
101 महिलाओं के समूह ने गरीब परिवार की बेटियों के लिए कर रहीं ये नेक काम, इसके लिए हर महीने जमा करती हैं इतनी रकम
राजनांदगांव. Rajnandgaon news शहर से तकरीबन 10 किमी दूर सिंघोला गांव की महिलाओं ने गांव में गरीब परिवार की बेटियों की शादी व शोक के कार्यक्रम में तन-मन-धन से सहयोग करने की ठानी है। दो साल पहले 101 महिलाओं का समूह बनाकर अब तक गांव के २७ परिवारों को मदद पहुंचा चुकी हैं। 13 बेटियों की शादी के अलावा १४ शोकाकुल परिवारों को मदद पहुंचा चुकी हंै। इस महिला समूह की माने तो इनका उद्देश्य खर्चीली शादी पर रोक लगाते हुए आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की बेटियों का सामूहिक विवाह कराने का है। बैठक में इसका निर्णय लेकर इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
मां भानेश्वरी बहु उद्देश्यीय महिला मंडल समिति की अध्यक्ष सरोज साहू ने बताया कि नवंबर 2019 में उनके समूह का गठन हुआ है। समूह में 101 महिलाएं हैं। उन्होंने बताया कि समूह आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की बेटियों की शादी में एक हजार रुपए नकद व एक क्विंटल चावल देकर सहायता करती हैं। इसके अलावा कामकाज में भी सहयोग करती है। इसी प्रकार किसी भी गरीब परिवार में मृत्यु होने पर भी इसी तरह मदद पहुंचाती हैं। इसके लिए समूह ने पोस्ट आफिस में एक खाता खुलवाया है, जिमसें हर महीने समूह की प्रत्येक महिलाएं ५० रुपए जमा करतीं हैं। इस राशि का वे दान करती हैं। इसके अलावा समूह के सभी सदस्य एक-एक किलो चावल इकठ्ठा कर गरीब परिवार के घर पहुंचाती है। महिला समूह के इस कार्य का गांव के अलावा आसपास के गांवों में भी प्रशंसा हो रही है। इसे दूसरे गांवों में भी अमल में लाने का भी प्रयास हो रहा है।
आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रहा समूह
Rajnandgaon news समिति की अध्यक्ष सरोज साहू, सचिव लिलेश्वरी साहू, उपाध्यक्ष उर्मिला साहू, कोषाध्यक्ष प्रभा भारद्वाज, संचालक आमेश साहू, सहयोगी युवती साहू, चुनिका साहू, यशोदा साहू आदि ने सामूहिक रूप से बताया कि उनके समूह की महिलाएं पापड़, साबुन, फिनाइल सहित अन्य चीज बनाने का भी हुनर सीख चुकी हैं। अब वे इसे बड़े रूप में करने की तैयारी में हैं। इसके लिए समूह के माध्यम से लोन लेकर काम करने की तैयारी है।
अपने घर खुद चलाती हैं
Rajnandgaon news मां भानेश्वरी बहु उद्देश्यीय महिला मंडल समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वे सब भी गरीब परिवार से हैं। समूह में बहुत सी औरतें विधवा भी हैं, जो अपने घर खुद चलाती हैं। उन्होंने बताया कि गांव में सुख-दुख में पहले भी मदद करते थे, लेकिन अब इसे सामूहिक रूप में करने से संबंधित परिवार को आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
Updated on:
27 Mar 2022 08:25 pm
Published on:
27 Mar 2022 08:22 pm
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