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मक्काटोला व गोविंदपुर में पंचायत चुनाव 6 माह के लिए स्थगित करने रखी मांग

ग्रामीणों ने एसडीएम से मिलकर दिखाई न्यायालय से मिली आदेश कापी

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Demand for postponement of Panchayat elections in Makkatola and Govindpur for 6 months

ग्रामीणों ने एसडीएम से मिलकर दिखाई न्यायालय से मिली आदेश कापी

राजनांदगांव / डोंगरगढ़. छत्तीसगढ़ में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए तारीख की घोषणा हो चुकी है और इसी माह 30 दिसंबर से नामांकन भरा जाना है। ऐसे में उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के द्वारा 28 नवंबर को ग्राम हीरापुर को पूर्व की भांति मक्काटोला पंचायत में रखकर पंचायत चुनाव संपन्न कराने की आदेश जारी किया गया था, जिसकी कापी सरपंच हेमलाल वर्मा ने 3 दिसंबर को जिलाधीश, एसडीएम डोंगरगढ़ व सीईओ जनपद पंचायत डोंगरगढ़ के सामने प्रस्तुत किया था। परन्तु प्रशासन द्वारा तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी उस आदेश में कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने फिर से 26 दिसंबर को तीनों आफिसों में जाकर आवेदन प्रस्तुत किया व उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के आदेश की कापी संलग्न की। तत्पश्चात सरपंच हेमलाल वर्मा फिर से उच्च न्यायालय जाने की तैयारी में है।

28 नवंबर को न्यायालय से हुआ आदेश जारी
28 दिसंबर को कलक्टर के द्वारा सचिव छग राज्य निर्वाचन आयोग रायपुर को पत्र लिखा है जिसमें डोंगरगढ़ ब्लाक के ग्राम पंचायत मक्काटोला एवं ग्राम पंचायत गोविंदपुर के पंच एवं सरपंच के चुनाव को स्थगित करने का निवेदन किया है। यह ग्रामवासियों के लिए खुशी कि बात है लेकिन इसमें प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब उच्च न्यायालय ने 28 नवंबर को आदेश जारी किया था कि अगर शासन अभी ग्राम पंचायत चुनाव कराना चाहे तो उसे पुराने प्रकाशन मतलब पुरानी ग्राम पंचायत कि स्थिति से चुनाव कराना है, किन्तु एक माह बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं की गई और प्रशासन उल्टे हीरापुर को गोविंदपुर पंचायत के हिसाब से ही चुनाव कराने तैयारी करता रहा।

ग्रामीणों ने जिलाधीश से मिलकर दिखाया आदेश कापी
जिलाधीश ने ग्राम पंचायत मक्काटोला एवं गोविंदपुर का पंचायत चुनाव स्थगित करने पत्र लिखा है जबकि उच्च न्यायालय के आदेश के हिसाब से यह दोनों पंचायत ही नहीं बल्कि इसके साथ ही साथ मोतीपुर एवं खूबाटोला का भी पंचायत चुनाव स्थगित होना चाहिए क्योंकि जब नवीन ग्राम पंचायत गोविंदपुर गठन किया गया था तब तीन पंचायतें प्रभावित हुई थी। उस समय मोतीपुर पंचायत के आश्रित ग्राम गोविंदपुर था। इसे अलग करके मोतीपुर को स्वंतत्र पंचायत बनाया गया और खूबाटोला पंचायत के आश्रित ग्राम बरमपुर को अलग कर मक्काटोला में जोड़ा गया। साथ ही मक्काटोला के आश्रित ग्राम हीरापुर को नवीन पंचायत गोविंदपुर का आश्रित ग्राम बना दिया गया। अब इस स्थिति में सिर्फ दो पंचायत का चुनाव रोकना कहा तक सही है। नियमानुसार प्रभावित चारों पंचायतों का चुनाव स्थगित होना चाहिए।

चार गांवों के ग्रामीणों ने जिलाधीश से मिले
अभी छह माह तक दोनों पंचायत का चुनाव स्थगित रहेगा लेकिन गोविंदपुर और बरमपुर के ग्रामवासी इन छह माह में कौन से सरपंच के पास हस्ताक्षर कराएगा या गोविंदपुर और बरमपुर का देखरेख कौन करेगा? क्योंकि जब तक चुनाव नहीं हो जाते मक्काटोला और हीरापुर का सरपंच तो हेमलाल वर्मा ही रहेंगे परंतु मोतीपुर व खुबाटोला पंचायत का चुनाव इन दोनों गांव को छोड़कर होंगे। ऐसे में शासन-प्रशासन इन गांव के लिए क्या विकल्प तैयार करेगा यह जिलाधीश ही बता पाएंगे। हीरापुर के ग्रामवासियों ने जिलाधीश निवेदन किया हैं कि जब तक उच्च न्यायालय में हमारा केस प्रक्रिया में है तब तक इससे प्रभावित चार ग्राम पंचायतों का चुनाव स्थगित करने की मांग की है।