचारिणी ( Maa brahmacharini ) के दाहिने हाथ में अक्ष माला है और बाएं हाथ में कमण्डल होता है। इस देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा। शास्त्रों में मां के एक हर स्वरूप की कथा का महत्व बताया गया है। मां ब्रह्मचारिणी की कथा जीवन के कठिन क्षणों में भक्तों को सहारा देती है।
मां की पूजा विधि : देवी ब्रह्मचारिणी जी की पूजा का विधान इस प्रकार है, सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया है। उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें।
मां का भोग : मां के इस स्वरुप को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए।
मंत्र - दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू ।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ॥
आशीर्वाद : लंबी आयु व सौभाग्य का वरदान देतीं हैं।
ये शक्तिपीठ होंगे आकर्षण का केंद्र
नवरात्रि के दौरान जिले के प्रमुख शक्तिपीठों में मां कांकाली मंदिर गुदावल, छोले वाली माता मंदिर खंडेरा, हिंगलाज माता मंदिर बाड़ी और परवरियावाली माता का मंदिर प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहेंगे। यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचेंगे।
बरेली: मातारानी के जयकारों से आज गूंजेगा अंचल
आदिशक्ति मां भवानी की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से घटस्थापना के साथ प्रारंभ हो रहा है। मां भवानी की आराधना के लिए नगर के मुख्य स्थानों पर झॉकियों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, वहीं मूर्तिकार मॉ महामाई की प्रतिमाओं की साज-सज्जा, रंग-रोगन आदि में जुटे हैं।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी नगर में करीब दो दर्जन से अधिक सभी छोटी बडी झॉकियों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजित की जाएंगी। विभिन्न मोहल्लों में झांकियां सजाई जा रही हैं।
झांकियों को भव्य रूप देने और कुछ नई तकनीकि और सजावट के साथ माता के भवन अलग-अलग डिजाईनों में बनाए जाएंगे। वहीं आकर्षक विद्युत सज्जा और व्यवस्थाओं को लेकर भी झॉकी समितियों द्वारा तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं।
सजने लगे पंडाल
एक दर्जन से अधिक स्थानों पर मां दुर्गे की स्थापना की जाएगी। इसके लिए पंडाल सजाने का काम भी शुरू हो गया है। समिति द्वारा आकर्षक पंडाल तैयार करवाया जा रहा है।
कलश स्थापना का खास मुहूर्त
सुबह 11 से 12 बजे कलश स्थापना का खास मुहूर्त है। रविवार को सुबह 11:36 से 12:24 के बीच अभिजीत मुहूर्त है। दोपहर 11:45 तक वृश्चिक लग्न में गुरु ग्रह की उत्तम स्थिति है। इस तरह सुबह 11 से 12 बजे के बीच कलश स्थापना के लिए उत्तम समय है।
सिलवानी: समिति ने तैयारियां की पूरी
नगर सहित आसपास के ग्रामीण अचंलों में शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। नगर में एक दर्जन से अधिक स्थानों नर दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना हर वर्ष की भांति की जाएगी। मंदिर में नवरात्रि के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं, तो वही नगर में होने वाले आयोजन को लेकर कई जगह प्रशिक्षण चल रहे हैं।
Published on:
29 Sept 2019 03:56 pm
बड़ी खबरें
View Allरायसेन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
