
जमीन रजिस्ट्री घटी, फिर भी राजस्व बढ़ा! अवकाश में भी खुलेंगे पंजीयन कार्यालय, जारी हुए निर्देश...(photo-patrika)(फोटो- Patrika.com)
CG Property Registry: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में इस वित्तीय वर्ष जमीन के कारोबार में सुस्ती देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कम रजिस्ट्री के आंकड़ों को संतुलित करने और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से शासन ने अवकाश के दिनों में भी पंजीयन कार्यालय खोलने का निर्णय लिया है।
राज्य शासन के महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम माह में राजस्व संग्रहण को बढ़ाने और नागरिकों की सुविधा के मद्देनजर शनिवार-रविवार सहित अन्य अवकाश के दिनों में भी रजिस्ट्री का कार्य जारी रहेगा।
जारी अधिसूचना के अनुसार मार्च माह में पंजीयन की बढ़ती मांग को देखते हुए 22 मार्च (चतुर्थ रविवार), 28 मार्च (अंतिम शनिवार) और 31 मार्च (अंतिम रविवार) को भी सभी पंजीयन कार्यालय सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे। इन दिनों में भी दस्तावेजों का पंजीयन कार्य सुचारू रूप से किया जाएगा।
शासन ने जिला पंजीयक, कोषालय अधिकारी और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि 31 मार्च तक शासकीय लेनदेन निर्बाध रूप से जारी रहे। साथ ही ई-स्टाम्प की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन और तकनीकी सहायता के लिए एनआईसी को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
राजनांदगांव तहसील मुख्यालय में पिछले साल की तुलना में 6 करोड़ 81 लाख रुपए की कमी दर्ज की गई है। पिछले वर्ष जहां 78 करोड़ 14 लाख रुपए की रजिस्ट्री हुई थी, वहीं इस वर्ष यह घटकर 71 करोड़ 32 लाख रुपए रह गई। इसी तरह डोंगरगढ़ में 6 करोड़ 75 लाख से घटकर 6 करोड़ 68 लाख और गंडई में 3 करोड़ 45 लाख से घटकर 3 करोड़ 5 लाख रुपए रह गया है।
हालांकि जिले की अन्य तहसीलों में राजस्व में बढ़ोतरी देखने को मिली है। खैरागढ़ में 10 करोड़ 66 लाख से बढ़कर 13 करोड़ 96 लाख रुपए, छुईखदान में 53 लाख 27 हजार से बढ़कर 61 लाख 70 हजार रुपए, डोंगरगांव में 4 करोड़ 15 लाख से बढ़कर 6 करोड़ 87 लाख रुपए और छुरिया व मोहला में भी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष फरवरी तक 22,270 रजिस्ट्री दर्ज की गई थीं, जबकि इस वर्ष यह संख्या घटकर 21,412 रह गई है। इसके बावजूद राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष फरवरी तक 109 करोड़ 29 लाख रुपए का राजस्व मिला था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 111 करोड़ 78 लाख रुपए हो गया है, जो करीब 2 करोड़ 49 लाख रुपए अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन के कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण है। राज्य सरकार द्वारा नवंबर में जमीन के रेट में डेढ़ गुना तक वृद्धि की गई थी, जिसके चलते कम रजिस्ट्री के बावजूद राजस्व में इजाफा हुआ है।
Updated on:
21 Mar 2026 11:28 am
Published on:
21 Mar 2026 11:27 am
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