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मुख्यमंत्री ने विकास यात्रा के दौरान की थी घोषणा पर अमल अब तक नहीं पढिय़े पूरी खबर…

जनप्रतिनिधियों एवं युवाओं द्वारा किया जा प्रयास

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मुख्यमंत्री ने विकास यात्रा के दौरान की थी घोषणा पर अमल अब तक नहीं पढिय़े पूरी खबर...

राजनांदगांव / गंडई पंडरिया. सुरही नदी के तट पर बसा राजनांदगांव जिला मुख्यालय के अंतिम छोर पर गंडई पुरातात्विक नगरी है। गंडई का देउरमन्दिर इसका साक्षात प्रमाण है। अविभाजित मध्यप्रदेश में राजस्व आय देने में नंबर वन रहा। गंडई का मवेशी बाजार दुर्ग संभाग में प्रसिद्ध रहा है। यातायात की दृष्टि से राजधानी रायपुर के अलावा सीधे तीन राज्यों और 6 जिलों से बस सेवा की सुविधा है। सब्जी का व्यापार 3 राज्यों तक फैला है। पर्यटन की बात करें तो छत्तीसगढ़ की सीमा में आखिरी शहर गंडई है। आसपास सुंदर प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं।

गंडई की कई वर्षो से हो रही उपेक्षा
गंडई के पास हर दृष्टि से प्रशासनिक क्षमता के बावजूद अपने विकास के लिए संघर्ष करता रहा है। 20 सालों के संघर्ष के बाद गंडई ले देकर उपतहसील बना लेकिन यह बात तहसील के कुछ नेताओं को खलने लगी लेकिन वो यह भूल गए विकास स्वाभाविक प्रक्रिया है। जानकार सूत्र कहते है खैरागढ़ तहसील के विभाजन के समय गंडई ही दूरी के हिसाब से सही जगह थी, जिसे गुणा भाग करके बदला गया। जनचर्चा में बात यह भी आती है कि इसका कारण उस सोच का अभाव था जिसमें गंडई में एक दूरदृष्टि की सोच से विकास को अंजाम मिले। 40 सालों तक एक बड़े राजस्व इकाई गंडई की उपेक्षा की गयी।

नेताओं में मचा हड़कंप
गंडई के युवाओं ने विकासखंड, तहसील व रजिस्ट्रार आफिस के लिए चरणबद्ध आंदोलन किया। गंडई के व्यापारियों ने ऐतिहासिक बंद रखकर विकास के मुद्दे का समर्थन किया। आंदोलन से पुरे जिले व प्रदेश के नेताओ में हड़कंप मच गया। गंडई के विकास के मुद्दों को सीधे सांसद अभिषेक सिंह ने गौर किया। डॉ.रमन सिंह ने सीधे गंडई को एसडीएम ऑफिस की सौगात दी। लेकिन तहसील के कुछ लोगो को यह बात नागवार गुजरी। गंडई के लिए षडयंत्र का जाल फिर रचा गया। कुछ लोग भी मिल गए और गंडई एसडीएम आफिस का बंटवारा कर दिया गया। सत्ता के डर ने सबको खामोश कर दिया।

अब फिर से गंडई में पूर्ण तहसील की मांग उठी
छत्तीसगढ़ के मुखिया विकास यात्रा के रथ में सवार होकर गंडई आये। गंडई और सैकड़ो गांवो से बिना गाड़ी का इंतजाम किए हजारों की संख्या में गंडई के मुख्य हृदय स्थल चौक में तहसील की घोषणा हुई। लोगों ने प्रदेश के मुखिया का तालियों और नारों से जोरदार स्वागत किया। लिहाजा मतदाता की भीड़ से नेता गदगद हुए। दरअसल यह भीड़ गंडई के विकास के शंखनाद को देखने और सुनने आयी थी जो प्रस्ताव गंडई तहसील के लिए भेजा उसे सुनकर जनता खुशी से सराबोर हो गयी। जनता सोचने लगी गंडई को अब उसका वाजिब हक मिल गया। अब जो खबर आ रही है उसमें फिर से गंडई क्षेत्र के कद को कम करने की साजिश है। यदि ऐसा है तो अब भी वक्त है। सियासत से ऊपर उठकर गंडई को उसका वाजिब हक दे दीजिए।

बार-बार कई मामलों में गंडई की हुई उपेक्षा
वरना अबकी बार ऐसा सैलाब आएगा कि अच्छे अच्छो की सियासी जमीन हिल उठेगी। आने वाले आम चुनाव में इस मुद्दे को ध्यान नही दिया गया तो गंडई परिक्षेत्र और गंडई एवं साल्हेवारा क्षेत्र के लोगो को चुनाव के समय सोचना पड़ेगा हमारी मिली मिलाई तहसील में संख्या की कटौती होना हमारे क्षेत्रवासियो के लिए दुर्भाग्य की बात है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि तहसील में गांवों की संख्या में कटौती हो रहा है जिससे हमें आने वाले समय में आगे के विकास के लिए तकलीफ हो जाएगी अभी जो पूर्ण तहसील के हिसाब से जो गांव की संख्या मिली है वह हमारे लिए आगे के लिए पूर्णत: विकास की रास्ता खोलेगी जिसे नकारा नही जा सकता। हमे पूर्ण तहसील का दर्जा राज्य शासन द्वारा मिल ही गई है इसमें कोई संदेह नही किया जा रहा है।

विधायक खैरागढ़, गिरवर जंघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने गत दिन विकास यात्रा के दौरान पूर्ण तहसील की घोषणा की थी जिस पर आज तक अमल नहीं हुआ है। सोशल मिडिया में वायलर हुई नई बनने वाली तहसील के गांव में कटौती पर भाजपा नहीं चाहते की तहसील बने गंडई नगरवासी को लालीपाप दिया गया है।