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एलआईसी का कमीशन, कोङ्क्षचग क्लासेस, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की इनकम पर भी टैक्स

20 लाख की सालाना आय वाला हर गैरवैतनिक कार्य कर चुकाने के दायरे में, नहीं भरने पर होगी कार्रवाई।

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राजगढ़. गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स के दायरे में निजी फाइनेंस, एलआईसी का कमीशन, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का किराया, चार्टर्ड इंजीनियर्स, फाइनेंशियल एडवाइज, कोचिंग क्लासेस, रेस्त्रां, होटल, निजी कंसलटेंसी इत्यादि भी आएंगे। इन्हें 18 प्रतिशत जीएसटी जमा करना होगा। 20 लाख से अधिक की इनकम वाले इन सभी पर उपक्रमों को टैक्स देना होगा। यदि नहीं दिया गया तो पैनाल्टी के तौर पर न सिर्फ टैक्स लगेगा, बल्कि उतना ही जुर्माना भी लगेगा। साथ ही सालभर का ब्याज भी 18 प्रतिशत के हिसाब से लगेगा।

ऐसी संस्था या उपक्रम जो सैलरी और कृषि के दायरे में, डॉक्टर और निजी स्कूल इत्यादि में हैं, वे इस दायरे में नहीं आते। इसके अलावा अन्य माध्यम से होने वाली आय इसमें आती है। इसी पर 18 प्रतिशत टैक्स लगेगा। यह नियमानुसार हर कॉम्प्लेक्स मालिक, एलआइसी का कमीशन लेने वाले सभी को भरना होगा। इसकी सूची अब जीएसटी विभाग बना रहा है, जिन्हें रेंडम नोटिस भेजे जाएंगे। हालांकि इसमें वे लोग या संस्था दोबारा जमा नहीं करेंगे जिनकी इनकम में सालभर में इजाफा नहीं हुआ हो। बता दें कि वर्तमान में 20 लाख की सीमा सर्विसेस और सोयाबीन या धनिया का काम करते वाले गुड्स वालों को 40 लाख रुपए तक की छूट रहेगी।

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25 पंचायतों ने नहीं दिया जवाब, वसूली होगी
हाल ही में जीएसटी विभाग ने जिले की 627 में से 25 पंचायतों को नोटिस दिए थे। इसमें बिना जीएसटी खरीदी करना पाई गई, लेकिन उन्होंने अभी तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया। अब उनकी डिमांड तैयार की जा रही है, उसी हिसाब से उन पर पैनाल्टी लगाई जाएगी। बता दें कि संबंधित पंचायत पर वहां दर्शायी गई राशि का दो प्रतिशत टीडीएस या 20 हजार रुपए की वसूली वहां के सचिव से की जाएगी। यह पांच लाख से अधिक की खरीदी बिना जीएसटी के करने किया जाएगा। 25 में से एक पंचायत से जवाब आया कि उस दौरान वह सरपंच नहीं थे, ऐसे में जो सरपंच, सचिव थे उन्हें नोटिस दिया जाना है। बाकी अन्य पंचायतों को भी रेंडम सेलेक्ट किया जा रहा है।

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मांगी जानकारी
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सरकारी अन्य उपक्रम सहित निजी कंसलटेंसी व अन्य जानकारी पंजीयक विभाग ब्यावरा से जीएसटी विभाग ने मांगी है। इसी आधार पर संबंधितों को नोटिस दिए जाएंगे। इसके बाद उन्हें एक तय सीमा उतने ही प्रतिशत टैक्स, पैनाल्टी ब्याज सहित जमा करने का समय दिया जाएगा। यदि इस समयसीमा में राशि जमा नहीं की जाती हो तो फिर वसूली की कार्रवाई भी विभाग करेगा।