
राजसमंद के कांकरोली के निकट फैली पॉलीथिन।
राजसमंद. नगर परिषद क्षेत्र से प्रतिदिन 20 से 22 टन के बीच कचरा निकलता है। उसमें से करीब 3 से 4 टन के बीच सिंगल यूज प्लास्टिक शामिल है। ऐसे में हम यदि थोड़ी सी आदतों में सुधार कर ले तो इस कचरे को कम कर सकते हैं, इससे पर्यावरण को भी नुकसान होता है।
नगर परिषद क्षेत्र के अन्तर्गत करीब 16 हजार मकान आते हैं। इन घरों से प्रतिदिन टैम्पो के माध्यम से घर-घर से कचरे को एकत्र कर उसे ट्रेचिंग ग्राउण्ड में भेजा जाता है। वहां पर इसे रिसाइकिल कर आरडीएफ और कम्पोस्ट बनाया जाता है। आरडीएफ सीमेंट कम्पनी आदि में जलाने के काम आता है, जबकि कम्पोस्ट को खेती-बाड़ी के काम आता है। इसमें मुख्य बात यह है कि कम्पोस्ट खाद का तो उपयोग हो जाता है, लेकिन आरडीएफ के ढेर लगे रहते हैं। यह विशुद्ध रूप से प्लास्टिक से तैयार होता है। ऐसे में यदि हम छोटी-छोटी आदतों को सुधार कर ले तो प्रतिदिन 3 से 4 टन प्लास्टि के कचरे को कम किया जा सकता है।
फैक्ट फाइल
- 20-22 टन निकलता कचरा प्रतिदिन
- 250 कर्मचारी लगे हैं निस्तारण में
- 24 टैम्पो से होता कचरा संग्रहण
- 2 डम्पर और 5 जेसीबी आता काम
यह करना होगा सुधार
- घर से थैला लेकर निकले
- दूध वाले से थैली में दूध नहीं ले
- पॉलीथिन का उपयोग न करे और न करने दे
- चाय के लिए कुल्लड़ का हो उपयोग
- कागज-प्लास्टिक की जगह स्टील के गिलास का हो उपयोग
नहीं हो रही कार्रवाई, उपयोग जारी
सिंगल यूज प्लास्टिक पर एक जुलाई से प्रतिबंध है। इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले उपयोग हो रहा है। ऐसे में इनके उत्पादक, बेचने वाले और उपयोग करने वाले खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि सरकार ने इस बार इसके उत्पादक, बेचान करने वाले और उपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया है।
Published on:
13 Jul 2022 04:13 pm
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