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48 होटल्स, 1200 कमरे, मेहमान एक भी नहीं

फिर वीरान हुआ कुम्भलगढ़, आधे से ज्यादा कर्मचारियों की छुट्टी, सुनसान पड़े हैं पर्यटनस्थल एवं होटलें

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ओमप्रकाश शर्मा @ कुंभलगढ़. वैश्विक महामारी कोरोना के चलते पहले लगी आवाजाही की सख्तियों और अब लॉकडाउन ने विश्व विरासत कुंभलगढ़ के पर्यटन कारोबार को चौपट कर दिया है। दुर्ग एक बार फिर वीरान हो गया है। दुर्ग और जंगल सफारी बंद होने से न तो होटलें चल रही हैं और न ही पर्यटन से जुड़ा कोई भी व्यापार हो रहा है। ऐसे में होटल मालिकों ने अपने यहां कार्यरत आधे से ज्यादा स्टॉफ को छुट्टी पर भेज दिया है।

जानकारी के मुताबिक कुंभलगढ़ में इस वक्त कुल ४८ होटलें संचालित हैं, जिनमें लगभग १२ सौ कमरे हैं। इस वक्त किसी भी होटल में कोई पर्यटक नहीं है। होटल एसोसिएशन के पदाधिकारी जमनाशंकर आमेटा ने बताया कि सभी होटलों में करीब १२ सौ से ज्यादा कर्मचारी कार्य करते हैं, जिनमें पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजरात, ओडिशा एवं मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों के युवा शामिल हैं। गत आठ मार्च से जब से राज्य सरकार ने आरटीपीसीआर रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य किया है, तब से पर्यटकों की आवक अचानक कम हो गई थी।

कार्मिक मिले थे संक्रमित तो दुर्ग ही बंद करना पड़ा
दुर्ग के कार्मिकों के संक्रमित मिलने के बाद गत ५ अप्रेल से प्रशासन ने दुर्ग को एक सप्ताह के लिए माइक्रो कन्टेनमेंट जोन एवं जीरो मोबिलिटी घोषित करके बंद कर दिया था7 इसके बाद तमाम होटलों की बुकिंग्स रद्द हो गई। पर्यटन व्यवसाय औधे मुंह गिर पड़ा। १५ अप्रेल को जैसे ही भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से १५ मई तक दुर्ग बंद की घोषणा हुई तो होटलें बंद करने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं रहा। होटल मालिकों ने आधे स्टॉफ को घर पर भेजना शुरू कर दिया है।

ये हैं पर्यटन स्थल
क्षेत्र में मुख्य रूप से कुंभलगढ़ दुर्ग, कुंभलगढ़ नेशनल पार्क, हमेरपाल झील फिश प्वाइंट, पशुराम महादेव, बनास नदी का उद्गम स्थल वीरों का मठ सहित विलेज सफारी करने के लिए यहां पर्यटक आते हैं।

क्षेत्र में होटल्स
क्षेत्र में सभी श्रेणी की होटल्स हैं। कई नामी-गिरामी होटलों सहित ४८-५० होटल में १२ सौ कमरे हैं। उनमें लगभग १२ सौ कार्मिक कार्य करते हैं।

ये कार्य हो रहे प्रभावित
क्षेत्र में होटल व्यवसाय ठप होने से पर्यटन से जुड़े तमाम कार्यों की रोजी-रोटी पर बन आई है। मुख्य रूप से यहां का टैक्सी व्यवसाय, पर्यटन से जुड़े रेस्टोरेंट, ढाबे, हैण्डीक्राफ्ट, जिप्सी व्यवसाय, ईको गाइड, दूध एवं दूध से जुड़े उत्पाद, पर्यटकों के मनोरंज के लिए स्थानीय ऊंट एवं घोड़े चलाने वाले लोग एवं तमाम काम-धंधे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

इनका कहना है
दुर्ग बंद होने से होटलों की बुकिंग रद्द हो गई, वहीं लगातार बंद रहने से आधे स्टॉफ को छुट्टी पर भेजा गया है। इनमें कई राज्यों से आए हुए कार्मिक शामिल हैं।
जमनाशंकर आमेटा, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन

जब से दुर्ग बंद हुआ है, रेस्टोरेेंट में सन्नाटा पसर गया है। रेस्टोरेंट चलाना मुश्किल हो गया है। कई लोगों के रोजी रोटी पर संकट आ गया है।
अल्पेश असावा, रेस्टोरेंट संचालक, कुंभलगढ़

दुर्ग बंद होने के बाद और उससे पहले से क्षेत्र का टैक्सी व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यह व्यवसाय इस समय बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। किसी भी होटल से कोई इन्क्वायरी नहीं आ रही है।
कैलाश जोशी, टैक्सी संचालक, कुंभलगढ़


कैप्शन....
०२ बादल महल से महाराणा कक्ष तक सूना पड़ा दुर्ग।
०३ बादल महल के बाहर का बरामदे में छाई वीरानी।
०४ लाइट एण्ड साउण्ड सिस्टमस्थल एवं नीलकंठ महादेव मन्दिर प्रागंण में पसरा सन्नाटा।