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सिर्फ नाम का मॉडल स्कूल, शिक्षकों और सुविधाओं की कमी बरकरार

कागजों में चलाया जा रहा मॉडल स्कूल

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Only name model school, teachers and lack of facilities remain

पढ़ाई के लिए शिक्षक जरूरी... भवन की पुताई मात्र से नहीं चलेगा काम।

राजनांदगांव / घुमका. शासन की ओर से शिक्षा के गुणवत्ता को सुधारने के लिए भारी भरकम बजट और जिला प्रशासन के सख्त हिदायत के बाद भी ग्रामीण अंचलों में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के तमाम प्रयासों के बाद ग्रामीण अंचलों के प्राथमिक माध्यमिक और अन्य स्तर पर भी शिक्षा का स्तर बेहद चिंताजनक बताया जा रहा है। खबरों के अनुसार घुमका समेत आसपास के कई स्कूलों में बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता विगत कई वर्षों से नाम मात्र भी सुधार की स्थिति में नहीं है। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए प्रत्येक संकुल में एक-एक स्कूल को मॉडल स्कूल के रूप में चुनाव किया गया है ताकि संकुल के बाकी स्कूल उसका अनुकरण कर सके। जिसके तहत हरडुआ और घुमका संकुल से गोपालपुर एवं कलेवा के दोनों स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।

किचन शेड में भी सफाई का अभाव
मॉडल स्कूल के मापदंड के अनुसार इन स्कूलों में सुविधाओं का होना आवश्यक है परंतु वर्तमान स्थिति में यह दोनों विद्यालय मॉडल स्कूल के मापदंड को नाम मात्र भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इन स्कूलों की ताजा हालत देखी जाए तो स्थिति बहुत अच्छी नहीं है पूर्व माध्यमिक शाला कलेवा में कुल दर्ज 91 बच्चों का है। यहां वर्तमान में पदस्थापना के नाम पर 3 शिक्षक हैं परंतु इतने अधिक दर्ज और तीन कक्षाओं के संचालन के लिए मात्र एक शिक्षिका कार्यरत है। एक शिक्षिका मेडिकल अवकाश है, एक शिक्षक जो प्रभारी के तौर पर कार्यरत थे उनको वर्तमान में अस्थाई तौर पर संकुल समन्वयक बना दिया गया है जिसके चलते उक्त शिक्षक के शिक्ष की कार्य का लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। इसी स्कूल के किचन शेड में पर्याप्त साफ-सफाई भी नहीं है। स्कूल के नियंत्रण के लिए स्थाई प्रधान पाठक भी नियुक्त नहीं है, बाउंड्री वाल भी व्यवस्थित नहीं है। किचन गार्डन एवं परिसर में उद्यान भी नहीं है। मात्र एक शिक्षकीय विद्यालय में पढ़ाई के स्तर और गुणवत्ता की कल्पना इस स्थिति में कैसे की जा सकती है।

निराशाजनक परिणाम
मॉडल स्कूल कलेवा के पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालय के कई बच्चों का परिणाम राज्य स्तरीय आकलन परीक्षा में बेहद निराशाजनक रहा है कुछ बच्चों को 0 अंक तक मिले हैं आखिर वर्षभर शिक्षकों का प्रयास इन बच्चों के लिए क्या रहा होगा जबकि अभी 3 वर्ष की कार्य योजना शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए बनाई गई है जिसके तहत इस वर्ष राज्य स्तरीय आकलन परीक्षा भी ली गई है परंतु बच्चों का प्रदर्शन 0 अंक में है तब अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की व्यवस्था किस प्रकार की होगी।

मॉडल स्कूलों को किया जाएगा विकसित
बीईओ राजनांदगांव, एनके पंचभावे ने कहा कि मॉडल स्कूलों के लिए अधिकारियों ने दौरा कर चयनित किया है। प्रयास किया जाएगा कि मॉडल स्कूलों के मापदंड पर उक्त विद्यालय को विकसित किया जाए और शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए मैं स्वयं कल से लगातार दौरा करूंगा तथा जिन स्कूलों में परिणाम खराब हैं अथवा बच्चों का अंक शून्य मिला है वहां अतिरिक्त कक्षाएं लगाने के लिए शिक्षकों को तुरंत निर्देशित करता हूं।

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