
डूब जाएंगे क्या तब दोगे मुआवजा... ग्रामीणों की सरकार से गुहार
राजगढ़। जिले की दो बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक मोहनपुरा और दूसरी कुंडालिया है। जहां पहले मोहनपुरा डैम में मुआवजे को लेकर प्रदर्शन होते रहे। लेकिन अब जैसे-जैसे कुंडालिया डैम की हाइट बढ़ रही है। वैसे-वैसे वहां भी लोगों ने अपनी आवाज उठाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को डूब क्षेत्र में आ रहे कड़लावद गांव के करीब १५० लोग राजगढ़ पहुंचे। जहां उन्होंने अपनी मांग तहसीलदार के माध्यम से कलेक्टर तक पहुंचाई। ग्रामीणों ने बताया कि डूब में आने के कारण खुद सारंगपुर एसडीएम बारिश से पहले गांव खाली करने का बोल चुके है। लेकिन हमें प्लाट का मुआवजा अभी तक नहीं दिया है।
ऐसे में गांव छोड़कर कहां मकान बनाएंगे, न ही हमें कहीं एक जगह विस्थापित किया जा रहा है। डूब में आने वाले आसपास के एक दर्जन गांवों को यह प्लाट की राशि आवंटित कर दी गई। लेकिन यहां कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वहां के अधिकारियों ने दलाल छोड़ रखे है, जो मुआवजे दिलवाने या डलवाने के नाम पर वसूली कर रहे है। हमारे गांव से किसी ने पैसा नहीं पहुंचाया। जिसका नुकसान हमें भुगतान नहीं होने को लेकर भुगतना पड़ रहा है।
दो साल हो चुके डैम पूरा हुए अब तक नहीं मिला प्रतिकार-
राजगढ़ के पास स्थित मूंडला डैम जो करीब १०० करोड़ की लागत से बनाया गया था। डैम के डूब क्षेत्र में मगरियादेह और लीलबे गांव आए। जबकि कुछ गांवों की जमीने भी डूबी। लेकिन डैम निर्माण में डूब में आने वाले कुटुंबों को जो प्रतिकार राशि दी जानी थी। वह आज तक नहीं दी गई। जबकि भू-अर्जन अधिनियम २०१३ के अन्तर्गत इस राशि का भुगतान किया जाना था। इस राशि में मगरियादेह में ४६ कुटुंब है।
जबकि लीलबे में ३२ है। प्रतिकार के रूप में विस्थापित किए गए कुटुंबों को एक साल तक तीन हजार रुपए प्रतिमाह जीवन भत्ता, विस्थापित कुटुंबों को सामान यहां से वहां ले जाने के लिए ५० हजार रुपए वित्तीय सहायता, पशु या छोटी दुकान रखने वाले प्रत्येक कुटुंब को एक बार २५ हजार रुपए, प्रत्येक कुटुंब को केवल ५० हजार रुपए एक बार पुर्नविस्थापन भत्ता आदि शामिल है। लेकिन अधिनियम का किसी को लाभ नहीं दिया गया। ग्रामीण जल संसाधन विभाग से लेकर एसडीएम कार्यालय तक शिकायत कर चुके है।
Published on:
30 Jun 2018 10:01 am
बड़ी खबरें
View Allराजगढ़
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
