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sanka shyam ji temple: यहां की खूबसूरती की खबर लगते ही बादशाह अकबर भी हो गए थे हैरान

sanka shyam ji temple narsinghgarh-नरसिंहगढ़ में श्याम जी सांका मंदिर स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना, पुरातत्व विभाग के जरिए धरोहर के रूप में संरक्षित, पहुंचते हैं हजारों लोग...

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narsinghgarh tourism

interesting facts: राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में एक स्मारक प्रेम के प्रतीक के रूप में पहचाना जाता है। धरोहर के रूप में ये संरक्षित है। हर साल हजारों लोग इसे देखने के लिए पहुंचते हैं। यहां की खूबसूरती और नक्काशी तो विख्यात है ही साथ ही इससे जुड़े कई रोचक किस्से भी हैं। देश में प्रेम के प्रतीकों की जब भी बात होती है तो आगरा के ताजमहल का जिक्र सबसे पहले आता है। इसी तरह सांका श्यामजी मंदिर इसके लिए जाना जाता है।

 

राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ (narsinghgarh) में भी है। यहां रानी ने अपने पति की स्मृति में इस खूबसूरत स्मारक को तैयार कराया। स्थापत्य कला की दृष्टि से बेजोड़ इस स्मारक को एक सप्ताह पहले ही प्रदेश सरकार ने पर्यटन क्षेत्र के रूप में शामिल कर लिया है। जिले के पर्यटन क्षेत्र नरसिंहगढ़ से करीब 20 किमी दूर नेशनल हाईवे से 8 किमी अंदर कोटरा नामक ग्राम पंचायत क्षेत्र में है। भोपाल से यह स्थान करीब 80 किलोमीटर दूर है। भोपाल से यहां जाने वाले पर्यटक चिढ़ी खो अभ्यारण के बगल से गए रास्ते से पहुंच सकते हैं।

 

 

 

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ऐसे हुई थी ये रियासत

स्मारक के बारे में जानकार बताते हैं कि सांका नामक एक छोटी-सी रियासत नरसिंहगढ़ के समीप थी। 16 वीं शताब्दी में यहां श्याम सिंह खींची नामक राजा शासन करते थे। उनकी रानी भाग्यवती थी। यहां के राजा ने अपनी जागीर में सोलह खम्ब नामक खूबसूरत स्मारक बनवाया। इसकी खूबसूरती के चर्चे दिल्ली तक पहुंचे तो बादशाह अकबर ने एक सिपाहसालार हाजी अली को इसकी हकीकत जानने भेजा। हाजी अली को सोलह खम्ब की खूबसूरती रास नहीं आई और उसने सोलह खम्ब तोड़ने का फरमान सुना दिया। यह बात राजा श्यामसिंह को पता लगी तो वे उससे लोहा लेने पहुंच गए। हाजी अली ने राजा श्यामसिंह को परास्त कर दिया। पति की मौत के बाद उनकी याद में रानी ने महल के सामने ये स्मारक बनवाया। स्मारक बनाने के लिए राजस्थान के कारीगरों को बुलाया गया था।

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