
गोयाला बस्ती में रोगग्रस्त बच्चों से बात करते जिला कलक्टर
खमनोर. ब्लॉक की सेमा ग्राम पंचायत के गोलाया में आदिवासी बस्ती के 4 परिवारों में अत्यधिक संक्रामक चर्म रोग (स्कैबीज) ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बुधवार को खुद कलक्टर और सीएमएचओ बस्ती में पहुंचे और पीडि़त बच्चों से मिलकर उनकी सेहत के हाल जाने। वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने डोर-टू-डोर सर्वे शुरू किया। दो दो दिन पहले तक रोग से बेखबर विभाग अब संक्रमण की रोकथाम और बीमारों का मुस्तैदी से इलाज के दावे कर रहा है।
सेमा पंचायत के गोलाया की आदिवासी बस्ती में चर्म रोग फैलने से विभाग में हड़कंप मचा तो बुधवार को सीएमएचओ डॉ. प्रकाशचंद्र शर्मा भी बस्ती पहुंचे और हालात का जायजा लिया। रोग ग्रस्त बच्चों व महिलाओं के उपचार की जानकारी ली और अधीनस्थ अधिकारियों व डॉक्टरों से समीक्षा की।
सीएमएचओ शर्मा ने खमनोर बीसीएमओ डॉ. खुशवंत जैन एवं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक चारण को काडिय़ा स्कूल के सभी बच्चों, गोलाया बस्ती एवं सर की भागल में भी घर-घर सर्वे करने के निर्देश दिए। सीएमएचओ ने बताया कि गोलाया की इस आदिवासी बस्ती में 11 घरों में 15 परिवारों में 30 बच्चों सहित कुल 119 सदस्य निवासरत हैं। बिमारी से प्रभावित 4 परिवारों के 12 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। सीएमएचओ ने बताया कि संक्रमण आगे नहीं फैले, इसके लिए सघन सर्वे शुरू किया है और खास एहतियात बरते जा रहे हैं। सीएमएचओ का ये कहना है कि स्थानीय आशा सहयोगिनी एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने कुछ दिनों पहले बच्चों को खमनोर सीएचसी में रेफर किया था, जहां उनका उपचार किया गया। लेकिन बाद में दूसरे बच्चों में भी इस रोग के लक्षण दिखे। मंगलवार को बस्ती के 8 वर्षीय राकेश व उसकी 11 साल ही बहन देवकी को नाथद्वारा में रेफर किया था, उन्हें विशेषज्ञ चिकित्साधिकारियों की निगरानी में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर जांच की गई। स्थिति नॉर्मल होने पर छुट्टी दे दी गई। अन्य रोगियों को खमनोर सीएचसी में जांच व आरंभिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। सीएमएचओ ने बताया कि हालात नियंत्रण में हैं और बिमारी की रोकथाम के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। बस्ती के लोगों में फैले रोग के उन्मूलन के लिए घरों, कपड़ों, बिस्तर सहित परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने की हिदायत दी है। शाम को कलेक्टर नीलाभ सक्सेना भी गोलाया बस्ती में पहुंचे। स्थिति की जानकारी ली और अधिकारियों व कार्मिकों को निर्देश दिए।
स्कैबीज है इस रोग का नाम
गोलाया की आदिवासी बस्ती में जिन्हें ये रोग हुआ, उसका नाम चर्म रोग विशेषज्ञ ने स्कैबीज बताया है। ये एक प्रकार का त्वचा की खाज का संक्रामक रोग है। ये काफी संक्रामक है। हालांकि ये जानलेवा नहीं है। ये रोग विशेष प्रकार के जीवाणु माइट (सरकोपिट्स स्कैबी) के कारण होता है। माइट्स 8 पैर वाले सुक्ष्मतम परजीवी हैं। स्कैबीज के कारण रोगी की त्वचा में खुजली व जलन होती है। मादा माइट्स से मनुष्यों में संक्रमण फैलता है और खाज की समस्या पैदा कर देता है।
छुआछूत से फैलता है
यह इतना अधिक संक्रमक होता है कि छूने से, संक्रमित व्यक्ति के बिस्तर, कपड़े या रोगी के संपर्क में आई किसी सतह को छूने से फैल जाता है। स्कैबीज त्वचा के किसी भी हिस्से में फैल सकता है। पहली बार जब कोई व्यक्ति माइट्स के संपर्क में आता है तो लक्षणों को विकसित होने में तकरीबन 2 से 6 सप्ताह तक का समय लगता है।
इन लक्षणों से पता लगाएं
स्कैबीज के लक्षण नाखुनों, हाथों में और वस्त्रों से ढंके शरीर के हिस्सों में अधिक स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं। खुजली या खाज इसके सबसे आम लक्षणों में से एक हैं। जीवाणु जब त्वचा में घुस जाते हैं तो स्कीन में रेखाएं बना देते हैं। छाले-फफोले, धब्बे, घाव, पित्ती, किसी के काटने जैसे निशान, गांठें, फूंसी, पपड़ीदार त्वचा के रूप में दिखाई देते हैं।
बचाव व निदान के उपाय
स्कैबीज के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए रोगी के कपड़ों, तौलिए आदि को गर्म पानी व साबुन-डिटरजेंट का इस्तेमाल कर धोने के बाद धूप में सुखाएं। बिस्तरों को भी तेज धूप में रखकर संक्रमण रहित करें। रोग के निवारण के लिए डर्मेटोलोजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) से सलाह और उपचार लें।
Published on:
24 Mar 2022 11:45 am
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