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किसान के सीधे खाते में ही पहुंचेगी उपज की राशि

-टीडीएस को लेकर केंद्र सरकार के ही निर्देश पर व्यापारियों ने मंडी सचिव को लिखकर दिया

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ब्यावरा। एक करोड़ से अधिक के ट्रांजेक्शन पर फिक्स किए गए दो प्रतिशत टीडीएस कटौती के बाद तमाम व्यापारियों ने एक सितंबर से डिजिटल भुगतान का निर्णय लिया है। वहीं, तमाम कृषि उपज मंडियों में ई-अनुज्ञा लागू होने के बाद किसानों को डिजिटल भुगतान का भी शासन का नियम है।


व्यापारियों ने लिखित में दे दिया
ऐसे में ब्यावरा मंडी व्यापारी एसोसिएशन सहित जिले की लगभग तमाम मंडियों के व्यापारियों ने लिखित में दे दिया है कि वे एक सितंबर से एक रुपया भी कैश भुगतान नहीं करेंगे। यानि किसान को संपूर्ण भुगतान के लिए बैंक, एटीएम ही जाना होगा। आरटीजीएस या एनएफटी के माध्यम से ही भुगतान हो पाएगा।

लिखित में कोई सर्कुलर नहीं आया
इधर, मंडी प्रबंधन का कहना है कि हमारे पास लिखित में कोई सर्कुलर नहीं आया है, व्यापारियों ने यदि लिखकर दिया है तो हम पूरा मामला भोपाल भेजेंगे। उल्लेखनीय है कि सालभर में एक करोड़ से अधिक बैंक से निकालने पर उसमें टीडीएस दो प्रतिशत लगाने की केंद्र सरकार की नई व्यवस्था है। ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि यदि हम किसानों को कैश भुगतान करने लगे तो आगमी सोयाबीन के सीजन में लाखों, करोड़ों रुपए हमें नगद ही देना पड़ेगा जो कि बैंक खाते में ऑनलाइन दो माह में ही दर्शा दिया जाएगा। ऐसेे में टीडीएस कटौती से बचने और शासन की नई डिजिटल भुगतान व्यवस्था के तहत तमाम पैमेंट ऑनलाइन ही किया जाएगी।


अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगी
व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि एक तारीख से यह व्यवस्था लागू नहीं होती है तो मंडी अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगी। अभी तक दो लाख रुपए तक कैश और इससे ऊपर की राशि का आरटीजीएस या चेक देने की व्यवस्था शासन की थी, जिसमें बदलाव किया जा रहा है।


किसानों को होगी ये फजीहत
-10 हजार या इससे कम के लिए भी बैंक के चक्कर लगाने होंगे।
-अधिकतर किसानों को ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में दिक्कत आएगी।
-किसानों को उपज के दाम उसी दिन चाहिए होते हैं, ऑनलाइन पैमेंट दो से तीन दिन में भी आता है।
-कैश नहीं मिलने से किसानों के सामने विरोध करने की स्थिति आएगी।


...और ये चुनौतियां व्यापारियों के समक्ष
-ज्यादा कैश बांट नहीं सकते, अन्यथा टीडीएस कटेगा।
-मंडी चालू रही तो किसान कैश की लिए अडेंगे, विवाद पनपेगा।
-कई किसानों के संपूर्ण दस्तावेज नहीं मिल पाते, इससे रोजाना की फजीहत बढ़ेगी।
-कम राशि का भुगतान कंपलीट होने से कुछ तकनीकि दिक्कतें आ सकती हैं।

...और ई-अनुज्ञा लागू, इसकी जटिलताओं का भी विरोध
१५ अगस्त के बाद से ही प्रदेश की मंडियों में लागू हो चुकी ई-अनुज्ञा को लेकर भी व्यापारियों की शिकायतें हैं। शासन ने ई-नाम के साथ ही तमाम काम ऑनलाइन कर देने से काफी पारदर्शिता मंडी के कार्यों में आई है। हर तरह की तुलाई, लेन-देन इत्यादि में ऑनलाइन व्यवस्था हुई है लेकिन व्यापारियों का कहना है कि ई-अनुज्ञा में प्रति दिन खरीदे जाने वाले प्रति किसान का ब्यौरा अलग-अलग देना पड़ रहा है, जिससे काम बढ़ रहा है और व्यापारियों का पूरा समय इसी में खराब हो रहा। ऐसे में उक्त जटिलताओं पर शासन ध्यान दे। फिलहाल ई-अनुज्ञा लागू होने के बाद तमाम कार्य ऑनलाइन ही किया जा रहा है।


शासन को भेजेंगे जानकारी
नई व्यवस्था की जानकारी लिखित में नहीं आई है, अभी दो लाख तक कैश की ही व्यवस्था है। यदि व्यापारियों ने लिखित में दिया है तो हम भोपाल मंडी बोर्ड को भेजेंगे। कोई हल शासन स्तर पर जरूर निकाला जाएगा। ई-अनुज्ञा का निर्णय शासन स्तर का ही है।
-जी. एल. दांगी, प्रभारी सचिव, कषि उपज मंडी समिति, ब्यावरा