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राजसमंद : मासूम के सिर से पहले पिता… अब उठा दादा का साया, अकेली बची दादी का रो-रोकर बुरा हाल

पांच साल के मासूम आदित्य के पिता की साल 2022 में ही मौत हो गई थी, जिसके बाद उसकी देखभाल दादी-दादा कर रहे थे। सड़क हादसे में घायल दादा रोशन लाल ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

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मृतक रोशन लाल लोहार और मासूम आदित्य अपनी दादी की गोद में बैठा हुआ। (फोटो-पत्रिका)

राजसमंद। कुंवारिया कस्बे के लालपुर रोड स्थित शनि देव मंदिर के पास रहने वाले एक परिवार पर कुदरत कहर टूट पड़ा है। पांच साल के मासूम के सिर से कोराना काल में पिता का साया उठा तो उसके दादा-दादी देखभाल कर रहे थे। लेकिन, अब दादा भी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद चल बसे। अब मासूम को सिर्फ दादी का सहारा रह गया है।

दूसरी तरफ घर में एक के बाद एक विपत्ति के आने से मासूम की दादी गीता देवी का बुरा हाल है। पहले जवान बेटे को खोया और अब पति के खोने का दर्द गीता देवी के लिए सहन करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में उनका रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं मासूम अपनी दादी को देखकर विलख पड़ता है।

टहलने के दौरान बाइक ने मारी थी टक्कर

लालपुर रोड शनि देव मंदिर के पास कुंवारिया निवासी रोशन लाल पुत्र मांगीलाल लोहार गत एक जनवरी की शाम को टहलने के लिए कस्बे के राउमावि खेल मैदान के समीप सड़क से गुजर रहे थे। इसी दौरान पीछे से एक बाइक सवार युवक ने उन्हें चपेट में ले लिया। दुर्घटना में रोशन लाल गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल को राजकीय आरके जिला चिकित्सालय उपचार के लिए ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर उदयपुर रेफर किया गया।

उदयपुर में इलाज के दौरान हुई मौत

उदयपुर अस्पताल में उपचार के दौरान 2 जनवरी की रात 11 बजे रोशन लाल ने दम तोड़ दिया। रविवार को मृतक का कुंवारिया मोक्षधाम में अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस ने मृतक के परिजनों की रिपोर्ट पर बाइक चालक के खिलाफ दुर्घटना का प्रकरण दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

मासूम की दादी ही अब सहारा

क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि रोशन लाल परिवार का इकलौता कमाऊ व्यक्ति था और उसके पांच वर्षीय पौत्र आदित्य लोहार का एकमात्र सहारा था। क्योंकि उसके पिता राजेश लोहार की कोरोना काल में 2022 में ही मौत हो चुकी है। ऐसे में मासूम की परवरिश उसके दादा-दादी कर रहे थे। लेकिन, रोशन लाल की मौत के बाद अब मासूम आदित्य लोहार का सहारा उसकी दादी गीता देवी रह गई हैं।

सरकारी मदद की दरकार

लोगों ने बताया कि उसकी दादी नरेगा में मजदूरी करके परिवार के गुजर-बसर में सहयोग करती हैं। ऐसे में कस्बे के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आहत परिवार को शीघ्र सरकारी राहत देने की प्रशासन से मांग की है।