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MP news: सरकारी भंवर में फंसी हमारे संतरे की पहचान

- 'एक जिला एक उत्पाद' में राजगढ़ शामिल, लेकिन नहीं बन रहे प्रोडक्ट

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राजगढ़। मध्य प्रदेश सरकार ने राजगढ़ जिले के संतरे को भले ही एक जिला एक उत्पाद में शामिल कर लिया हो, लेकिन इसे अलग पहचान दिलाने के प्रयास अभी नाकाफी हैं। जानकारों का मानना है कि ये प्रयास इतने कम हैं कि कागजों में भले ही इसे शामिल कर लिया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर एक जिला एक उत्पाद के हिसाब से काम नहीं हो रहा।

दरअसल, जिले के उत्पादों को अलग पहचान देने और उनका सही मायने में उपयोग कर तरह-तरह के उत्पाद बनाने फूड प्रोसेङ्क्षसग यूनिट डवलप की जा रही है लेकिन इसे लेकर काफी ढीला रवैया अपनाया जा रहा है। बीते दो साल से ब्यावरा स्थित कचनारिया की जमीन को अभी तक तैयार नहीं किया गया। न ही किसी प्रकार का इन्वेस्टर्स समीट यहां ऑर्गेनाइज किया गया। जिससे संतरे को पहचान जरूर प्रदेश में अलग उत्पाद के तौर पर मिली है लेकिन वर्तमान में जमीनी स्तर पर जिले में कोई प्रोडक्ट नहीं बन पा रहा न ही ऐसी कोई यूनिट अभी तक डली है।

सारंगपुर, जीरापुर, छापीहेड़ा, माचलपुर क्षेत्र से करोड़ों रुपए का संतरा बिकता है। अन्य राज्यों के साथ ही स्थानीय व्यापारी इन्हें मेरठ, दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में ले जाकर बेचते हैं। फिर वहीं से उन्हें विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाता है।

कैंडी, पल्प, पाउडर और कोल्डड्रिंक्स बनना अभी सपना...
देश के कई राज्यों और विदेशों में संतरे का उपयोग होता है। जिसके तहत कैंडी, प्लप और पाउडर के साथ ही कोल्डड्रिंक्स निर्माण में संतरे का उपयोग किया जाता है। यहां भी इन्हीं उत्पादों को बनाकर बाहर भेजने की योजना है लेकिन उद्योग विभाग और जिला प्रशासन दोनों के ही प्रयास कमजोर हैं।

दो साल से फाउंडेशन, रोड और अन्य काम ही फूड प्रोसेसिंग यूनिट के चल रहे हैं, इसमें अभी ऑक्शन (खरीदी) होना शेष है। साथ ही फैक्टरियों का विकसित होना भी शेष ही है।

बाहर भेजना मजबूरी
संतरे के भाव शुरुआत सीजन में ही इस बार जोरों पर है। अभी से भाव 35 से 40 और 45 रुपए किलो तक है। करोड़ों रुपए का व्यापार इस जिले में संतरे का होता है लेकिन यहां पहचान जरूर है भाव नहीं मिलते। खरीदी करने हरियाणा, यूपी, दिल्ली, पंजाब के खरीददार पहुंचते हैं। वहीं, स्थानीय खरीददार भी माल लेकर प्रदेश के कोने-कोने में पहुंचाते हैं। लोकल में न खरीदी है न ही उत्पाद बन रहे।

संतरे की बेहतरीन पैदावार इस बार है, नये बगीचे भी विकसित हो रहे हैं। अच्छे भाव भी मिलने की उसमें उम्मीद है, माना जा रहा है कि इस बार और भी रकबा इसका बढ़ेगा।
- पीआर पांडे, उपसंचालक, उद्यानिकी, राजगढ़

फूड प्रोसेसिंग यूनिट का शुरुआती काम हो चुका है, बाकी में अभी समय लगेगा। इन्वेस्टर्स समीट को लेकर भी फिलहाल समय लगेगा, इंतजार करना होगा।
- लक्ष्मी गुप्ता, जिला उद्योग अधिकारी, राजगढ़