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CG ELECTION 2018: कोमल या गिरवर जीते तो खैरागढ़ हो जाएगा लोधी गढ़

दूसरी ओर कांग्रेस के गिरवर जंघेल या भाजपा के कोमल जंघेल में से कोई जीता तो खैरागढ़ लोधी समाज का मजबूत गढ़ बन जाएगा

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Chhattisgarh election

CG ELECTION 2018: कोमल या गिरवर जीते तो खैरागढ़ हो जाएगा लोधी गढ़

राजनांदगांव. किसी समय खैरागढ़ राजपरिवार का गढ़ माने जाने वाले खैरागढ़ में एक अदद सत्ता के लिए राजपरिवार 12 साल से इंतजार कर रहा है। यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस भी ताल ठोंक रही है और यदि इस पार्टी के प्रत्याशी देवव्रत सिंह यहां से जीतते हैं तो वे चार बार विधायकी के मामले में अपनी दिवंगत मां रानी रश्मिदेवी सिंह की बराबरी कर लेंगे। दूसरी ओर कांग्रेस के गिरवर जंघेल या भाजपा के कोमल जंघेल में से कोई जीता तो खैरागढ़ लोधी समाज का मजबूत गढ़ बन जाएगा।

सामान्य सीट खैरागढ़ में इस बार मुकाबला बडा़ दिलचस्प हुआ है। कांग्रेस और भाजपा ने यहां से दो पुराने प्रतिद्वंद्वियों को आमने सामने लाकर खडा़ कर दिया है तो इनके बीच राजपरिवार के देवव्रत सिंह की उपस्थिति ने चुनाव को रोचक कर दिया है। पार्टियों के अलावा खैरागढ़ में इन तीन नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है और तय है कि जिसकी भी जीत होगी वह बडी़ होगी और जो भी हारा, वो राजनीति में काफी पीछे हो जाएगा।

सर्वाधिक आठ बार राजपरिवार ने जमाया है कब्जा
खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में दो बार उप चुनाव को मिलाकर कुल 15 बार चुनाव हुए हैं। इसमें से सर्वाधिक आठ बार यह सीट खैरागढ़ राजपरिवार के पास रही है। एक बार राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह, चार बार उनकी बहू रश्मिदेवी सिंह और तीन बार देवव्रत सिंह यहां से विधायक रहे हैं। देवव्रत सिंह यदि यह चुनाव जीतते हैं तो वे अपनी मां की बराबरी कर लेंगे।

ये भी बना सकते हैं रिकार्ड
भाजपा के कोमल जंघेल जीत के साथ पहले ऐसे व्यक्ति हो जाएंगे जो खैरागढ़ राजपरिवार के बाहर के होंगे जो तीन बार विधायक बनेंगे। वे तीन बार के विधायक देवव्रत सिंह की बराबरी कर लेंगे। कांग्रेस के गिरवर जंघेल भी दो जीत का रिकार्ड बनाएंगे। गिरवर और कोमल की जीत से खैरागढ़ में लोधी समाज और मजबूत होगा।

खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र 74
वर्ष विधायक
1957 - ऋतुपर्ण किशोर दास (कांग्रेस)
1962 - ज्ञानेन्द्र सिंह (कांग्रेस)
1967 - वीरेन्द्र बहादुर सिंह (कांग्रेस)
1972 - विजयलाल ओसवाल (कांग्रेस)
1977 - माणिक गुप्ता (जनता पार्टी)
1980 - रश्मिदेवी सिंह (कांग्रेस)
1985 - रश्मिदेवी सिंह (कांग्रेस)
1990 - रश्मिदेवी सिंह (कांग्रेस)
1993 - रश्मिदेवी सिंह (कांग्रेस)
1995 - (उप चुनाव) - देवव्रत सिंह (कांग्रेस)
1998 - देवव्रत सिंह (कांग्रेस)
2003 - देवव्रत सिंह (कांग्रेस)
2006 - (उप चुनाव) - कोमल जंघेल (भाजपा)
2008 - कोमल जंघेल (भाजपा)
2013 - गिरवर जंघेल (कांग्रेस)


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