
99 फीसदी महिलाओं की होती है नसबंदी
राजसमंद. प्रसव पीड़ा सहने के साथ ही महिला को ही परिवार नियोजन के अधिकतर तरीके अपनाने पड़ते हैं। इनमें पुरुषों की भागीदारी नहीं के बराबर है। परिवार नियोजन के प्रमुख साधन नसबंदी ऑपरेशन की बात करें तो आकड़े चौकाने वाले हैं। इस साधन को अपनाने वाले दम्पतियों में ९९ फीसदी महिलाओं को ही इसका दर्द सहना पड़ता है, जबकि महिला नसबंदी से पुरुष नसबंदी काफी सरल होती है, लेकिन उसके बावजूद पुरुष इस जोखिम को उठाने से कतराते हैं, और महिलाओं को ही यह दर्द भी सहना पड़ता है।
वर्ष 2017 में सिर्फ २१ पुरुषों ने ही करवाए ऑपरेशन
जिले में पुरुष नसबंदी का ग्राफ काफी नीचे हैं। यहां पिछले पांच वर्ष में १.३७ फीसदी पुरुषों ने ही ऑपरेशन करवाए हैं। इसमें भी सबसे कम पुरुषों के ऑपरेशन वर्ष २०१७-१८ में 2444 हुए, जिसमें महज २१ पुरुषों की ही नसबंदी हुई है।
वर्ष २०१३ के बाद लगातार गिरा नसबंदी का ग्राफ
वर्ष २०१३ के बाद से जिले में नसबंदी का ग्राफ लगातार गिरा है। १३ में जहां कुल ४१०८ ऑपरेशन हुए थे, वहीं १४ में ३४६३, १५ में ३५४३, १६ में २९९३ तथा १७ में ३१९१ नसबंदी ऑपरेशन हुए हैं।
सुधार करेंगे..
नसबंदी ऑपरेशन की स्थिति सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी विभाग द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही सास-बहू अभियान चलाया जा रहा है, इसमें भी नसबंदी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस वर्ष से आकड़ों में सुधार होगा।
एमएल मीणा, उपमुख्य चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य अधिकारी (परिवार कल्याण), राजसमंद
स्वास्थ्य पर्यटन पर गोष्ठी
कुम्भलगढ़. विश्व पर्यटन दिवस पर महाराणा कुम्भा राउमावि केलवाड़ा में क्लब महिन्द्रा के तत्वावधान में स्वास्थ्य पर्यटन गोष्ठी संस्था प्रधान मोहन लाल बलाई के सानिध्य में हुई। प्रभारी सत्य नारायण नागोरी ने बताया कि क्लब महिन्द्रा के रिसोर्ट मैंनेजर सुप्रीयो ढाली के नेतृत्व में विराज टॉमर ,अविनाश कौर, जितेन्द्र कामरान, विमल जीत ने पर्यटन की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर हरियाली से खुशहाली के लिए गमलों में पौधें भी लगाए गए।
Published on:
29 Sept 2018 11:30 am
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