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हमारा जिला हुआ 32 साल का, काफी बदली सूरत और सीरत

- 10 अप्रेल 1991 को बना था जिला, विकास के लगे पंख, अभी और भी उम्मीदें पूरी होना बाकी, जिले की शौर्य वीरता, धार्मिक और माइनिंग के क्षेत्र में बनी विशेष पहचान

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हमारा जिला हुआ 32 साल का, काफी बदली सूरत और सीरत

राजसमंद विकास के पथ पर लगातार अग्रसर है। जसमंद झील शहर की सुंदरता में चार-चांद लगाती है। जिले की स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर लिया गया विहंगम दृश्य - फोटो हर्षित सुथार

हिमांशु धवल@ राजसमंद. हमारा राजसमंद जिला रविवार को अपने 32 वर्ष पूरे कर 33 वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। जिला घोषित होने के बाद से ही यह विकास की नई इबारत लिख रहा है। शूरवीरों की धरती, धार्मिक नगरी और सर्वाधिक मार्बल-ग्रेनाइट यहीं से निकलने के कारण पूरे देश और विदेश में इसकी अलग पहचान है।
उदयपुर जिले के भाग रहे कांकरोली और राजनगर को मिलाकर 10 अप्रेल 1991 को जिला घोषित किया गया था। शहर और जिले का नाम मेवाड़ के राणा राजसिंह की 17 वीं सदी में निर्मित एक कृत्रिम झील व एशिया की दूसरी मीठे पानी की राजमसंद झील के नाम से लिया गया। इसके जिला घोषित होने के बाद से जिस दिन यहां पर कलक्ट्रेट में काम-काज शुरू हुआ था उस दिन से यहां पर कलक्टर और एसपी बैठने लग गए थे। वर्तमान में पुरानी कलक्ट्रेट में पहले कलक्टर के रूप में मनोहर कांत और एसपी के रूप में अमरजीत सिंह गिल ने कार्यभार संभाला। दोनों का कार्यकाल करीब पौने दो साल का रहा। इसके बाद यहां पर जिला स्तरीय कार्यालय खुलते गए। फोरलेन की सौगात सहित कई विकास कार्य यहां पर हुए। वर्तमान में कई विकास कार्य जारी हैं। मुख्यमंत्री ने जिले में पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा की है। इससे वर्षों पुरानी मांग पूरी हो गई है। इससे जिले के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। हालांकि अभी भी जिले में कई क्षेत्रों में विकास की आवश्यकता है। जिले के स्थापना दिवस पर पत्रिका टीम की विशेष रिपोर्ट।

1981-82 में कर दिया था जिला घोषित!
शिक्षाविद् दिनेश श्रीमाली की मानें तो राजसमंद के जिला बनने की कहानी बड़ी रौचक है। मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाडिय़ा के कार्यकाल के दौरान 1981-82 में विधानसभा में इसे जिला घोषित कर दिया था। यहां के मंत्री नानालाल को किन्ही कारणों के चलते मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद शिवचरण माथुर मुख्यमंत्री बने। उन्होंने प्रदेश में जिले बनाने के लिए कमेटी बनाई। इसके बाद मुख्यमंत्री भैरूसिंह शेखावत के कार्यकाल में 1991 में इसे जिला घोषित किया गया।
प्रदेश का 30 वां जिला बना था राजसमंद
प्रदेश में 10 अप्रेल 1991 को एक साथ बांरा, दौसा और राजसमंद को जिला घोषित किया गया था। इसके चलते बांरा 28 वां, दौसा 29 वां और राजसमंद 30 वां जिला बना था। 12 जुलाई 1994 को 31 वां जिला हनुमानगढ़, 19 जुलाई 1997 को करौली 32 वां और 26 जनवरी 2008 को प्रतापगढ़ को 33 वां जिला घोषित किया गया। इसके 15 वर्ष बाद 17 मार्च 2023 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 19 जिले और 3 संभाग की घोषणा की।
राजनीति दृष्टि से यह आए बदलाव
- 2009 में राजसमंद संसदीय क्षेत्र बनाया गया
- संसदीय क्षेत्र के पहले सांसद गोपालसिंह शेखावत बने
- विधानसभा सीट आरक्षित थी, जो बाद में सामान्य हुई
- जिल में 7 तहसीलें थीं, जो बाद में दस हो गई।
- भीम का कुछ हिस्सा अब ब्यावर जिले में जा सकता है।
जिला एक नजर
- 11,56,597 आबादी 2011 जनगणना के अनुसार
- 4768 किलोमीटर जिले का क्षेत्रफल है।
- 1795 फीट की ऊंचाई पर स्थित है जिला
- 04 विधानसभा क्षेत्र है वर्तमान में
हमारे जिले की ताकत
- नाथद्वारा में श्रीनाथजी का मंदिर
- राजसमंद में द्वारिकाधीशजी का मंदिर
- राजसमन्द झील और नौ चौकी
- कुंभलगढ़ सेंचुरी और ऐतिहासिक किला
- शौर्य और वीरता की निशानी हल्दीघाटी
- गढ़बोर में श्री चारभुजानाथजी का मंदिर
- भीम से सर्वाधिक होती है सेना में भर्ती
- दिवेर में ऐतिहासिक विजय स्तंभ
इन पर करना होगा फोकस
खनन : राजसमंद अरावली पर्वत माला से घिरा हुआ है। यहां पर माइनिंग (खनन) सबसे बड़ा उद्योग है। जिले में 2000 से अधिक मार्बल, ग्रेनाइट आदि की खानें है। माइनिंग से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में अब खनन कार्य वैज्ञानिक तकनीकि से किया जाना चाहिए, जिससे अधिक फायदा मिल सके।
उद्योग और कृषि: जिले में उद्योग और कृषि को बढ़ावा देने के लिए पानी की बहुत आवश्यकता है। स्थिति यह है कि बारिश के दौरान यहां से बहकर पानी अन्य जिलों में चला जाता है। ऐसे में इसे रोकने के लिए बड़े स्तर पर योजना बनाने की आवश्यकता है। भीम और देवगढ़ के लिए चम्बल से पानी पहुंचने की उम्मीद है।
कनेक्टिविटी : जिले को फोरलैन की सौगात मिल चुकी है। विकास के लिए ब्रॉडगेज की महत्ती आवश्यकता है। राजसमंद को मारवाड़, भीलवाड़ा, ब्यावर में से एक स्टेशन से जोड़ा जाना चाहिए। इससे ही ब्रॉडगेज का समुचित लाभ मिल सकेगा और यातायात की कनेक्टिविटी बढ़ेगी और जिले का विकास होगा।
ईको ट्यूरिज्म : धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से जिला काफी समृद्ध है। कुंभलगढ़, हल्दीघाटी और राजसमंद झील सहित कई पर्यटक स्थल है। ऐसे में यहां पर पर्यटकों के ठहराव के लिए झील में पानी की आवश्यकता है। इसमें हमेशा पानी रहे इसके लिए बड़ी योजना की आवश्यकता है। खारी फीडर से सिर्फ पीने के पानी की आपूर्ति हो सकती है।