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राजनीति… छुटभैया नेताओं ने टिकट की दावेदारी ठोंकते हुए शुरू किया गांव भ्रमण

सियासी जमीन पर तैयार खड़ी दावेदारी का फसल कटाई का अब वक्त आ गया है, समीकरण सैट करने की जुगत में भाजपा-काग्रेस व जोगी कांग्रेस के दावेदार

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राजनीति... छुटभैया नेताओं ने टिकट की दावेदारी ठोंकते हुए शुरू किया गांव भ्रमण

राजनांदगांव / ठेलकाडीह. इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जनता के बीच दावेदारों का चहल-पहल बढ़ गई है। इन दिनों गांवों में डोंगरगढ़ विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां परबान चढऩे लगी है। हर किसी का अपना दांव पेंच चल रहा है। कोई बायोडाटा के बहाने हाईकमान तक अपनी बात पहुंचा रहा है, तो कोई समीकरणों के सांचे में खुद को सबसे उपयुक्त मान प्रचारित भी कर रहा है।

मुकाबला होगा दिलचस्प
चुनाव सन्निकट है लिहाजा विधानसभा की सियासत में भी रंग- बिरंगी तस्वीरे नजर आने लगी है। कुल मिलाकर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। इधर चुनाव को लेकर इस समय कुछ ऐसे नेता भी क्षेत्र में अपनी टिकट की दावेदारी ठोकते हुए गांव-गांव भ्रमण करने से नहीं चूक रहे है। क्षेत्र में भावी भाजपा-कांग्रेस व जोगी कांग्रेस के प्रत्याशियों के नामों पर अटकले लगने की शुरूआत हो गई है। वहीं दूसरी ओर गौर किया जाए तो डोंगरगढ़ क्षेत्र में अपनी दावेदारी ठोकने वालों की भी इस समय गांव-गांव भीड़ उमड़ते हुए दिखाई देने लगी है। जिन्हें क्षेत्र की जनता जानती तक नही है, मगर उनके द्वारा भी प्रमुख पार्टियों की ओर से अपने आप को टिकट का मजबूत दावेदार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। यह स्थिति काग्रेंस में कम मगर भाजपा में ज्यादा देखने मिल रहा है। डोंगरगढ़ क्षेत्र में अपनी दावेदारी की ताल ठोंकते नजर आ रहे हैं।

पौधरोपण के बहाने कर रहे तैयारी
आगामी चुनाव के मद्देनजर प्रमुख पार्टियों में सियासी गतिविधियां तेज हो गई है। टिकट के दावेदार भी एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है। वहीं कुछ नेताओं द्वारा गांव-गांव पौधरोपण करते हुए अपनी दावेदारी मजबूती बताई जा रही है। मगर कहा जाता है कि मन के लड्डू खाने का तो सभी को अधिकार होता है, उसे तो कोई नही छिन सकता है। यानि सपना देखने पर तो कोई प्रतिबंध नहीं रहता है। मगर सवाल यह पैदा होता है कि ऐसे नेता आज तक न तो जनता के बीच किसी परेशानी में पहुंचे है और न ही उन्हें क्षेत्र की जनता जानती है फिर भी दावेदारी ठोकना जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

पार्टियां अंतर्कलह की जद में
चुनावी बिसात बिछाये जाने के साथ ही युद्धस्तर पर चले रहे प्रयासों के बीच प्रमुख पार्टियों में अंदरूनी कलह भी सामने आ रही है। खात बात यह है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जहां एकता और अनुशासन का पैगाम लेकर दिन रात एक करते हुए तमाम रणनीति बनाकर हर स्तर पर मजबूती के लिए प्रयासरत है। लेकिन कहीं उपेक्षा और महत्व न मिलने की वजह से बात-बात पर कलह बम फूट रहे है।

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