
Stupa of Sanchi
भोपाल। दुनिया को शांति का संदेश देने वाले बौद्ध धर्म के आस्था के प्रतीक सांची के स्तूपों (Stupa of Sanchi) की खोज को 200 वर्ष पूरे हो चुके हैं। सांची (Sanchi) जिसे प्राचीन समय में काकणाव तथा बोटा श्री पर्वत के नाम से जाना जाता था, मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है।
यह ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक महत्व वाला एक धार्मिक स्थान है। बता दें कि सांची अपने स्तूपों, एक चट्टान से बने अशोक स्तंभ, मंदिरों, मठों तथा तीसरी शताब्दी बी.सी. से 12वीं शताब्दी ए.डी. के बीच लिखे गए शिला लेखों की संपदा के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।
आज world heritage day 2021 अवसर पर patrika.com आपको मध्य प्रदेश के सांची में स्तिथ विश्व प्रसिद्ध स्तूप सांची स्तूप के बारे में बता रहा है....
जानिए क्या है सांची के स्तूप का इतिहास
history of sanchi stupa
- सांची का प्रमुख बौद्ध स्तूप 42 फुट ऊंचा है।
-यहां बुद्ध की शिक्षाओं से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री है।
-जिसे बौद्ध धर्म में बड़े आदर के साथ पढ़ा जाता है।
-सांची अशोक के पुत्र महेन्द्र का ननिहाल था।
-यहां के अधिकतर मठ और स्तूप अशोक की धर्मपत्नी देवी ने बनवाए थे।
-बौद्ध धर्म को ऊंचाईयों पर पहुंचाने के लिए सम्राट अशोक का विशेष योगदान माना जाता है।
-अशोक ने कई स्तूपों और स्मारकों का निर्माण करवाया।
-जिनसे बौद्ध धर्म की शिक्षाओं और नीतियों का प्रचार-प्रसार होता है।
-श्रीलंका जाने से पहले महेन्द्र एक महीने तक यहीं रहे थे।
-इसका निर्माण सम्राट अशोक ने कराया था।
-विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप के बारे में माना जाता है कि इस जगह का चुनाव सम्राट अशोक ने किया था।
-बौद्ध धर्म में ध्यान का बड़ा महत्व है।
-1989 में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया।
-इसी दृष्टि से यह जगह शांत, सुंदर, था जहां आसानी से ध्यान किया जा सकता था।
-यहां पहले बौद्ध विहार भी थे।
-वर्तमान में सांची देश का प्रमुख पर्यटक स्थल बन चुका है।
-सांची मध्य-प्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल से लगभग 50 किलोमीटर दूर है।
Updated on:
18 Apr 2021 11:54 am
Published on:
18 Apr 2021 11:49 am
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