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सत्रांक की ‘गुरुकृपा’! शिष्य फिर भी फेल, स्टॉप पूरा, एक भी प्रथम श्रेणी से नहीं हुआ पास

केलवा के आदर्श स्कूल में दसवीं के 34 में से 18 विद्यार्थी फेलअभिभावकों ने जताया आक्रोश

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Rajsamand, Rajasthan, India

सत्रांक की ‘गुरुकृपा’! शिष्य फिर भी फेल, स्टॉप पूरा, एक भी प्रथम श्रेणी से नहीं हुआ पास

केलवा. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से जारी १०वीं कक्षा के नतीजों में केलवा के आदर्श विद्यालय की अनचाही उपलब्धि ने कईसवाल खड़े कर दिए हैं। अच्छे सत्रांक में देने, पूरा स्टॉफ होने और भामाशाहों के भरपूर सहयोग के बावजूद नतीजे बेहद निराशाजनक रहे हैं। ३४ में से 18 विद्यार्थी फेल हो गए, जिनमें से एक भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण नहीं हुआ है। इस अनचाहे रिकॉर्ड को देखकर अभिभावकों में विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध गुस्सा है।
इस साल गणित विषय में अद्र्धवार्षिक परीक्षा में विद्यार्थियों के 20-20 सत्रांक भेजे गए थे, उसके बावजूद सभी को वार्षिक परीक्षा में शून्य अंक हासिल हुए हैं। यह स्थिति चौंकाने वाली है। नतीजे बताते हैं कि स्कूल में शिक्षा का स्तर बेहद गिर गया है। प्रथम श्रेणी में एक भी विद्यार्थी नहीं है। द्वितीय श्रेणी में मात्र दो छात्र हैं, जो कृपांक से पास हुए हैं। तृतीय श्रेणी में १२ विद्यार्थीउत्तीर्ण हुए हैं। बालकों के परिजन खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। फेल होने वाले 18 विद्यार्थियों के गणित, विज्ञान में 0 से लेकर मात्र पांच तक अंक आए हैं। हालांकि इन विद्यार्थियों पर शिक्षकों ने मेहरबानी करते हुए सत्रांक 20 में से 20 भेज दिए थे।
अभिभावकों का विरोध
इन परिणामों ने परिजनों को चौंका दिया है। उन्होंने गुरुवार को शिक्षा विभाग के लापरवाह कार्मिकों के खिलाफ आक्रोश जताया और जिम्मेदारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इधर, विद्यालय प्रशासन ने मुख्य रूप से गणित विषय में विद्यार्थियों के कम अंक आने की बात स्वीकारी है।
भामाशाहों ने दिया दिल खोलकर सहयोग
केलवा विद्यालय का परिणाम 47 प्रतिशत रहा है। इस विद्यालय में विद्यार्थियों की भलाई के लिए अभिभावकों और भामाशाहों ने दिल खोलकर आर्थिक व नैतिक रूप से सहयोग किया। यहां सभी विषयाध्यापक भी मौजूद हैं।
ग्रामीणों ने की
थी शिकायत
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में शिक्षा के खराब स्तर को लेकर पूर्व में प्राचार्य को शिकायत की थी, लेकिन जिम्मेदारों ने शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। इसका खराब नतीजा सबके सामने आ गया है। इधर, खराब परिणाम के बाद परिजन अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित थे।