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रहस्यमयी गेहूं : गेहूं की एक बाली से तैयार कि 40 क्विंटल गेहूं

एक किसान ने गेहूं की एक बाली से 40 क्विंटल गेहूं तैयार कर लिया, ये बात जानकर आप भी हैरान होंगे, लेकिन ये सच है.

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रहस्यमयी गेहूं : गेहूं की एक बाली से तैयार कि 40 क्विंटल गेहूं

रहस्यमयी गेहूं : गेहूं की एक बाली से तैयार कि 40 क्विंटल गेहूं

रायसेन. मध्यप्रदेश के एक किसान ने गेहूं की एक बाली से 40 क्विंटल गेहूं तैयार कर लिया, ये बात जानकर आप भी हैरान होंगे, लेकिन ये सच है, इस किसान को मात्र एक गेहूं की बाली मिली थी, जिसके छीलकर गेहूं के दानें निकाले तो वे काफी बड़े चमकदार थे, जिसे देखकर किसान खुश हो गया और उसने अपने खेतों में बो दिया, इस एक बाली से उसने करीब 40 क्विंटल गेहूं तैयार कर लिया है, लेकिन इस गेहूं को खाने भी डर रहा है, क्योंकि उसे खुद नहीं पता ये कौन सी किस्म का गेहूं है, हैरानी की बात तो यह है कि इसकी जांच कराने के किसान अफसरों के पास भी गया, लेकिन वहां से भी अभी तक उसे कोई संतुष्टीपूर्ण जवाब या हल नहीं मिला है।

जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के गांव सांचेत के किसान मलखान सिंह लोधी को करीब छह साल पहले खेत में गेहूं की एक बाली नजर आई, पकने के बाद देखा तो बाली के दाने काफी लंबे और चकमदार हैं। किसान ने दाने संभालकर रखे और अगले सीजन में उसे बो दिए। इससे लगभग तीन किलो गेहूं पैदा हुए। इस तरह किसान ने छह साल में 40 क्विंटल गेहूं तैयार कर लिए हैं। अब वे उसके गुण व दोष का पता लगाने के लिए परेशान हैं। मलखान सिंह ने बताया कि उन्होंने रायसेन कृषि विभाग सहित कलेक्टर, एसडीएम, कृषि विज्ञान केन्द्र नकतरा, पोआरखोड़ा में भी सैंपल दिए हैं, लेकिन अभी तक कहीं से कोई संतोषजनक जबाब नहीं मिला है।

गेहूं की रोटी खाकर देख चुके लेकिन डर रहे हैं

उत्सुकता के साथ चिंता भी किसान को इस विशेष गेहूं को लेकर उत्सुकता है, क्याेेंकि यह आकार में बड़ा है। लेकिन उन्हें चिंता इस बात की है कि कहीं यह कोई नुकसानदायक विदेशी किस्म हुआ तो परेशानी हो सकती है। हालांकि मलखान सिंह गेहूं की रोटी खाकर देख चुके हैं। स्वाद में यह मीठा और अच्छा है, लेकिन खाने से डर रहे हैं।

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किसान ने गेहूं का सैंपल दिया था, जिसे जांच के लिए विस्तार अनुसंधन सेवाएं जबलपुर भेजा है। इसके पकने की अवधि 120 से 125 दिन है। सिंचित अवस्था के लिए उपयुक्त है। बाकी रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

-स्वप्निल दुबे, वैज्ञानिक,प्रमुख कृषि विज्ञान केन्द्र नकतरा

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