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४० लाख की स्वीकृति, अकाल के बाद भी नहीं किए पलायन

मासुलकसा पंचायत ने रचा नया आयाम

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४० लाख की स्वीकृति, अकाल के बाद भी नहीं किए पलायन

राजनांदगांव / जोंधरा. छुरिया विकासखंड का ये आश्रित ग्राम पूरे हिन्दुस्तान में सर्वप्रथम बिना किसी शासकीय सहायता के प्रथम शौचमुक्त होने का गौरव प्राप्त करने वाला ग्राम रहा है। जिसे राजधानी दिल्ली की टीम ने आकर खूब सराहना की थी पश्चात इस फार्मूले को पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया गया। वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए शासन से 40 लाख का काम स्वीकृत कराकर 2016-17 में हुए भीषण अकाल के बाद भी ग्रामीणों को पलायन में जाने की जरूरत नही पड़ी और ग्रामीणों ने पूरे पांच माह गांव में ही रहकर काम किया।

चालीस लाख का ये हुआ काम
चार ग्रामों से मिलकर बना ग्राम पंचायत मासुलकसा में तीन अन्य आश्रित ग्राम आते है जिसमें ग्राम बावली में बंधिया तालाब गहरीकरण के लिए 9 लाख 44 हजार, भूमि सुधार के लिए 9 हजार, ग्राम आमाकट्टा में कुसुम तालाब गहरीकरण के लिए 8 लाख 50 हजार, शीतला तालाब गहरीकरण के लिए 8 लाख 20 हजार, डबरी निर्माण के लिए 2 लाख 54 हजार, एक अन्य डबरी निर्माण के लिए 1 लाख 59 हजार, भूमि सुधार के लिए 30 हजार, मासुलकसा तालाब गहरीकरण के लिए 9 लाख, भूमि सुधार के लिए 48 लाख इसके अतिरिक्त वन विभाग द्वारा ग्राम पंचायत मासुलकसा के लिए अलग से राशि स्वीकृति प्रदान की गई है।

ग्रामीणों को जिन पर नाज है
पंचायत प्रतिनिधियों की लगातार सक्रियता व शासन के पर्याप्त सहयोग के चलते आज ग्राम पंचायत मासुलकसा नित नए विकास के सोपानो को पार करता जा रहा है जिसका श्रेय ग्रामीणों ने इन पंचायत प्रतिनिधियों को दिया है। जिसमें सरपंच पंचुराम पटौती, उपसरपंच पुनऊराम मंडावी, सचिव अंकालूराम रावटे, रोजगार सहायक चमेली बाई नायक, राजेन्द्र कुमार, अजोशी बाई, अनसुईया बाई, दुलौरिन बाई, गणेशिया बाई, रेखाराम, ममता बाई, देवकुमार, ईश्वर, बैशाखिन बाई, कार्तिकराम, उत्तराबाई कुंंवरिया बाई आदि प्रमुख है।

क्यो जाना जायेगा अलग ग्राम पंचायत मासुलकसा
पूरे हिन्दुस्तान में घर-घर शौचालय की नींव मासुलकसा पंचायत ने रखी जिसकी वजह से ये ग्राम हमेशा स्वच्छता को लेकर स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा पर इस ग्राम पंचायत के ग्रामीणों की जो सबसे बड़ी विशेषता जो उन्होंने बनाई है वह है नैतिकता की। ज्ञात रहे शासन द्वारा शासकीय कार्य में गहरीकरण करने के लिए ग्रामीण मजदूरों को 12 फीट का लक्ष्य प्रदान किया जाता है पर ग्रामीण 7 या साढ़े सात फीट की खुदाई कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते है, पर मासुलकसा पंचायत के ग्रामीण मजूदरों ने 11-11 फीट की गहरी खुदाई कर नैतिकता का नया मापदण्ड रखा है। इस संबंध में ग्राम पंचायत के सरपंच पंचुराम पटौति, उपसरपंच पुनऊराम मंडावी ने बताया कि जो राशि आज हमें मिली है वह भविष्य में उसी मद के लिए नहीं मिलने वाली है। अत: आज जो काम कर रहे है वह आनेवाली पीढिय़ों को ध्यान में रखकर ही कर रहे है।