29 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

संविधान की प्रतियां जलाने पर संयुक्त मोर्चा द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन

सौंपा ज्ञापन: गुनहगारों को मिले सजा

2 min read
Google source verification
system

प्रदर्शन... विरोध में मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर ज्ञापन सौंपा।

राजनांदगांव / गंडई पंडरिया. भारत में लोकतंत्र का पवित्र ग्रंथ संविधान की प्रति हैं और ऐसे संविधान के प्रतियां को देश की राजधानी दिल्ली के पवित्र स्थान जहां लोग अपने अधिकार का हक मांगने एकत्रित होते हैं, ऐसे स्थान जंतर मंतर में पिछले 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के खास दिन आसामाजिक तत्वों के लोगों द्वारा जलाया जाता है और संविधान निर्माता डॉ.बाबा साहब भीम राव अंबेडकर को अपशब्द कहा गया और एससी-एसटी मुर्दाबाद का नारा लगाया गया। इसके विरोध में कड़ी निंदा व कड़ी कार्यवाही के लिए नगर पंचायत गंडई के वार्ड 7-8 के अंबेडकर पार्क में आम सभा 24 अगस्त को दोपहर 2 बजे रखी गयी थी। सभा को वक्ताओ द्वारा संबोधित किया गया और बाबा साहब अमर रहे, संविधान निर्माता अमर रहे का नारा लगाते हुए नगर भ्रमण कर स्थानीय रेस्ट हाउस में महामहिम राष्ट्रपति के नाम नायब तहसीलदार प्रफुल्ल गुप्ता को ज्ञापन भी सौंपा।

ये रहे उपस्थित
सभा में लाल टारकेश्वरशाह खुशरो, जीवन दास रात्रे, दिलीप ओगरे, अनिता ओगरे, संतोष रजक, गैंद सिंह जगत, डॉ.नारायण चतुर्वेदी, नीलकमल रोडगे, मोहसिन खान, अनिता उईके, मनोज साहू, जितेन्द्र बंजारे, फत्तु साहू, संजू उइके, पोषण कोसरे, आनंद वाहने, रज्जब खान, रवि कुर्रे, लल्लु टंडन, सीएल सहारे, अमरदास सतनामी, रत्नेश कुलदीप, सुखनंदन चतुर्वेदी सहित समस्त समुदाय और धार्मिक अल्प संख्यक के लगभग 2०० संयुक्त मोर्चा के कार्यकर्ताओं व अन्य लोगों की उपस्थिति रही।

गुनहागारों को सजा दिलाने की रखी मांग
संयुक्त मोर्चा का कहना है कि संविधान के प्रतियां को जलाना देश विरोधी है जो संविधान के प्रतियां को जलाई है उसके उपर देशद्रोह व राष्ट्रद्रोह का धारा लगाकर उसे फांसी की सजा होनी चाहिए। असामाजिक तत्वों द्वारा ऐसा देश विरोधी कार्य जाती समुदाय में वैमनस्ता फैलाने वाला है, बाबा साहब को अपशब्द कहना संविधान निर्माण के नियम का उल्लंघन हैं, यह राष्ट्रद्रोह के श्रेणी में आता है। ऐसे कृत्य करने वाले को फांसी की सजा अवश्य होनी चाहिए। सभा में पूर्व मंडी अध्यक्ष लाल टारकेश्वरशाह खुशरो ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर में संविधान की प्रतियां जलाई गई यह घटना देश तोडऩे की साजिश हैं। ऐसे लोगों को सक्त सजा मिले जिससे आगे कोई ऐसा अपकृत्य कार्य ना कर सके।