19 जुलाई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘सुठालिया बना सागौन तस्करी का हब, वन विभाग कार्रवाई करता है पर..’, राज्यमंत्री ने DFO के सामने खोली पोल

Suthaliya Become Teak Smuggling Hub : वन माफिया पर राज्यमंत्री नारायण सिंह पवार का बड़ा बयान, घुरैल पहाड़ी के कार्यक्रम में वन अफसरों के सामने जताई चिंता। बोले- जंगल बचाने में सिस्टम नाकाम, पर्यावरण पर भी बढ़ा खतरा।
2 min read
Google source verification
Suthaliya Become Teak Smuggling Hub

Suthaliya Become Teak Smuggling Hub (राज्यमंत्री नारायण सिंह पवार का बड़ा बयान Photo Source- Patrika)

Rajgarh News :मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के अंतर्गत आने वाला सुठालिया क्षेत्र अवैध सागौन तस्करी का मुख्य केंद्र बन चुका है, जिसे लेकर खुद प्रदेश के राज्यमंत्री नारायण सिंह पवार ने वन विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। घुरैल पहाड़ी पर आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम में मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि, सुठालिया सागौन चोरी का हब बना हुआ है। वन विभाग कार्रवाई तो करता है, लेकिन माफिया फिर भी यहां सक्रिय हैं। मंत्री के इस बयान ने तस्करों के आगे बेबस प्रशासनिक सिस्टम को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।

खास बात ये है कि, जिस सुठालिया इलाके की बात राज्यमंत्री पंवार ने कही है, वो उनके पैतृक गांव से लगा हुआ इलाका है। जिला वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) बैनी प्रसाद दोतानिया सहित तमाम जिलाधिकारियों के सामने दिए गए इस बयान से साफ है कि सागौन माफिया के आगे प्रशासन बौना साबित हो रहा है।

पत्रिका ने उजागर किया था तस्करी का पूरा रूट

गौरतलब है कि, पत्रिका ने विदिशा जिले के सिरोंज-लटेरी क्षेत्र के जंगलों से सागौन काटकर राजगढ़ के रास्ते राजस्थान तक होने वाली अवैध तस्करी के खेल का लगातार पर्दाफाश किया है। खबरों में ये भी उजागर किया गया था कि, सुठालिया कैसे इस अवैध धंधे का गढ़ बना हुआ है और तस्कर किस रूट से माल पार करते हैं। इन खुलासों के बाद राजगढ़, विदिशा और गुना जिले के वन अमले की संयुक्त बैठकें तो हुईं और कुछ कार्रवाई भी की गई, लेकिन मुख्य माफिया तक आज तक वन विभाग के हाथ नहीं पहुंच सके हैं।

पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन पर जताई चिंता

मंत्री पंवार ने जंगलों के लगातार खात्मे से पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन पर भी दुख जताया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में कभी 33 प्रतिशत वन क्षेत्र हुआ करता था, जो अब घटकर महज 18 प्रतिशत रह गया है। जंगल कम होने से धरती की नमी खत्म हो रही है और इंसान अच्छी बारिश के लिए सिर्फ भगवान भरोसे बैठा है। उन्होंने सचेत किया कि यदि जंगलों को नहीं बचाया गया, तो जल स्रोत पूरी तरह सूख जाएंगे और भविष्य में जल संकट का एक भयावह रूप सामने आएगा।