
स्वास्थ्य सुविधा की तरह ही गरीबी रेखा कार्ड पर गरीब बच्चों को मिले नि:शुल्क शिक्षा
राजनांदगांव. राज्य शासन ने गरीबी रेखा राशन कार्ड से ५ लाख तक मुफ्त इलाज देने की घोषणा की है। छग पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने इसी गरीबी रेखा कार्ड के आधार पर ही गरीबों के बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने की मांग रखी है। ताकि नि:शुल्क शिक्षा का लाभ गरीब बच्चों को मिल सके और सीटें रिक्त न रहे।
पॉल का कहना है कि पूर्व की सरकार ने राशन कार्ड के आधार पर उज्जवला योजना के अंतर्गत मुफ्त गैस कनेक्शन, संपर्क क्रांति योजना के अंतर्गत मुफ्त फोन और खाद्यान्न योजना का लाभ दिया था, तो इस कार्ड के आधार पर बच्चों को शिक्षा का अधिकार भी मिलना चाहिए।
पॉल ने यह मांग किया है कि डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना का लाभ लेने स्मार्ट कार्ड की अनिवार्यता समाप्त कर दिया गया है, उसी प्रकार आरटीई प्रवेश हेतु सर्वे सूची की अनिवार्यता भी समाप्त कर दिया जाना चाहिए और सिर्फ गरीब रेखा कार्ड के आधार पर गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा का लाभ दिया जाना चाहिए।
ऐसी है आरटीई की स्थिति
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ में बीते साल 40 हजार तो इस साल 38 हजार सीटें रिक्त रह गई, जिसे भरा नहीं जा सका हैं और विगत सात वर्षों में लगभग 15 हजार बच्चों ने आरटीई के अंतर्गत प्रवेश पाने के बाद स्कूल छोड़ दिया है। आरटीई वेबपोर्टल में अभी भी कई खामियां है कि स्कूलों को एक किलोमीटर के परिधि में मैपिंग कर दिया गया है, जब दूसरे स्कूलों में सीटें रिक्त रह जाती है तो बच्चे को उस स्कूल में आवेदन करने की सुविधा नहीं दिया जाता है, क्योंकि एक बच्चा एक ही आवेदन कर सकता है।
आरटीई में हिन्दी मिडियम और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे प्रवेश लेने में रूचि नहीं दिखा रहे है, क्योंकि ज्यादातर रिक्त सीटें हिंदी मिडियम और ग्रामीण क्षेत्रों की ही होती है और जो बच्चे प्रवेश ले भी रहे हैं तो वे स्कूल छोड़ रहे हैं, क्योंकि ज्यादातर ड्रापआउट भी ग्रामीण क्षेत्रों में ही हो रहा है जो चिंता का विषय है, जिस पर स्कूल शिक्षा विभाग और संचालनालय हो गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
Published on:
19 Jan 2020 08:29 pm
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