
राजेश विश्वकर्मा
ब्यावरा (राजगढ़).जिले की सीमा से शुरू हो जाने वाले राजस्थान में बसे कामखेड़ा बालाजी (इकलेरा जिला) मप्र की जनता के भी संकट हरते हैं। राजगढ़, ब्यावरा से लेकर भोपाल-सीहोर तक के श्रद्धालु वहां आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूरी पर स्थित बालाजी का अपना महत्व है। यहां दूर-दराज से श्रद्धालु अपनी कामना लेकर पहुंचते हैं। कभी किसी जमाने में छोटा से गांव में बसने वाले कामखेड़ा हनुमानजी अब भव्य रूप ले चुके हैं। यहां बड़ा कामखेड़ा मंदिर ट्रस्ट निर्मित हो गया है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन पाते हैं। प्रतिनिदिन यहां ट्रस्ट की और से दोनों ओर भोजन व्यवस्था रहती है। साथ ही अयोध्या की तर्ज पर बालाजी मंदिर के ठीक सामने भगवान राम का भव्य मंदिर बनाया जा रहा है जिसका निर्माण जारी है।
मप्र से ये है पहुंचने का मार्ग
राजस्थान के झालावाड़ जिले के इकलेरा-मनोहरथाना के पास पडऩे वाला उक्त धार्मिक स्थल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। हर बार नव वर्ष, प्रतिपदा, नवरात्रि, सावन माह, हनुमान जन्मोत्सव और हर मंगलवार-शनिवार को बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालु पहुंचते हैं। मप्र से उक्त धार्मिक स्थल तक पहुंचने के लिए सुगम मार्ग ब्यावरा से सीधा ६५ किमी है जो कि कालीपीठ मार्ग से होता हुआ दांगीपुरा, मनोहरथाना रोड होकर मंदिर धाम पहुंचता है। वहीं, दूसरा रूट ब्यावरा, राजगढ़, खिलचीपुर, घाटोली, इकलेरा होकर पहुंचता है। तीसरा रूप ब्यावरा से बीनागंज, वहां से मनोहर थाना होते हुए कामखेड़ा को जाता है। इन्हीं तीनों प्रमुख मार्गों से होकर इंदौर, भोपाल, सीहोर, गुना सहित अन्य जगह के धर्मावलंबी यहां दर्शन को पहुंचते हैं।
हनुमान जन्मोत्सव पर आज हम दर्शन करा रहे हैं जिलेभर के ख्यात बालाजी मंदिरों की। जानिए इनका इतिहास, मान्यता और चमत्कार...
मनोहारी छबि के लिए ख्यात हैं गढ़ी सरकार
नरसिंहगढ़.क्षेत्र के साथ ही जिलेभर में नगरसिंहगढ़ हनुमानगढ़ी के बालाजी ख्यात हैं। अपनी मनोहारी छबि के लिए वे ख्यात हैं। बाबा का विशेष और मनमोहक शृंगार श्रद्धालुओं को लुभाता है, दूर-दराज से दर्शन करने श्रद्धालु गढ़ी पहुंचते हैं। हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में समारोह निकलता है जो प्रमुख मार्गों से होकर छतरी चौराहा पहुंचता है। जन्मोत्सव के दौरान केदारनाथ धाम पर आधारित विशेष डेकोरेशन मंदिर में किया जाता रहा है।
राहगीरों की रक्षा करते हैं तीज बल्डी के बालरूप हनुमान
कुरावर.फोरलेन किनारे नरसिंहगढ़-कुरावर के बीच विराजित तीज बल्डी के बालरूप हनुमान वहां से निकलने वाले राहगीरों की रक्षा करते हैं। वर्ष-1999 के पहले पीपल के पेड़ के नीचे वे विराजित थे। आए दिन उक्त स्थान पर खतरनाक मोड़ होने से हादसे होते थे। 2001 में यह मंदिर बनकर तैयार हुआ, निर्माण के बाद सडक़ दुर्घटनाओं पर भी स्वत: ही अंकुश लग गया। जिले के साथ ही यहां से होकर निकलने वाले तमाम श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बालाजी हैं। नियमित पूजा करने वाले पं. रमेश नागर ने बताया कि यहां सुंदरकांड, भंडारे सहित अन्य धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।
क्रांति मूर्ति है ब्यावरा के अंनजीलाल
ब्यावरा.शहर की जनता सहित क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र अंजनीलाल जी ब्यावरा सहित जिले में ख्यात हैं। भव्य मंदिर और सालों पुराना इतिहास हनुमानजी की महतत्ता की गवाही देता है। बताया जाता है कि भगवान की प्रतिमा काफी क्रांति मूर्ति, उनके आशीर्वाद से सुख-समृद्धि के साथ ही तमाम प्रकार के दु:ख पल में दूर होते हैं।
प्राचीनकाल में स्थापित किए गए थे ब्यावरा के पंचमुखी हनुमान
ब्यावरा की पहचान माने जाने वाले पंचमुखी हनुमानजी का अपना इतिहास है। शहर के अतिप्राचीनतम मंदिरों में से एक पंचमुखी बालाजी हैं। यहां सालभर निराश्रितों जरूरतमंदों को मंदिर परिवार द्वारा भोजन कराया जाता है। यहीं पर गौ शाला भी संचालित है, यह उस दौर से संचालित है जब गौ शाला चलन में ही नहीं थी। पंचमुखी हनुमान की स्थापना वर्ष-१९७० के आस-पास गुरुप्रसाद दास महाराज ने की थी। करीब 125 वर्ष में उनका देहावसान हुआ था। यहां चार्तुमास माह में चार माह अखंड रामायण पाठ होता है। हनुमान जयंती पर अभिषेक के साथ ही पूजा-पाठ किया जाएगा। पं. कैलाशनारायण शर्मा ने बताया कि सभी विशेष आयोजनों पर बाबा का विशेष शृंगार यहां किया जाता है।
संकट हर लेते हैं बिन्याखेड़ी के मनकामनेश्वर बालाजी
ब्यावरा से करीब आठ किमी दूर राजगढ़ रोड से पूर्व में दो किमी की दूरी पर ग्राम बिन्याखेड़ी के बालाजी हैं। नदी के तट स्थित उक्त खेड़ापति हनुमान मंदिर का विशेष महत्व है। मनकामनेश्वर बालाजी धाम पर रोजाना श्रद्धालु पहुंचते हैं। हनुमान जन्मोत्सव पर उनका दरबार सजाया जाएगा। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति यहां सच्चे मन से कामना लेकर आता है उसकी सभी मनोकामना को भगवान पूरी होती है।
क्षेत्र में दिव्य स्वरूप ख्यात हैं माचलपुर के चाठाकुंडी बालाजी
माचलपुर.पार्वतीजी का मायका कही जाने वाली हिमाचलपुर (माचलपुर) नगरी में भगवान चाठाकुंडी बालाजी का भी अपना महत्व है। अपनी मनोहारी और दिव्य छबि, अद्भुत स्वरूप को लेकर क्षेत्र में बालाजी ख्यात हैं। उनके दिव्य स्वरूप को निहारने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। साथ काफी क्रांति मूर्ति उक्त बालाजी के दर्शन से श्रद्धालुओं के संकट दूर हो जाते हैं। जिले के एक मात्र खड़ी प्रतिमा का भव्य स्वरूप करने में पंडितों, कलाकारों को घंटों लग जाते हैं। मंदिर पर सेवा कार्य करने वाले पं. निरंजन मिश्रा ने बताया कि हनुमानजी की महिमा शब्दों में बयां नहीं की जा सकती, लेकिन यह जरूर है कि जिन पर उनकी कृपा हो गई वे धन्य हो जाते हैं, उनका पार लगना तय है।
भक्तों के संकट पल में हर लेते हैं चमत्कारी अरन्या बालाजी
रामगढ़.क्षेत्र में ख्यात अरन्या बालाजी सरकार की महिमा कुछ खास है। यहां मप्र ही नही राजस्थान के श्रद्धालु भी जुड़े हुए हैं। यहां दूर-दूर दराज से श्रद्धालु प्रार्थना लेकर पहुंचे हैं। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि सालों पहले (करीब 50 साल पूर्व) वहां मंदिर के चबूतरे के निर्माण के दौरान मजदूर खंभे खड़े कर रहे थे तो खड़े नहीं हो पाए। वे किसी को ढूढऩे गएऔर काफी देर बाद लौटे तो स्वत: ही खंभे खड़े मिले। इस चमत्कार को देख सब अंचभित रह गए। तभी से यह चमत्कार देखा और यहां धाम बन गई। वर्ष-2005 से यह मंदिर काफी ख्यात हुआ। पूर्व सरपंच महेश्वरसिंह चौहान ने बताया कि उक्त घटना मैंने स्वयं देखी थी, मैं दूसरी क्लास में था और अब 61 वर्ष का हूं।कहा जाता है कि यहां आने मात्र से ही संकट दूर हो जाते हैं। छापीहेड़ा के पास से कोई व्यक्ति आया था वह गंभीर रूप से बीमारथा, यहां आकर उक्त गरीब व्यक्ति ने कामना की तो उसका सीधा उपचार हो गया। ऐसी कई मान्यताएं यहां से जुड़ी हुई हैं।
Updated on:
16 Apr 2022 03:18 pm
Published on:
16 Apr 2022 03:08 pm
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