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BJP Workers Resign: राजनांदगांव में BJP में बगावत! 130 कार्यकर्ताओं ने एक साथ दिया इस्तीफा, इस बात से थे नाराज

Rajnandgaon BJP Resignation: राजनांदगांव जिले के दिवान झिटिया के 130 भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी की सदस्या से इस्तीफा दे दिया है।

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BJP Workers Resign

130 भाजपा कार्यकर्ताओं ने दिया इस्तीफा (फोटो सोर्स- पत्रिका)

BJP Workers Resign: राजनांदगांव जिले में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। जिले के दिवान झिटिया गांव के 130 भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक साथ पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। सामूहिक इस्तीफे की खबर सामने आते ही स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई। नाराज कार्यकर्ताओं ने अपना इस्तीफा पूर्व सांसद अभिषेक सिंह को सौंपा है।

BJP Resignation News: सोलर प्लांट को लेकर बढ़ा विवाद

जानकारी के मुताबिक, गांव में प्रस्तावित सोलर प्लांट को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सोलर प्लांट कंपनी को नियमों के विपरीत एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) दी गई। कार्यकर्ताओं ने इस मामले में पार्टी और प्रशासन के सामने आपत्ति भी दर्ज कराई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इसी बात से नाराज होकर कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ने का फैसला लिया। उनका कहना है कि गांव और किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है, जबकि स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

गांव में बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल

130 कार्यकर्ताओं के इस्तीफे को स्थानीय स्तर पर भाजपा के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है। गांव के लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

पहले भी सामने आ चुका है सामूहिक इस्तीफे का मामला

बता दें कि इससे पहले कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक में भी सामूहिक इस्तीफे का बड़ा मामला सामने आया था। 21 मई को विकास कार्यों के लिए फंड जारी नहीं होने से नाराज 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

फंड की कमी से ठप पड़े विकास कार्य

सरपंचों का आरोप था कि लंबे समय से पंचायतों को पर्याप्त बजट नहीं मिल रहा था। इसके चलते गांवों में सड़क निर्माण, नाली निर्माण, पेयजल व्यवस्था, सामुदायिक भवन और अन्य जरूरी विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। कई योजनाएं अधूरी पड़ी थीं, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। सरपंचों ने कहा था कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी मांग रखी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। आखिरकार नाराज होकर सभी 56 सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला लिया।

प्रदेश की राजनीति में बढ़ रही नाराजगी?

लगातार सामने आ रहे सामूहिक इस्तीफों के मामलों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ भाजपा कार्यकर्ताओं का इस्तीफा, तो दूसरी तरफ सरपंचों की नाराजगी यह संकेत दे रही है कि जमीनी स्तर पर कई मुद्दों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि संबंधित मामलों में प्रशासन और राजनीतिक दल क्या कदम उठाते हैं।