
Rajasthan Budget 2026
राजसमंद. राजसमंद जिला अब सिर्फ झीलों, कुंभलगढ़ किले और संगमरमर उद्योग तक सीमित पहचान नहीं रखता, बल्कि एक नई सामाजिक हकीकत का प्रतीक बनता जा रहा है—दबाव में आता मध्यम वर्ग। सरकारी कर्मचारी, छोटे दुकानदार, मार्बल प्रोसेसिंग यूनिट में कार्यरत सुपरवाइजर-मैनेजर, निजी स्कूलों के शिक्षक, बैंक व बीमा क्षेत्र के कर्मचारी सभी खुद को मिडिल क्लास मानते हैं, लेकिन महंगाई और ठहरी आमदनी ने उनकी थाली दिन-प्रतिदिन छोटी कर दी है। राजस्थान सरकार का आगामी बजट नजदीक है। ऐसे में राजसमंद का मध्यम वर्ग सवाल कर रहा है। क्या इस बार बजट में उसकी आर्थिक सच्चाई झलकेगी, या फिर वह एक बार फिर योजनाओं और घोषणाओं के बीच दबकर रह जाएगा?
केंद्र सरकार की नई टैक्स व्यवस्था का लाभ राजसमंद के बहुत सीमित तबके तक ही सिमटकर रह गया है। जिले की आर्थिक संरचना देखें तो राजसमंद के अधिकांश मध्यम वर्गीय परिवारों की सालाना औसत आय 2 से 5 लाख रुपये के बीच है। नई टैक्स व्यवस्था में कुछ छूट जरूर है, लेकिन एचआरए, 80 सी की पारंपरिक बचत छूट, एजुकेशन लोन ब्याज पर राहत, जैसी सुविधाएं या तो खत्म हो चुकी हैं या बेहद सीमित हैं। राज्य सरकार स्तर पर मध्यम वर्ग के लिए कोई अलग टैक्स राहत नहीं है। राजसमंद शहर के निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की बात करें तो औसत मासिक वेतन 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। वहीं इनकी वार्षिक औसत आय 2 से 2.5 लाख रुपए तक है। भले ही इन पर आयकर न लगे, लेकिन महंगाई का अप्रत्यक्ष टैक्स हर महीने उनकी जेब काट रहा है। पिछले बजट में 'न्यू टैक्स रिजीम' को बढ़ावा दिया गया, लेकिन 'ओल्ड रिजीम' में निवेश के जरिए मिलने वाली छूट (80सी आदि) में कोई बदलाव नहीं हुआ। लंबे समय से इसमें बड़ी बढ़ोतरी की मांग हो रही है, ताकि हाथ में आने वाला पैसा बढ़ सके। वहीं 5 लाख से 7 लाख तक की रिबेट तो मिली, लेकिन 10 लाख से ऊपर की आय वालों के लिए टैक्स का बोझ जस का तस है।
मध्यम वर्ग को उम्मीद थी कि सरकार कुछ बड़े लोकलुभावन कदम उठाएगी, लेकिन पिछले बजट में यह उम्मीदें पूरी नहीं हुईं। पिछले एक दशक से इसकी 1.5 लाख की सीमा नहीं बढ़ी। इससे बचत को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा। ईंधन की कीमतों में बड़ी राहत न मिलने से लॉजिस्टिक्स और दैनिक आवागमन महंगा बना रहा।होम लोन: अपना घर अब सपना बनता जा रहा हैराजसमंद भले ही मेट्रो शहर न हो, लेकिन रियल एस्टेट की कीमतें मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। मध्यम वर्ग का सबसे बड़ा सपना 'अपना घर' और 'बच्चों की उच्च शिक्षा' है, लेकिन यही दोनों अब सबसे बड़ा बोझ बन गए हैं। रेपो रेट में उतार-चढ़ाव के कारण होम लोन की ईएमआई बढ़ गई है। एक औसत परिवार की आय का 40 प्रतिशत हिस्सा केवल बैंक की किस्तों में जा रहा है।
नतीजा यह कि मकान लेने के बाद घर चलाना ही सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।
राजसमंद के मध्यम वर्ग के लिए बच्चों की शिक्षा सबसे बड़ा आर्थिक दबाव बन चुकी है। पढ़ाई महंगी होने के कारण एजुकेशन लोन लेना मजबूरी है। इसकी ऊंची ब्याज दरें युवाओं के करियर की शुरुआत को ही कर्ज के तले दबा रही हैं।
क्या राजस्थान सरकार राज्य स्तर पर एजुकेशन लोन ब्याज सब्सिडी देगी? क्या राजसमंद जैसे जिलों में सरकारी कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों को मजबूत किया जाएगा, ताकि बाहर जाने की मजबूरी कम हो?
पिछले बजट का विश्लेषण करें तो राजसमंद का मध्यम वर्ग खुद को उपेक्षित मानता है—
शहरवार आमदनी बनाम खर्च
राजसमंद शहर
शहरी मध्यम वर्ग के लिए विशेष राहत पैकेजहोम लोन और एजुकेशन लोन पर राज्य सब्सिडीनिजी क्षेत्र कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना
बिजली-पानी की दरों में स्थायी राहतस्थानीय रोजगार और स्किल डेवलपमेंट योजनाएं
Published on:
14 Jan 2026 12:13 pm

बड़ी खबरें
View Allराजसमंद
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
