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अब राजसमंद में होने लगी कैंसर पीडि़तों की कीमो थेरेपी, मरीजों को नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर

राजकीय जिला चिकित्सालय में शुरू की गई थैरेपी सुविधा

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अब राजसमंद में होने लगी कैंसर पीडि़तों की कीमो थेरेपी, मरीजों को नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर

राजसमंद. जिले के राजकीय आरके चिकित्सालय में बुधवार से कैंसर पीडि़तों के लिए कीमो थेरेपी सेवा शुरू कर दी गई। यूं तो इसका फायदा सभी कैंसर पीडि़तों को मिलेगा लेकिन विशेष फायदा गरीब मरीजों को होगा, जो थेरेपी लेने के लिए उदयपुर या अहमदाबाद नहीं जा सकते हैं। यह सेवा चिकित्सालय में पूरी तरह से निशुुल्क रहेगी। बुधवार को एक मरीज की डॉ. संदीप शर्मा ने थेरेपी करके इसकी शुरुआत की। एक वर्ष पूर्व जिला चिकित्सालय में कैंसर वार्ड शुरू किया गया। इस पर यहां के स्टाफ विकास व अम्बालाल को कीमो थेरेपी का प्रशिक्षण लेने के लिए मुंबई भेजा गया, प्रशिक्षण के बाद यहां सेवा शुरू कर दी गई। डॉ. शर्मा ने बताया कि कैंसर वार्ड तो २७ नम्बर कमरे में हैं लेकिन मरीजों की थेरेपी कैंसर ओपीडी वाले ११ नम्बर कमरे में की जाएगी।


कैसे काम करती है कीमो थेरेपी
शरीर में प्राकृतिक रूप से पुरानी कोशिकाओं की जगह नई कोशिकाएं बनती हैं, लेकिन जब किसी को कैंसर हो जाता है तो ये कैंसर कोशिकाएं अनियंत्रित हो जाती है, इस कारण तेजी से नई कोशिकाएं बनती है, और दूसरी उपयोगी कोशिकाओं की जगह ये स्थापित हो जाती हैं, कीमो थेरेपी की दवाएं इन कैंसर कोशिकाओं को विभाजित होने और पूननिर्माण की क्षमता को प्रभावित करती हैं, कोई एक प्रकार की दवा या अलग-अलग दवाओं को एक साथ देकर ये दवाएं सीधे नसों में चढ़ाई जाती हैं, या कैंसर वाले अंग पर केंद्रित होती हैं। कीमोथेरेपी शब्द का प्रयोग उन दवाओं के लिए किया जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं को बढऩे और विभाजित होने से रोकती हैं। इस थेरेपी का लाभ कुछ हद तक इस पर निर्भर करता है कि कैंसर किस स्टेज पर हैं।


अहमदाबाद, उदयपुर के नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर
जिले में अभीतक कीमो थेरेपी नहीं की जाती थी, इससे मरीजों को थेरेपी के लिए काम धंधा छोडक़र उदयपुर व अहमदाबाद के चक्कर काटने पड़ते थे, चूंकि बीमारी की स्टेज के हिसाब से यह थेरेपी १ से ३ दिन तक लगातार दी जाती है, ऐसे में मरीजों को खासी समस्याओं का सामना करना पड़ता था, खास तौर से गरीब मरीज इस थेरेपी को ले ही नहीं पाते थे, राजसमंद में इसके शुरू होने से ऐसे मरीजों को विशेष फायदा मिलेगा। डॉ. शर्मा ने बताया कि यहां वे मरीज भी आ सकते हैं, जो पूर्व मेें कहीं और थेरेपी लेते रहे हैं।