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Ganesh Utsav 2024: 100 साल पुरानी है गणेशोत्सव मनाने की परंपरा, आजादी की लड़ाई से जुड़ा है किस्सा…

Rajnandgaon News. बाल गंगाधर तिलक के आह्वान पर सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत करते हुए पंडाल में आजादी की लड़ाई पर रणनीति बनाया करते थे।

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Ganesh utsav 2024 rajnandgaon

Rajnandgaon News: संस्कारधानी में गणेशोत्सव मनाने की परंपरा 100 साल पुरानी है। पहले राजा के महल में गणेशोत्सव होता था। 1934 में पहली बार बाल समाज की ओर से सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की गई। इस उत्सव के बहाने गणेश पंडाल में एकजुट होकर आजादी की लड़ाई की रणनीति बनाते थे। समय के साथ नई गणेशोत्सव समितियों का गठन होता गया और इनकी संख्या बढ़ गई। अब शहर के हर गली-मोहल्ले में भगवान गणेश की प्रतिमाएं रखकर बड़े ही धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है।

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इस बार भी 7 सितंबर से उत्सव की शुरुआत होगी। पूरे 11 दिनों तक शहर में रौनक रहेगी। आजादी की लड़ाई के दौर में बाल गंगाधर तिलक ने देशभर के लोगों से आह्वान किया था कि गणपति उत्सव को सार्वजनिक रूप से मनाया जाए। इस आह्वान पर बाल समाज गणेशोत्सव समिति का गठन किया गया और ऊर्जावान युवाओं को इसमें शामिल कर 1934 में गणेश की प्रतिमा स्थापित की। सार्वजनिक रूप से उत्सव शुरू किया।

1920 में बीएनसी मिल के मजदूर आंदोलन से राजनांदगांव में भी आजादी की लड़ाई का शंखनाद हो चुका था। इस आंदोलन से शहर के लोग जुड़ चुके थे। इसलिए बाल गंगाधर तिलक के आह्वान पर सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत करते हुए पंडाल में आजादी की लड़ाई पर रणनीति बनाया करते थे। संस्था ने देश में हैजा, डेंगू, लैग फैलने पर मरीजों की मदद की थी।

Ganesh Utsav 2024: माहभर पहले शुरू होती थी तैयारी

गणेशोत्सव से जुड़ी शिक्षक गणेश प्रसाद शर्मा ने बताया कि पहले शहर में समिति के सदस्य ही झांकी तैयार करते थे। सावन माह लगते ही झांकी तैयार करना शुरू कर देते थे। समिति के सदस्य स्वयं झांकी बनाने में जुटे रहते थे। अब ऑर्डर कर झांकियां बनाने का सिलसिला चल पड़ा है।

इस संस्था को अब 89 वर्ष हो चुके हैं और परंपरा आज भी कायम है। संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि गणेशोत्सव के साथ ही विसर्जन झांकी का सिलसिला भी बाल समाज ने ही शुरू किया। इसके बाद अन्य समितियों की ओर से परंपरा को अपनाया गया। अब तो शहर में 30 से अधिक विसर्जन झांकियां निकलती है।