
कुंभलगढ़ सेंचुरी में जंगल सफारी करते पर्यटक
राजसमंद. कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए कोर एवं बफर जोन के लिए करीब एक हजार वर्ग किमी वन क्षेत्र आवश्यकता होती है, जबकि कुंभलगढ़ और टॉडगढ़ सेंचुरी दोनों को मिलाकर ही करीब 1100 वर्गकिमी वन क्षेत्र बताया जा रहा है। हालांकि यह सब कुछ राज्य सरकार की ओर से गठित कमेटी ही तय करेगी। कमेटी के सदस्य अगले माह दौरा कर सकते हैं।
कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिए पिछले तीन साल से प्रक्रिया जारी है। टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी की ओर से पिछले साल 22 अगस्त 2023 को कुंभलगढ़ बाघ परियोजना के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी थी, लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के कारण उन्होंने राज्य स्तरीय कमेटी गठित करने की जहमत नहीं उठाई। विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनते ही जल्द कमेटी गठित होने की उम्मीद जताई जा रही थी, जो 24 जुलाई को कर दी गई। अब अगस्त माह में कमेटी के सदस्य कुंभलगढ़ और टॉडगढ़ सेंचुरी का जायजा ले सकते हैं। कमेटी को 31 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका की ओर से समय-समय इस मुद्दे को उठाकर सरकार के संज्ञान में लाने का प्रयास किया गया था। इसके चलते ही राज्य सरकार ने 11 सदस्यों की राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कोर एरिया केन्द्रीय क्षेत्र (बीच) को कहा जाता है। यह एक संरक्षित क्षेत्र का वह हिस्सा होता है जो सबसे अधिक संवदेनशील और महत्वपूर्ण होता है। टाइगर रिजर्व के लिए 800 वर्ग किलोमीटर का कोर एरिया होता है। इसके बाहर 200-250 वर्गकिमी एरिया बफर जोन होता है। ऐसे में टाइगर रिजर्व के लिए 1000-1100 वर्गकिमी एरिया आवश्यक होता है, जबकि कुंभलगढ़ सेंचुरी में 610 वर्गकिमी और टॉडगढ़ सेंचुरी में 495.27 वर्गकिमी में वनक्षेत्र फैला हुआ है, जबकि उदयपुर और पाली का एरिया अभी जोड़ा जाना शेष है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से गठित कमेटी इसे आगे किस वन क्षेत्र से जोड़ा जा सकता है इसपर भी रिपोर्ट देगी।
इको सेंसेटिव जोन एक पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र होता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील होता है और जहां मानव गतिविधियों को नियंत्रित करने की आवश्यकता होती है। ताकि प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान न हो। कुंभलगढ़ में 256 वर्गकिमी और टॉडगढ़ सेंचुरी में 212 वर्गकिमी इको सेंसेटिव जोन है। सरकार की मंशा 2025 के अंत तक टाइगर लाने की जताई जा रही है।
कुंभलगढ़ और टॉडगढ़ में कई स्थानों पर वन भूमि पर गांव आदि बस गए हैं। कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद भी स्वैच्छा से विस्थापन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चलेगा कि कितने लोगों के विस्थापन की आवश्यकता है।
कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए पर्याप्त वनक्षेत्र उपलब्ध है। इसके लिए 1000-1100 वर्गकिमी वनक्षेत्र की आवश्यकता है, जबकि सिर्फ कुंभलगढ़ और टॉडगढ़ सेंचुरी एरिया में ही इससे अधिक वनक्षेत्र उपलब्ध है। वन क्षेत्र में लोगों का विस्थापन उनकी स्वैच्छा के आधार पर किया जाता है।
Published on:
28 Jul 2024 11:05 am
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