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EXCLUSIVE : तंग और घुमावदार रास्तों में हर क्षण बदल रहे कयास, मतदाता मौन

कुंभलगढ़ विधानसभा : भाजपा व कांगे्रस में अन्तकर्लह और भीतरघात भी

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EXCLUSIVE : तंग और घुमावदार रास्तों में हर क्षण बदल रहे कयास, मतदाता मौन

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

कुंभलगढ़ दुर्ग से देस-विदेश तक प्रसिद्ध कुंभलगढ़ विधानसभा सीट राजनीतिक रूप से हॉट सीट रही है। यह अजब संयोग भी है कि यहां जिस पार्टी की जीत हुई है, उसी पार्टी की राजस्थान में सरकार बनी है। वर्ष 1967 से 1998 तक छह बार विधायक चुने गए हीरालाल देवपुरा 198 5 में मुख्यमंत्री, पांच बार मंत्री व विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। कद्दावर नेता हीरालाल देवपुरा को शिकस्त देकर भाजपा के सुरेन्द्रसिंह राठौड़ ने पार्टी में अपना कद बढ़ा दिया। एक बार पूर्व मुख्यमंत्री हीरालाल देवपुरा व दूसरी बार मौजूदा कांगे्रस प्रत्याशी गणेशसिंह परमार से हारने वाले राठौड़ अब तीसरी बार विधायक बने और चौथी बार फिर मैदान में है। कांगे्रस से बागी नरसींग व भारत वाहिनी पार्टी के प्रत्याशी श्याम प्रसाद द्वारा जातिगत वोट समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। दोनों प्रमुख दलों में आंतरिक भीतरघात होने से इस बार मुकाबला रोचक हो गया है। इस बार मतदाता के किसी हवा या लहर पर सवार नहीं होने से मुकाबला में दिलचस्प मोड़ आ सकता है।

राजसमंद जिले में सर्वाधिक लम्बे- चौड़े क्षेत्रफल वाली इस कुंभलगढ़ विधानसभा में लावासरदारगढ़, आमेट, चारभुजा तक दोनों ही पार्टियों के वोटर पारम्परिक है, जहां दोनों ही पार्टी के कुछ वोटों की एक दूजे में सेंधमारी हो सकती है। भाजपा के सुरेन्द्रसिंह राठौड़ और कांगे्रस के गणेशसिंह परमार ने विधानसभा की सभी पंचायतों में एक बार डोर टू डोर जनसंपर्क कर फील्ड मजबूत कर लिया है, मगर दोनों दलों में भीतरघात है। कांगे्रस प्रत्याशी परमार वर्ष 2008 में राठौड़ को शिकस्त दे चुके हैं, जबकि राठौड़ वर्ष 2013 में 27 हजार वोटों से जीत हासिल कर विधायकी छीन ली। परमार उनके जातिगत वोटों को सुरक्षित करने में जुटे हुए हैं, तो राठौड़ सेंधमारी के प्रयास में हैं। इसी तरह आम आदमी पार्टी भंवरलाल, भारत वाहिनी पार्टी श्यामप्रसाद जैन, भारतीय युवा शक्ति पार्टी सत्तु गुर्जर, बसपा के नारायणलाल, भारतीय ट्राइबल पार्टी रोशनलाल भील के अलावा निर्दलीय मोहनसिंह रावत, गजेन्द्रसिंह सिसोदिया, जगदीशदास भी मतदाताओं का भरोसा जीतने के प्रयास में है। इस विधानसभा में चुनाव किसी खास मुद्दो को लेकर लड़ा जा रहा हो, ऐसा नहीं लगता। मगर हार-जीत के कयास कुंभलगढ़ की तंग व घुमावदार सडक़ों की तरह घुमकर उलझ कर रह गए हैं। निर्दलीय नरसींग व श्यामप्रसाद जैन जातीय धु्रवीकरण की कोशिश में है। आमेट शहर में दोनों पार्टियों की स्थिति तुलनात्मक मानी जा रही है, जबकि चारभुजा क्षेत्र में दोनों पार्टियों के वोटर में सेंधमारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

इन सब कयासों के बीच गजपुर में भोपसिंह ने बताया कि कुंभलगढ़ में टक्कर जोरदार है। पिछले दो ढाई दशक की तरह इस बार बदलाव हो सकता है। बडग़ांव के पास बाजार से पैदल जा रहे गमेर भील से वोट के बारे में पूछा तो बोले- जनता अब किसी के बहकावे में नहीं आती। अब उनका समाज भी वोट सोच समझकर ही देगा। वरदीसिंह खरवड़ बोले- कुंभलगढ़ क्षेत्र की ज्यादातर सडक़े पुराने जमाने की तंग ही है, जहां दो वाहन क्रॉस नहीं हो सकते। दो दशक से मैंने देखा कि हर बार विकास के दावे तो कई करते हैं, मगर जीतने के बाद जनता के बीच कोई नहीं आता। मेरा वोट मैं मर्जी से ही दूंगा। इस तरह मतदाताओं का मूड़ भांपना इतना आसान नहीं रहा है।

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कुल मतदाता : २,04,242
पुरुष मतदाता- १,05,336
महिला मतदाता- 98,906

2013 में हार-जीत का आंकड़ा
भाजपा के सुरेन्द्रसिंह राठौड़ : 73402 वोट
कांगे्रस के गणेशसिंह परमार : 45796 वोट
भाजपा की जीत : 27606 वोट

दोनों प्रत्याशी के हालात
सुरेन्द्रसिंह राठौड़
कमजोर पक्ष : आम लोगों से जुड़ाव घटा, पार्टी में भीतरघात
मजबूत पक्ष : ढाई दशक का राजनीतिक अनुभव
गणेशसिंह परमार
कमजोर पक्ष : कांगे्रस बागी के चुनाव लडऩे, पार्टी में सक्रियता कम रहना
मजबूतर पक्ष : सहज उपलब्धता, मिलनसार स्वभाव और जातिगत वोट में पकड़

त्वरित समाधान करने वाला हो विधायक
जो आम व्यक्ति की समस्या सुने व समझते हुए उसका त्वरित निस्तारण कर सकें। कुंभलगढ़ पर्यटन हब बन चुका है, मगर क्षेत्रीय आम लोगों को रोजगार या स्वरोजगार नहीं मिल पाया है।
संजीता शर्मा, गृहिणी केलवाड़ा

जनता की सुनेगा, उसे ही वोट
जो व्यक्ति गांव की जाजम पर बैठ लोगों की समस्या सुनेगा। सरकार से पैसा लाकर गांव-ढाणियों का विकास करवाए और ग्रामीणों के हर सुख-दु:ख में सहभागी बन सके। ऐसे ही प्रत्याशी को वोट देंगे।
रामचंद्र कुमावत, आमेट