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ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि उगल रही फल-सब्जियों के रूप में ‘सोना’

- निकटवर्ती पीपली आचार्यान में 27 बीघा जमीन में उगाई फल और सब्जियां, पंचफल उद्यान नर्सरी में हजारों पौधे, 1.25 लाख से अधिक फल सब्जी बेचे, अब तक विभिन्न मद से 60 लाख खर्च, अब बनेगा हॉल और अन्य सुविधाएं

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ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि उगल रही फल-सब्जियों के रूप में ‘सोना’

ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि उगल रही फल-सब्जियों के रूप में ‘सोना’

हिमांशु धवल @ राजसमंद.. जिले की पीपली आचार्यान ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि में बनी पंचफल उद्यान नर्सरी सोना उगलने लगी है। यह बात सुनने में अजीब लगेगी, लेकिन यह सत्य है। यहां पर उगे फल और सब्जियों की बिक्री से ग्राम पंचायत की आय होने लगी है। आगामी दिनों में यह आय और बढऩे की उम्मीद है।
पीपली आचार्यान ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच मनोहर लाल कीर ने बताया कि कोरोना के बाद चरागाह भूमि को विकसित कर पंचफल नर्सरी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया। लोगों को शुद्ध आर्गेनिक फल और सब्जियां उपलब्ध कराकर आय को बढ़ाना था। इसके तहत 27 बीघा भूमि की तारबंदी कराई गई। इसके पश्चात जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत की ओर से करीब 60 लाख रुपए की लागत से नर्सरी तैयार की गई। इसमें पहाडिय़ों को काटना, फेसिंग, सोलर लगाने, कुएं की खुदाई, मिट्टी भी भराई और फल-सब्जियों के पौधे लगाए गए। वर्तमान में इसमें चार हजार से अधिक फल-सब्जियों के पौधे लगाए गए। इसमें अब फल भी आने लगे हैं। यहां पर लगे गन्ने, फल और सब्जियों की मंडी में बिक्री की जाती है। इससे ग्राम पंचायत को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पंचफल उद्यान में यह उगाए पौधे
पीपली आचार्यान ग्राम पंचायत के पंच फल उद्यान नर्सरी की 27 बीघा जमीन पर 1500 गुलाब के पौधे, 1200 पपीता के पौधे, 600 अमरूद, 400 नीबू , 200 अनार, 200 एपल बोर, 200 आंवला, 200 चीकू, 5000 एलोविरा, 600 एनडिया, 200 शहतूत के पौधे लगाए हैं। इसी प्रकार सब्जियों में तुरई, लौकी, जमीकंद, बैंगन सहित कई सब्जियां लगाई गई है।
जिला कलक्टर ने गुलाब का फूल सूंघा, अनार खाई और पिया गन्ने का ज्यूस
पंच फल उद्यान नर्सरी को जिला कलक्टर नीलाभ सक्सेना, जिला परिषद सीईओ राहुल जैन देखकर अभिभूत हो गए। उन्होंने पूरी नर्सरी को घूमकर देखा और अनार के पेड़ में लगी अनार का स्वाद चखा। गुलाब के फूल को तोडकऱ उनकी खूशबू भी ली। इसके साथ ही बीज के लिए रखी गई तुरई को उठाकर देखा। इस दौरान यहां पर यहां पर उगे गन्ने का ज्यूस का भी आनंद लिया। यह ज्यूस हरियाळो राजस्थान के तहत पौधरोपण के दौरान सभी लोगों को पिलाया गया। इस दौरान पंचायत के पूर्व सरपंच मनोहर कीर ने नर्सरी तक आने वाले रोड को बाइपास से जोडऩे की मांग की। इस पर उन्होंने जल्द कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।
रासायनिक खादों का नहीं होता उपयोग
पूर्व सरपंच कीर ने बताया कि उद्यान में रासायनिक खाद आदि का उपयोग नहीं किया जाता है। यहां पर पूरी तरह आर्गेनिक खेती की जाती है। गौमूत्र, गोबर और पेड़ों की पत्तियों से तरल पदार्थ तैयार कर उसका छिडक़ाव किया जाता है। इससे पेड़-पौधों में रोग आदि नहीं लगते हैं। यहां पर सौलर भी लगाया गया है। इससे कुएं से पानी की मोटर आदि चलती है। बिजली का बिल नहीं आने के कारण अतिरिक्त भार भी नहीं पड़ता है।
10 लाख की लागत से हॉल का होगा निर्माण
सरपंच पति कीर ने बताया कि पंचायत समिति के माध्यम से 10 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इससे यहां पर एक हॉल और शौचालय आदि का निर्माण करवाया जाएगा। वर्तमान में यहां पर एक चौकीदार के लिए झोपड़ी बनी हुई है। उद्यान में सीसी रोड का निर्माण पहले ही हुआ है।
ग्राम पंचायत को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
पंचफल उद्यान नर्सरी को डेढ़ साल पहले तैयार की थी। अब इसमें फल आने लगे हैं। अब तक सवा लाख से अधिक के पपीते और गन्ने बेच चुके हैं। नर्सरी में 4500 से अधिक फल-सब्जी के पौधे लगाए गए थे। अब उनमें फल आ रहे हैं। ग्राम पंचायत को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
- सुंदरदेवी कीर, सरपंच पीपली आचायार्न

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