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बिना आवेदन किए और बगैर शुल्क जमा कराए बिलानाम के बना दिए भूखंड पट्टे

एसीबी ने शुरू की जांच
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बिना आवेदन किए और बगैर शुल्क जमा कराए बिलानाम के बना दिए भूखंड पट्टे

सिन्देसर कला के तत्कालीन दो सरपंच, ग्रामसेवक सहित पांच के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में प्रकरण दर्ज

राजसमंद. बिना आवेदन और ग्रामसभा से अनुमोदन कराए बगैर बिलानाम जमीन के दो फर्जी पट्टे जारी करने पर तत्कालीन दो सरपंचों, ग्रामसेवक, वार्डपंच सहित पांच लोगों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में प्रकरण दर्ज हुआ है। इससे फर्जी पट्टा बुक होने की अनियमितता भी खुलकर सामने आ गई।

एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश चौधरी ने बताया कि सिन्देसर कला निवासी नन्दलाल पुत्र गोपीलाल चमार की शिकायत पर जांच की गई। जांच में तत्कालीन सरपंच सुडीबाई, तत्कालीन ग्रामसेवक मांगीलाल बंजारा द्वारा 23 सितंबर 2001 व 6 जनवरी 2004 को बिलानाम जमीन पर अवैध तरीके से पूर्व सरपंच झमकूलाल शर्मा व उसकी पत्नी मंजू शर्मा के नाम पट्टे जाी कर दिए। बताया कि मौके पर झमकुलाल की दुकानें बनी हुई और उसके पीछे पड़त जमीन पर चारदीवारी बना दी। उक्त जमीन बिलानाम होने के बावजूद बिना आवेदन, पंचायत बैठक में प्रस्ताव अनुमोदन की प्रक्रिया अपनाए बगैर ही पट्टा जारी कर लिया। पट्टे पर नियमानुसार 200 रुपए का शुल्क जमा कराना दर्शाया गया है, मगर उक्त राशि ग्राम पंचायत में ही जमा ही नहीं हुई। इसके तहत सिन्देसर कला तत्कालीन सरपंच सुडीबाई, तत्कालीन ग्रामसेवक मांगीलाल बंजारा, तत्कालीन वार्डपंच केशु भील, लाभार्थी व पूर्व सरपंच झमकूलाल शर्मा पुत्र नन्द लाल व उसकी पत्नी मंजू शर्मा पत्नी झमकूलाल ने पद का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से पट्टा जारी कर राजकोष को हानि पहुंचाई। इस पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा प्रकरण दर्ज कर लिया।

अनियमितता के मुख्य पहलू
- बिलानाम जमीन पर ग्राम पंचायत से अनाधिकृत तरीके से पट्टे जारी करना
- आवेदन 22 नवंबर 03 व राशि 200 रुपए 24 सितंबर 2003 को जमा करना बताया, मगर पंचायत रिकॉर्ड के मुताबिक न तो आवेदन मिला और न ही राशि जमा हुई।
- क्रमांक 500 नम्बर का पट्टा वर्ष 2001 में जारी हुआ, जबकि 499 क्रमांक का पट्टा चार वर्ष बाद 2004 में होना दर्शाया।