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नक्सलियों ने जिसे मौत के घाट उतारा उसकी स्मारक बनाकर आदिवासियों ने किया ये बड़ा ऐलान…

माओवादियों ने गढ़चिरौली जिले के इस गांव के एक ग्रामीण की हत्या कर दी थी। इसके बाद से ग्रामीण माओवादियों से नाराज हो गए।
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राजनंदगांव

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Dakshi Sahu

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Updated: 6 May 2018, 12:42 PM IST

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राजनांदगांव. माओवादियों के आतंक और प्रताडऩा को बरसों से मौन रहकर सहने वाले आम ग्रामीणों और आदिवासियों के लिए एक साहस भरने वाली खबर आई है पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के कटेझरी इलाके से। इस इलाके के ग्रामीण अब माओवादियों के खिलाफ एकजुट होने लगे हैं।

ग्रामीण की हत्या से नाराज थे आदिवासी
ग्रामीणों ने माओवादियों द्वारा मारे गए एक आदिवासी का स्मारक बनाकर ऐलान कर दिया है कि वे माओवादियों का न ही साथ देंगे और न ही उनकी किसी प्रकार की मदद करेंगे। दरअसल, माओवादियों ने गढ़चिरौली जिले के इस गांव के एक ग्रामीण की हत्या कर दी थी। इसके बाद से ग्रामीण माओवादियों से नाराज हो गए।

पत्थर से सिर कुचलकर मार डाला
जानकारी के अनुसार इस साल १३ मार्च को ने कटेझरी निवासी दुर्गुराम सोनेराम कोल्हे का उस वक्त अपहरण कर लिया था, जब वह अपने साथियों के साथ तेंदूपत्ता तोडऩे के लिए जा रहा था। दुर्गुराम को कतटेझरी-ग्यारहपत्ती रोड पर अगवा किया गया और कुछ दूर ले जाकर पत्थरों से कुचलकर उसकी हत्या कर दी गई। एक आम आदिवासी ग्रामीण की इस तरह बेदर्दी से की गई हत्या ने पूरे गांव में आक्रोश भरने का काम किया।

लगाए खूब नारे
माओवादियों की इस करतूत के खिलाफ आक्रोशित ग्रामीणों ने गांव में इक_ा होकर माओवादियों के खिलाफ जमकर नारे लगाए। इस दौरान मृतक ग्रामीण दुर्गुराम के परिजन भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने गांव में ही दुर्गुराम का स्मारक बनाया और ऐलान किया कि अब कोई भी ग्रामीण माओवादियों का साथ नहीं देगा और न ही उनकी किसी भी तरह से मदद देगा।

अब तक 5 सौ को मार चुके
आदिवासियों ने कहा कि एक ओर माओवादी आदिवासियों के हित में लडऩे की बात करते हंै और दूसरी ओर वे बेगुनाह आदिवासियों को ही मारने का काम करते हैं। आदिवासी समाज के लोगों ने कहा कि माओवादियों ने अब तक ५ सौ से ज्यादा आदिवासियों को मौत के घाट उतार दिया है लेकिन अब उनके खिलाफ आवाज उठाने का वक्त आ गया है। आदिवासियों ने कहा कि अब आम आदिवासियों को माओवादियों की साजिश का शिकार नहीं होने दिया जाएगा।