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करोड़ों की आय देने वाली डोंगरगढ़ की रेल अधिकारियों द्वारा की जा रही उपेक्षा

स्टापेज की मांग पर मिलता है आश्वासन
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राजनंदगांव

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Nakul Ram Sinha

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Updated: 14 Aug 2018, 12:44 PM IST

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मांग... डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन में कई ट्रेनों का नहीं है स्टापेज।

राजनांदगांव / डोंगरगढ़. डोंगरगढ़ से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को नगर से प्रति वर्ष करोड़ों की आय प्राप्त होती है। डोंगरगढ़ विकास मंच के सचिव केके वर्मा को सूचना के अधिकार के अंतर्गत नागपुर रेल मंडल के जन सूचना अधिकारी एवं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक से प्राप्त जानकारी के अनुसार डोंगरगढ़, तिरोड़ा, तुमसर रोड एवं भंडारा रोड स्टेशनों से आरक्षित एवं अनारक्षित टिकट बिक्री का माह मई 17 से अप्रेल 18 तक 12 माह का विवरण प्रेषित किया गया है। विवरण के अनुसार टिकट बिक्री से प्राप्त आय का आंकड़ा डोंगरगढ़ से 8 करोड़ 10 लाख 70 हजार 25 रूपये, तिरोड़ा से 3 करोड़ 35 लाख 937 रूपये, तुमसर रोड से 4 करोड़ 81 लाख, 34 हजार 382 रूपये व भंडारा रोड से 6 करोड़ 66 लाख 64 हजार 405 रूपये मासिक सीजन टिकट बिक्री से प्राप्त आय को छोड़कर हुई है। इससे स्पष्ट है कि डोंगरगढ़ में टिकट बिक्री से रेलवे को सबसे अधिक आय होती है। किन्तु रेल अधिकारियों की पक्षपातपूर्ण, नीतियों के कारण डोंगरगढ़ को ट्रेनों के स्टापेज से वंचित रखा जाता है।

वर्षो से छले जा रहे डोंगरगढ़वासी
रेल अधिकारियों से जब भी ट्रेनों के स्टापेज की मांग डोंगरगढ़ की जनता द्वारा की जाती है तो रेल अधिकारियों द्वारा कम टिकट बिक्री एवं कम आय का बहाना बनाकर डोंगरगढ़ की जनता को छला जाता है। डोंगरगढ़ को सर्व धर्म समभाव की नगरी माना गया है और इसी आधार पर छग पर्यटन बोर्ड द्वारा डोंगरगढ़ को टुरिस्ट प्लेस का दर्जा दिया गया है एवं रेलवे भी डोंंगरगढ़ को टूरिस्ट प्लेस मानती है। इसके बावजूद रेल अधिकारी डोंगरगढ़ की उपेक्षा करते है। अधिकारियों की उपेक्षा के कारण ही बिलासपुर जोन से प्रांरभ होने वाली 7 ट्रेनें बिलासपुर एर्णाकुलम, बिलासपुर हापा, बिलासपुर चेन्नई, बिलासपुर पुणे, बिलासपुर नई दिल्ली, बिलासपुर भगत की कोठी व बिलासपुर बिकानेर एक्सप्रेस का स्टापेज डोंगरगढ़ में नहीं दिया गया जबकि बिलासपुर भगत की कोठी एवं बिलासपुर बिकानेर एक्सप्रेस का स्टापेज भाटापारा एवं भिलाई पॉवर हाऊस में दिया गया है।

स्टेशन से २७ ट्रेने धूल उड़ाते गुजर जाती है
डोंगरगढ़ से कम आय वाले तुमसर रोड में हावड़ा-पुुणे आजाद हिंद एक्सप्रेस का स्टापेज, भंडारा रोड में हावड़ा- पुणे आजाद हिंद, पुरी जोधपुर एक्सप्रेस एवं हावड़ा-मुंबई गीतांजलि एक्सप्रेस का स्टापेज दिया गया है। इसी प्रकार अन्य रेलवे जोन से प्रारंभ होकर डोंगरगढ़ से गुजरने वाली 27 ट्रेनों में से किसी का भी स्टापेज डोंगरगढ़ में नहीं दिया गया, हटिया पुणे, टाटानगर लोकमान्य तिलक अन्त्योदय एक्सप्रेस, रक्सौल हैदराबाद, दरभंगा सिकन्दराबाद, पुरी गांधी धाम, पुरी सूरत, मालदा टाऊन-सूरत, हावड़ा पुणे आजाद हिंद, हावड़ा एलटीटी ज्ञानेश्वरी, हावड़ा पोरबंदर (ओखा), पुरी एलटीटी, पुरी अजमेर, हावड़ा एलटीटी समरसता, संतरा गाछी पोरबंदर कवि गुरू, पुरी साईं नगर शिर्डी, विशाखापट्टनम, एलटीटी, भुवनेश्वरी एलटीटी, पुरी एलटीटी, हटिया एलटीटी, हावड़ा मुंबई दुरंतो, हावड़ा पुणे दुरंतो, हावड़ा मुंबई गीतांजलि, पुरी गांधी धाम, हावड़ा साईंनगर, कामाख्या एलटीटी, संतरागाछी-हुजूर साहिब नांदेड़, पुरी जोधपुर एक्सप्रेस है।

अधिकारियों ने सांसद की मांग को भी ठुकराया
इन ट्रेनों में से कुछ ट्रेनों का स्टापेज नवरात्रि के समय डोंगरगढ़ में दिया जाता है किन्तु नियमित स्टापेज दिये जाने की मांग को ठुकरा दिया जाता है। सांसद ने 13 नवंबर 2017 को नई दिल्ली में रेल मंत्री पीयुष गोयल से मुलाकात कर राजनांदगांव में 11 व डोंगरगढ़ में आठ ट्रेनों के स्टापेज की मांग की थी, जिस पर रेल मंत्री द्वारा उचित कार्यवाही का आश्वासन भी दिया गया था किन्तु आज 9 माह बीतने पर भी कोई कार्यवाही नजर नहीं आ रही है। कारण रेल अधिकारियों द्वारा स्टापेज नहीं दिये जाने की हठधर्मिता ही है। जब एक सांसद के मांगों की उपेक्षा की जाती है तो एक आम नागरिक के साथ रेलवे के अधिकारी कैसा बर्ताव करते होंगे यह कल्पनीय है। विकास मंच ने डोंगरगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए रेल सुविधाओं के विस्तार नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।