
रायसेन। प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा जनवरी २०१८ में अध्यापकों का भोपाल में प्रदेश स्तरीय महा सम्मेलन बुलाकर शिक्षा विभाग में उनके संविलियन करने की घोषणा की थी। उक्त घोषणा के आदेश अभी तक जिला शिक्षा विभाग में नहीं पहुंचने पर चिंतित अध्यापकों ने डाइट भवन के समीप बने शेड के नीचे बैठक आयोजित की गई। अध्यापकों द्वारा बैठक में आगे की रणनीतियों को लेकर खुलकर चर्चा की गई।
आजाद अध्यापक संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि २१ जनवरी २०१८ को सीएम हाउस भोपाल में महा सम्मेलन बुलाया था। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अध्यापकों को इस महा सम्मेलन में शिक्षा विभाग में संविलियन करने की घोषणा की थी। सीएम चौहान ने अध्यापकों को यह फायदा अप्रैल महीने में दिए जाने की बात कही थी। लेकिन अप्रैल महीना बीत जाने के बाद भी यह आदेश अभी तक नहींकिया गया है।ऐेसे में अध्यापक सीएम के हाथों खुद को छला सा महसूस करने लगे हैं।
शिक्षक नेताओं ने मप्र सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अध्यापकों की मुख्य मांग को अनदेखा किया तो आगामी मिशन २०१८ के विधानसभा चुनाव में इसके नतीजे अध्यापकों का परिवार दिखा देगा। बैठक में सीताराम रायकवार, उम्मेद सिंह ठाकुर, घनश्याम सेन, सुरेंद्र सिंह ओड़, राजकुमार खत्री, चंदन सिंह गौर, एलएस पवार, अमित त्रिपाठी, अभिषेक अग्रिहोत्री, भंवर सिह मौर्य, छीतू सिंह मौर्य, विनय सिंह शाक्य, अरविंद कटियार, राकेश अहिरवार,प्रकाश पाराशर, मंजू खत्री, रानीदेवी ताम्रे, मनोरमा मालवीय, नीतू यादव, ममता मिठास, प्रभा कन्नोजे, प्रतिभा शर्मा, पुुष्पा प्रजापति, मनीष नामदेव आदि उपस्थित हुए।
प्रमुख वक्ता सीताराम रायकवार ने कहा कि प्रदेश की शिव सरकार को हर हाल में अध्यापकों की मांगों को पूरा करना होगा वरना उसे सबक सिखाने के लिए अध्यापक कमर कसकर तैयार खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन करें, तबादला आदेश पर रोक हटाएं, गुरूजियों की नियुक्ति दिनांक से उनकी वरिष्ठता सूची बनाई जाए।
Published on:
6 May 2018, 1:11 PM IST
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