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CG News: जल रक्षा अभियान का दिखा असर, छत्तीसगढ़ के 59 गांवों में इस बार टैंकर दौड़ाने की जरूरत नहीं पड़ी

CG News: गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से जन सहयोग से जिले में जल रक्षा अभियान की शुरुआत की गई। पद्मश्री फुलबासन यादव के नेतृत्व में 400 से अधिक गांवों में नीर और नारी जल यात्रा निकाली गई।

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CG News: जल रक्षा अभियान का दिखा असर, छत्तीसगढ़ के 59 गांवों में इस बार टैंकर दौड़ाने की जरूरत नहीं पड़ी

CG News: राजनांदगांव जिले में जल संरक्षण की दिशा में चलाए गए अभियान का असर अब दिखने लगा है। पहली बार मार्च माह की समाप्ति और अप्रैल के शुरुआती दिनों में ही जल संकट को लेकर गंभीर शिकायतें सामने नहीं आई हैं। बीते वर्ष जल संकट की ऐसी स्थिति बनी थी कि 59 गांव में टैंकर के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति करनी पड़ गई थी। इस बार जनपद पंचायतों के साथ ही पीएचई तक जल की विकट समस्या को लेकर शिकायत नहीं आने की से राहत की सांस ली जा रही है। ज्यादातर गांवों में हैंडपंप भी काम कर रहे हैं। इस हिसाब से वाटर लेबल अभी डाउन नहीं हुआ है।

सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने सर्वे के बाद रिपोर्ट दी थी कि राजनांदगांव, डोंगरगढ़ और डोंगरगांव में भूजल का अति दोहन हो चुका है। इन ब्लॉकों को सेमी क्रिटिकल जोन में रखा गया था। गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से जन सहयोग से जिले में जल रक्षा अभियान की शुरुआत की गई। पद्मश्री फुलबासन यादव के नेतृत्व में 400 से अधिक गांवों में नीर और नारी जल यात्रा निकाली गई। गांव-गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों को कम पानी खपत वाली फसल लेने प्रेरित किया गया। गांव-गांव में सोख्ता गड्ढा बनवाए गए।

जनपद सीईओ तक शिकायत नहीं

हाल ही में जिला प्रशासन की बैठक के दौरान जनपद सीईओ ने भी जानकारी दी है कि वर्तमान में गर्मी के दस्तक देने के साथ ही पानी को लेकर विकराल समस्या वाली शिकायत कहीं से नहीं आई है। किसी भी पंचायत ने टैंकर की मांग नहीं की है। पीएचई के पास फिलहाल हैंडपंप बंद होने और गांव में पानी को लेकर हाहाकार मचने की शिकायत नहीं है। स्थिति नियंत्रण में है।

डोंगरगढ़ ब्लॉक में गंभीर स्थिति थी

बीते वर्ष गर्मी के शुरुआती दौर में डोंगरगढ़ ब्लॉक में सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति बन गई थी। यहां के 19 गांवों में टैंकर दौड़ाने पड़ गए थे। वहीं राजनांदगांव और डोंगरगांव ब्लॉक मिलाकर 59 पंचायतों में जनपद के माध्यम से टैंकर भेजकर जलापूर्ति की जा रही थी। यहां भूजल स्तर गिरने के कारण जल जीवन मिशन भी काम नहीं आ रहा था।

धान के रकबे में कमी आई

जल रक्षा अभियान का असर यह रहा कि इस बार गर्मी में किसानों ने धान की फसल लेने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। जागरूकता का परिचय देते हुए धान की जगह पर कम पानी खपत वाली फसलें ली हैं। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ७० प्रतिशत यानी की ६५३५.२ प्रतिशत हैक्टेयर में ग्रीष्मकालीन धान की फसल नहीं ली गई। किसानों ने मर्जी से यह निर्णय लिया। इससे भूजल का दोहन कम हुआ है।

नदी किनारे निगरानी हो रही

इस बार जल संसाधन विभाग की ओर से नदी किनारे के गांवों में निगरानी की जा रही है। जिन किसानों ने धान की फसल ली है और नदी से सीधे पानी ले रहे हैं तो ऐेसे किसानों के मोटर पंप जब्त किए जा रहे हैं। किसानों को पूर्व में समझाइश भी दी गई थी।

भूजल स्तर में सुधार

जिले में पेयजल को लेकर फिलहाल गंभीर शिकायत कहीं से नहीं आई है। भूजल स्तर में सुधार आया है। जल जीवन मिशन से भी गांवों में पेयजल आपूर्ति हो रही है।

  • पलक कोठारी,ईई पीएचई राजनांदगांव