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आखिरकार सत्य की हुई जीत और हीरापुर के ग्रामवासियों को मिला न्याय, जानिए क्या था मामला …

उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ ने ग्राम हीरापुर की मांग को सही मानकर ग्रामवासियों के पक्ष में दिया फैसला

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Ultimately, the victory of truth and justice was given to the villagers of Hirapur, know what was the matter…

आखिरकार सत्य की हुई जीत और हीरापुर के ग्रामवासियों को मिला न्याय, जानिए क्या था मामला ...

डोंगरगढ़. प्रदेश के उच्च न्यायालय ने हीरापुर वासियों की मांग को सही मानकर उसे मक्का टोला पंचायत में ही यथावत रखे जाने का आदेश दिया है। इस तरह ग्राम वासियों को न्याय मिल गया है। अब हीरापुर मक्का टोला पंचायत में ही आश्रित ग्राम के रूप में रहेगा। पंचायत परिसीमन 2019 के अंतर्गत ग्राम पंचायत मक्काटोला के आश्रित ग्राम हीरापुर को मक्काटोला से अलग करके नवीन पंचायत गोविंदपुर में जोड़ दिया गया था।

ज्ञात हो कि विधायक दलेश्वर साहू की अनुशंसा पर ही गोविंदपुर को नया पंचायत बनाया था और हीरापुर को उसमें जोड़ा था। गांव के सरपंच हेमलाल वर्मा ने हीरापुर से गोविंदपुर जाने के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं होने को लेकर विरोध किया था। ग्रामवासियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर उन्हें बिना जानकारी दिए इस तरह फैसला देने का आरोप लगाया था। लेकिन विधायक व प्रशासन ने मामले में हाथ खड़े कर दिए थे। इसके बाद ग्रामीणों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

चंदा कर लड़े केश

कोर्ट में केश लडऩे के लिए ग्रामीणों ने चंदा किया। किसी ने धान बेंचकर पैसा दिया तो किसी ने अपने मजदूरी का पैसा दिया। इसके बाद वकील सत्यपाल खोब्रागढ़े से राय लेकर के सरपंच एंव गांव के मुखिया ढेलू राम वर्मा, रामजी वर्मा के साथ बिलासपुर जाकर के हाईकोर्ट के अधिवक्ता पराग कोटेजा के माध्यम से 21 अक्टूंबर रिट दायर की। सुनवाई के बाद फैसला गांव वालों के पक्ष में आया है। कोर्ट ने 28 नवंबर को फैसला सुनाया कि ग्राम हीरापुर को नियम के विरुद्ध ग्राम पंचायत मक्काटोला से हटाकर गोविंदपुर में जोड़ा गया है, जो गलत है, उसे पहले कि तरह यथावत मक्काटोला में रखा जाने का निर्देश शासन-प्रशासन को दिया। गांव में पटाखे जलाकर खुशियां मनाई गई। वहीं विधायक को लेकर गांव के लोगों में आक्रोश का माहौल है।