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MP के नरसिंहगढ़ अभयारण्य में जल्द शुरू होगी जंगल सफारी, 10 किमी होगा रूट

MP News: मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ अभयारण में जल्द जंगल सफारी की शुरूआत होगी। इसके लिए 10 किलोमीटर का रूट भी निर्धारित कर लिया गया है।

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MP News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ को मालवा के मिनी कश्मीर के प्रमुख वन क्षेत्र चिड़ीखो अभयारण्य को संगठित इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। जिसको लेकर वन विभाग ने कार्ययोजना भी तैयार कर ली है। जिसके तहत अभयारण्य में ट्रैकिंग रूट विकसित करने, स्थायी नाइट कैंप स्थापित करने और वर्तमान जंगल सफारी क्षेत्र को 5 किमी से बढ़ाकर 10 किमी तक विस्तारित करने का प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही इनका लुत्फ पर्यटक ले सकेंगे।

छोटे महादेव मंदिर से चिड़ीखोह तक होगी ट्रेनिंग

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक और प्राकृतिक आस्था स्थल छोटो महादेव मंदिर से चिड़ीखोह स्थित रेस्ट हाउस तक ट्रैक रूट विकसित किया जाएगा। इसके अलावा वन ग्राम कोटरा तक भी नया ट्रेकिंग मार्ग बनाया जाएगा। वर्षा ऋतु से पहले इन ट्रैकिंग मार्गों को तैयार कर पर्यटकों के लिए खोलने की योजना है। प्रस्तावित ट्रैक रूट पर सुरक्षा संकेतक, विश्राम बिंदु और प्रशिक्षित गाइड की व्यवस्था रहेगी। जिससे पर्यटक सुरक्षित वातावरण में जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे।

अभयारणय में 5 किमी में जंगल सफारी की एंट्री

वर्तमान में अभयारण्य में करीब 5 किमी क्षेत्र में निजी वाहनों से निर्धारित मार्ग पर जंगल सफारी की अनुमति है। अब इस सफारी को बढ़ाकर 10 किमी किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में मौजूदा मार्ग को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके बाद नए वन क्षेत्र को जोड़ते हुए सफारी रूट का विस्तार होगा। जिसमें सफारी में पर्यटक खुली जीप और निजी वाहनों से वन भ्रमण कर सकेंगे।

कोटरा जंगल में बनेंगे स्थाई नाइट कैंप

अभयारण्य से सटे कोटरा जंगल क्षेत्र में स्थायी इको-टूरिस्ट नाइट कैंप स्थापित करने की तैयारी है। जिसे औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है। यहां पर्यटकों को रात्रि प्रवास, स्थानीय भोजन, गाइडेड नेचर ट्रेल और वन्यजीव दर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। नाइट कैंप को पर्यावरण-अनुकूल संरचना में विकसित करने का प्रस्ताव है। जिससे जंगल की प्राकृतिक संरचना प्रभावित न हो।

स्थानीय स्तर पर बढ़ेगें रोजगार के अवसर

ट्रैकिंग, सफारी और नाइट कैंप जैसी गतिविधियों के शुरू होने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को गाइड, वाहन चालक, कैंप प्रबंधन और अन्य सेवाओं में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। पर्यटन से प्राप्त होने वाली आय का एक हिस्सा वन और वन्यजीव संरक्षण कार्यों पर भी खर्च किया जाएगा। विभाग के अनुसार सभी गतिविधियां पर्यावरणीय संतुलन और संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए संचालित की जाएंगी।

कैंपों की स्वीकृति मिल गई है। ट्रैकिंग रूट बारिश के पहले चालू कर देंगे। सफारी विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजा है, स्वीकृति मिलेती ही इसका काम भी शुरू कराएंगे।- दिनेश यादव, एसडीओ, चिड़ीखोह अभयारण्य, नरसिंहगढ़