16 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मुफ्त गैस सिलेंडर के नाम पर सरकार लूट रही वाहवाही, यहां लकड़ी के धुएं के बीच बनता है नौनिहालों का भोजन

केन्द्र सरकार की ओर से महिलाओं को धुएं के दुष्परिणामों से बचाने के लिए निशुल्क गैस कनेक्शन वितरण किया जा रहा है।

2 min read
Google source verification

image

Satya Narayan Shukla

Jan 03, 2017

The government is distributing the gas cylinder is

The government is distributing the gas cylinder is made of wood smoke in the stove food

राजनांदगांव.
केन्द्र सरकार की ओर से महिलाओं को धुएं के दुष्परिणामों से बचाने के लिए निशुल्क गैस कनेक्शन वितरण किया जा रहा है। उज्जवला योजना के तहत कनेक्शन बांट रहे हैं, पर विडंबना है कि सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए घरेलू गैस नहीं बल्कि मिट्टी के चूल्हे में लकड़ी जलाकर भोजन बनाया जा रहा है। रसोई कमरे में धुआँ-धुआँ रहता है। रसोइये और स्कूली बच्चे धुआं सहने मजबूर हैं। स्कूलों के नाम से गैस कनेक्शन भी आबंटित है पर महिला समूहों की ओर से अपने लाभ-हानि को देखते हुए भोजन बनाने गैस का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। रसोइये कहते हैं कि धुआं सहते हुए काम करते हैं और सरकार महज 1200 रुपए मानदेय देती है। जबकि स्वांस से संबंधित बीमारी का खतरा है।


गैस कनेक्शन दिया

कन्हारपुरी में एक ही परिसर में दो प्राथमिक और एक मिडिल स्कूल संचालित है। इन स्कूलों के नाम से गैस कनेक्शन तो दिया गया है पर यहां महिला समूह की ओर से गैस से नहीं बल्कि लकड़ी से भोजन तैयार किया जाता है। कीचन की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि भोजन बनाने का काम करने वाले रसोइयों को किस तरह धुएं में हलाकान होना पड़ता है। रसोइया अंजली साहू, शांति बाई व कुरैश बेगम ने बताया कि समूह की ओर से भोजन बनाने के लिए गैस का इस्तेमाल नहीं किया जाता। लकड़ी से भोजन बनाते हैं तो धुआं सहना पड़ता है। इसके चलते आंखों पर असर पडऩे लगा है। इन परेशानियों से जूझते हुए रसोइये काम कर रहे हैं।


लकड़ी जलाकर भोजन तैयार

चार से पांच साल पहले राज्य सरकार की ओर से मध्याह्न भोजन बनाने के लिए स्कूलों को गैस कनेक्शन का वितरण किया गया था। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले के सभी स्कूलों को कनेक्शन नहीं दिया गया था। इस वजह से चूल्हे से भोजन बनाने की नौबत है। स्कूलों में मध्याह्न भोजन का काम संभालने वाली स्व सहायता समूह की पदाधिकारियों ने बताया कि स्कूलों के नाम से कुछ स्कूलों को गैस कनेक्शन मिला है पर बच्चों की दर्ज संख्या अधिक होने के कारण गैस से भोजन बनाना महंगा पड़ता है। एक सिलेंडर ज्यादा दिन नहीं चल पाता। बाजार से समय पर सिलेंडर भी नहीं मिलता। इस वजह से लकड़ी जलाकर भोजन तैयार करते हैं।


धुंआ सहते हैं बच्चे

कन्हारपुरी संकुल के अंतर्गत आने वाले किसी भी स्कूल में भोजन बनाने गैस का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इसी तरह शहर के कौरिनभाठा, बल्देवप्रसाद मिश्र स्कूल और नंदई स्कूल में भी गैस से भोजन नहीं बनाए जाने की वजह से रसोइयों के साथ ही स्कूली बच्चे धुआ सहते हंै। इनमें से ज्यादातर स्कूलों के रसोई कक्ष क्लास रूम से सटे हुए हैं। इस कारण रसोई कक्ष में भोजन तैयार करने चूल्हे जलते ही बच्चों को धुआं सहना पड़ता है। डीईओ राजनांदगांव, बीएल कुर्रे ने बताया कि कुछ साल पहले स्कूलों को गैस कनेक्शन का वितरण किया गया था, पर सभी स्कूलों में सुविधा नहीं दी गई है।


फेफड़े पर असर
इसके चलते भी समूह के सदस्य लकड़ी जलाकर भोजन तैयार करते हैं। धुआं की समस्या तो है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल राजनांदगांव, डॉ. केके सहारे ने बताया कि धुएं के संपर्क में आने की वजह से फेफड़े में असर पड़ता है। ज्यादा मात्रा में धुआँ सहने पर निमोकोनियोसिस बीमारी होने का खतरा रहता है। आंखें भी खराब होती है। बचने के लिए मॉस्क का इस्तेमाल करें। ज्यादा धुआँ में न रहें। निमोकोनियोसिस बीमारी का पता बहुत देर से लगता है। स्वांस संबंधित बीमारी होने का खतरा भी रहता है।


ये भी पढ़ें

image