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एसबीआई के कर्मचारियों का रवैया तानाशाही, ग्राहकों को ऑनलाईन शिकायत करने की दे रहे हैं सलाह

पासबुक प्रिंटिंग मशीन बंदकर ग्राहकों के जेब में डाल रहे हैं डाका, ग्राहकों को हो रही परेशानी

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SBI employees dictatorship, advising customers to complain online

हाल ए डोंगरगांव... एसबीआई के ग्राहक कर्मचारियों से नाखुश।

राजनांदगांव / डोंगरगांव. भारतीय स्टेट बैंक डोंगरगांव में ग्राहकों की सुविधा के लिए लगाए गए आटो पासबुक प्रिंटिंग मशीन अधिकतर बंद कर स्टेटमेंट प्रिंटिंग के नाम पर ग्राहकों के जेब पर डाका डाला जा रहा है। बीते दो वर्षों से ज्यादातर दिनों में मशीन या तो बंद कर दी जाती है या तो आऊट ऑफ सर्विस का बोर्ड लटका दिया जाता है जिसके चलते उपभोक्ता मजबूरी में बैंक चार्जेस देकर स्टेटमेंट ले रहे हैं। वहीं बैंक के काऊंटर में पासबुक एंट्री करने से मना कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में रोजाना ग्राहक परेशान हो रहे हैं जबकि बचत और बैलेंस जानने वालों के लिए स्थिति जाएं तो जाएं कहां की हो गई है। जवाब मांगने वाले ग्राहकों से सीधे बैंक के भीतर कर्मचारियों द्वारा सीधे मुंह बात नहीं किया जाता और दुव्र्यव्हार किया जा रहा है और ऑनलाईन शिकायत करने की बात कही जाती है।

सुरक्षा व्यवस्था ताक पर
बैंक के काम को कम करने के लिए पैसा जमा करने के लिए बैंक के समीप सीडीएम मशीन लगाई गई है किन्तु यहां भी ग्राहक लंबी लाईन में अपनी रकम को लेकर सड़क तक लाईन लगाए खड़े रहते हैं। जिनकी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है जबकि इस लाईन में बुजुर्ग से लेकर महिलाएं सभी शामिल होते हैं। बैंक में भी गार्ड मुख्य द्वार पर यदाकदा ही दिखलाई पड़ता है।

छोटे-छोटे कामों के लिए भटकाया जा रहा है उपभोक्ताओं को
नगर के सबसे पुराने बैंक एसबीआई डोंगरगांव में सर्वाधिक बचत खाता धारक हैं और ऐसे खाताधारकों को बैंक कर्मचारियों से प्रतिदिन दुव्र्यव्हार का शिकार होना पड़ता है। बैंक कर्मचारियों से साधारण सवाल पूछने पर भी ऐसे उपभोक्ताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। बैंक गार्ड व चपरासी से लेकर प्रबंधन तक सबसे पीडि़त ग्राहक बैंक को कोसते हुए बाहर आ जाता है। पिछले दो साल से बैंक पासबुक एंट्री करवाने बैंक आ रही ऐसी ही एक महिला मितानिन भोजबाई ग्राम बनहरदी ने बताया कि बैंक में कर्मचारी के पासबुक एंट्री करने से मना कर रहे हैं और बाहर एंट्री मशीन बंद है। ऐसे में प्रभारी मैनेजर द्वारा बैंलेंस शीट लेेने आवेदन करने कहा जा रहा है और इसके लिए बैंक द्वारा निर्धारित शुल्क लेने की बात कही जा रही है। ऐसी स्थिति सैकड़ों ग्राहकों की है और ग्राहक सेवा के नाम पर बैंक प्रबंधन कोई जवाब नहीं देना चाहता। बैंक के भीतर ग्राहकों से हो रहे दुव्र्यव्हार पर कभी कोई सुधार नहीं होता। उल्टे सत मिजाज वाले कर्मचारियों से खास तौर पर ग्रामीण उपभोक्ता परेशान हैं। बैंकिंग सेवा के नाम पर ग्राहकों को मार्गदर्शन और मदद तो दूर की बात झिड़की मिलते रहती है। सालों से संकरे रास्ते में छोटे मकान में संचालित बैंक परिसर में ग्राहक सुविधा के नाम पर ना तो पार्किंग की व्यवस्था है और ना ही बैठक परिसर में भीड़ के बीच अपनी बारी के इंतजार में बुजुर्ग और महिलाओं को सिर्फ दुव्र्यव्हार का शिकार होना पड़ रहा है। बैंक के भीतर एक किस्म का तानाशाह रवैय्या दिखलाई पड़ता है।

ऑनलाईन शिकायत की सलाह देते हैं बैंककर्मी
बैंक कर्मचारी छोटी-छोटी बातों को स्वयं निदान ना कर खाताधारकों को ऑनलाईन शिकायत करने की सलाह देते हैं। ऐसे ही एक खाताधारक पासबुक प्रिंटिंग के लिए अपनी बात रखनी चाही तो उसे बारकोड से कहीं भी प्रिंट होने की बात कहकर टाल दिया गया जबकि उक्त ग्राहक केवल नए पासबुक प्रिंटिंग के लिए कभी कर्मचारी नहीं हैं, कभी लंच टाईम का हवाला देकर बैंक के पांच बार चक्कर लगवाया गया और जब पासबुक प्रिंट हुआ तो उसमें केवल नाम प्रिंट कर दे दिया गया, बैलेंसशीट का अतापता नहीं था।

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