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जिस टैक्स चोरी ने मंडी का ग्रेड बिगाड़ा उसी की फाइल बोर्ड में जाकर दबी!

- 74 में से 61 व्यापारी पाए गए थे दोषी, 30 लाख से अधिक की टैक्स चोरी पकड़ाई थी- 2017 में जांच के बाद मंडी बोर्ड पहुंची थी फाइल, अन्य फाइलों के बीच में दबी धूल खा रही, न वसूली हुर्ई न कार्रवाई- फर्जी गेट पास का मामला भी मंडी के जिम्मेदारों ने हवा किया

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mandi

जिस टैक्स चोरी ने मंडी का ग्रेड बिगाड़ा उसी की फाइल बोर्ड में जाकर दबी!

ब्यावरा. करीब तीन साल पहले उजागर हुए ब्यावरा मंडी के सबसे बड़ी टैक्स चोरी ने ब्यावरा मंडी की ग्रेडिंग बिगाड़ डाली उसी पर पर्दा जिम्मेदारों ने डाल दिया है। साफ तौर पर स्पष्ट हो चुकी 30 लाख की टैक्स चोरी को पूरी तरह से दबा दिया गया और आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। मंडी सचिव से लेकर एमडी तक के जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

दरअसल, शासन को करीब 30 लाख का चूना लगाने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने के बजाए उक्त फाइल को मंडी के जिम्मेदारों ने दफ्तर और मंडी बोर्ड के बीच झूल रखा है। फाइल न जाने कहां धूल खा रही है और गड़बड़ी पूरी उजागर हो जाने के बावजूद इसमें कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हो पाई है।

वर्ष-2016 में महज तीन माह के रिकॉर्ड में सामने आई ३० लाख रुपए से अधिक की टैक्स चोरी में मंडी के 74 में से 61 व्यापारी दोषी पाए गए थे। मामला ब्यावरा से भोपाल मंडी बोर्ड तक पहुंचा लेकिन वहीं के जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे दबा दिया। अब इसकी परतें दोबारा खुलने की ओर है, अब फिर से संयुक्त संचालक ने उसका रिकॉर्ड मंगवाने की तैयारी की है। शासन को लगाए गए लाखों रुपए के चूने पर न सिर्फ पांच गुना टैक्स वसूला जाना प्रस्तावित है बल्कि दंडात्मक कार्रवाई भी होने की भी उम्मीद है।

खरीदी का अनुबंध तो जारी हुआ, भुगतान पत्रक रोक लिया
तीन के उक्त रिकॉर्ड को तत्कालीन एसडीएम अंजली शाह ने खंगाला था, जिसकी अन्य मंडियों के ऐसे कर्मचारियों से जांच करवाई थी जिनका ब्यावरा मंडी से लिंक न हो। जांच में पूरी तरह से स्पष्ट हुआ कि संबंधित व्यापारियों ने किसानों से माल खरीदी का अनुबंध तो जारी करवा लिया लेकिन भुगतान पत्रक जारी ही नहीं किया।

ऐसे में शासन स्तर पर यह शो ही नहीं हो पाया कि संबंधित किसान से माल भी खरीदा है। ऐसे लंबे खेल में इसी तरह से मंडी के टैक्स की चोरी हुई थी। अभी भी फाइल यथा स्थिति में मंडी बोर्ड और ब्यावार मंडी के बीच झूल रही है लेकिन उसे दबाने की तमाम कोशिशें की जा चुकी है। अब फिर से जांच होने पर नियमानुसार कार्रवाई होने की उम्मीद है।

...और फर्जी गेट पास की फाइल दो साल में मंडी से थाने नहीं पहुंच पाई
मंडी में टैक्स चोरी के साथ ही एक व्यापारी द्वारा फर्जी गेट पास से देशभर में माल भेजने के मामले को भी जिम्मेदारों ने दबा डाला। मार्च-2017 से उजागर हुई उक्त गड़बड़ी की फाइल दो साल बाद भी मंडी से चंद कदम दूर थाने नहीं पहुंच पाई है।

इसमें तत्कालीन सचिव ने फर्जी अनुज्ञा पत्रक का प्रकरण बनाकर संबंधित व्यापारी पर कार्रवाई के लिए ब्यावरा थाने को सौंपा था लेकिन उसमें कार्रवाई तो दूर आज तक बयान तक नहीं हो पाए। बता दें कि उक्त गेट पास पर मंडी के सहायक उप-निरीक्षक की हस्ताक्षर युक्त सील लगी थी और मंडी की फर्म ओम-पूनचमंद्र गुप्ता का नाम भी था। इसी फर्जी सील और हस्ताक्षर युक्त फर्जी गेट पास मंडी के ही कर्मचारियों ने जमा किया था, जिससे देशभर में बिना मंडी शुल्क चुकाए माल भेजा जा रहा था। बड़ी गड़़बड़़ी इसमें भी हुई थी लेकिन कार्रवाई आज दिनांक तक शून्य है।

जानें टैक्स चोरी का पूरा घटनाक्रम
- 03 जून 2016 को सामने आया घटनाक्रम।
- 74 में से 61 व्यापारी टैक्स चोरी में दोषी।
- 30 लाख 60 हजार 168 रु. की टैक्स चोरी स्पष्ट।
- 05 गुना टैक्स के साथ बनना था कोर्ट प्रकरण।
- सितंबर, अक्टूबर और नवंबर-2015 के रिकॉर्ड में गड़बड़ी।
- तत्कालीन एमडी (अरुण पांडे) ने दिए थे दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश।
(नोट : मंडी बोर्ड से प्राप्त जानकारी के अनुसार)


मंडी की दशा बिगाड़ डाली
हमने भी मंडी चलाई है, एक दौर था मंडी को हमने प्रदेश में अव्वल दर्जे पर पहुंचाया। पिछले कुछ दिनों में पूरी ग्रेडिंग मंडी की बिगाड़ कर रख दी गई है। टैक्स चोरी व अन्य गड़बडिय़ां करने वालों को जिम्मेदार बचाते आए हैं, हम शासन स्तर पर कार्रवाई करावएंगे।
- रामचंद्र दांगी, सीनियर कांग्रेस नेता, ब्यावरा


रि-ओपन होगा पूरा मामला
आप मुझे पूरा मामला बता दीजिए, मैं पूरी फाइल दोबारा खुलवाऊंगी, जहां भी दिक्कत होगी, मैं जांच करवाऊंगी। जो भी दोषी होंगे उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मेरी जानकारी में फिलहाल ये नहीं है कि वह है किस स्टेज में, मैं पूरी फाइल रिओपन करवाऊंगी।
- रितु वर्मा, संयुक्त संचालक, मंडी बोर्ड, भोपाल