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BATTLE : श्री द्वारकाधीश मंदिर में पुरुषोत्तम मास को लेकर फिर गोस्वामी परिवार में रार

जारी हो गई दो अलग-अलग कार्यक्रम सूचीट्रस्टी मुकेश शाह बोले: पीठाधीश बृजेश कुमार के अनुसार होंगे उत्सव, परिवार भी हो सकता है शामिल

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राजसमंद. लम्बे समय से चल रहे सम्पत्ति विवाद के बाद प्रभु द्वारकाधीश मंदिर के गोस्वामी परिवार में फिर रार छिड़ गई है। इस बार झगड़े का बहाना मंदिर में अधिक मास में होने वाले आयोजन हैं। इसमें दो पक्षों ने दर्शनों की अपनी अलग-अलग सूची जारी की है। एक पक्ष ने ३० दिवसीय मनोरथ कार्यक्रम तय किया है वहीं दूसरे पक्ष ने २० दिवसीय कार्यक्रम की सूची जारी की है। ३० दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा शनिवार को मंदिर की ओर से जारी की गई। अहमदाबाद के ट्रस्टी मुकेशशाह, कमलसिंह, मंदिर के सहायक अधिकारी गणेशलाल सांचीहर, डॉ. बिहारीलाल शर्मा, डॉ. जयेशशाह ने आयोजन की जानकारी दी। मुकेशशाह ने पत्रकारों को बताया कि पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास के नियमानुसार तृतीय पीठाधीश एवं गृहाधीश गोस्वामी बृजेश कुमार हैं और उनकी आज्ञा से ही पुरुषोत्तम मास के 30 दिन के मनोरथों की सूची जारी की है। अधिक मास में इसी सूची के अनुसार श्रीद्वारकाधीश प्रभु के मनोरथ होंगे। अन्य किसी सूची के अनुसार मनोरथ नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास राजस्थान पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम 1959 के अन्तर्गत कानूनी तौर पर बना हुआ प्रन्यास है। इस प्रन्यास प्रशासन के लिए देवस्थान विभाग-राजस्थान की स्वीकृति से एक विशेष प्रायोजना जारी की है। प्रायोजना के तहत मन्दिर संचालित हो रहा है। प्रायोजना में तृतीय पीठाधीश एवं गृहाधीश को व्याख्यायित किया गया है। प्रायोजना के मुताबिक मौजूदा गृहाधीश बृजेशकुमार हैं। उनके अनुसार ही जारी सूची के अनुसार मंदिर में उत्सवों का क्रम चलेगा। उनके भाई या अन्य परिजन ३० दिवसीय उत्सव में शामिल हो सकते हैं।

पूर्व में भी हुए विवाद
मंदिर के गोस्वामी परिवार में लम्बे समय से विवाद चल रहा है। मंदिर के गर्भगृह में करीब दो वर्ष पूर्व हुए अग्निकाण्ड, नकली मूर्ति प्रकरण और जमीनों के बेचान के मामले में विवाद खुलकर सामने आए। अब अधिक मास महोत्सव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

पीठाधीश पक्ष की यह है मनोरथ सूची
अधिक मास में तीस दिन तक विशेष मनोरथ होंगे, जिसके तहत (१६ मई) ज्येष्ठ सुदी प्रथम को राजभोग-शयन में फूल मंडली-हिंडोला का आयोजन होगा। दूसरे दिन रथ यात्रा, कांच का बंगला, अगले दिन घनघोर सवारी, वहीं आगे श्रावण-भादो झूला, चीरहरण-जल विहार सांगामाची, बंगला-कमल तलाई, बंगला-जल विहार, पलना -चांदी की बारद्वरी में सांगामाची, खसखाना- रमणरेती, पवित्रा जमना तट पर झूले, बंगला -मयूरासन, बंगला घटा में हिंडोला, सेवाकुंज-पनघट, अंगला शरदरास, बंगला -षटऋतु, बंगला गुजावन, बंगला काष्ट के नौमहला में गणगौर , बंगला पुष्प वितान, कुंज में फूल फाग -जलविहार गोप बंगला पर, चांदी की बाराद्वरी -विवाह, मोती का बंगला -इंद्रमान भंग, महादान-फलफूल का बगीचा झूला, बंगला -सांझी, पलना-चांदी का नौमहला, वहीं ९ जून को राजभोग के बाद सुबह ९.३० बजे प्रभु सवारी सहित बाग में पधारेंगे। बंगला (श्री वि_ल विलास बाग में) उत्थापन के बाद- गौचारण मनोरथ (बाग में)। दूसरे दिन नाव का मनोरथ (बाग में) वहीं तीसरे दिन ११ जून को अंगला (राजभोग और अनोसर के बाद श्री प्रभु ४ बजे पुन: मंदिर पधारेंगे)। मनोरथों में मंदिर प्रशासन के समय में फेर बदल भी हो सकता है।


दूसरे पक्ष ने जारी की थी २० दिवसीय उत्सव की सूची
इधर, गोस्वामी पराग कुमार, शिशिर कुमार ने भी अधिकमास के उत्सवों की सूची जारी की थी, जिसमें २० दिवसीय उत्सव हैं। सूची के मुताबिक २६ मई को उत्सवों की शुरुआत होगी। पहले दिन फूल मंडली, दूसरे दिन मुकुट बंगली, फिर नंदमहोत्सव, गुलाब को बंगला, मोरपंख को बंगला, कांच को बंगला, चंदन को बंगला, मोती को बंगला, फूल मंडली, खसको बंगला, सोना को बंगला, मोती को बंगला, जरदोजी बंगला, चीरहरण (जगमोहन तिवारी में पधारेंगे), किनारी को बंगला, रूपचतुर्दशी को बंगला, चुतर्दशी को क्षय कांच को बंगला, सोना को बंगला के मनोरथ होंगे।