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राजकोषीय घाटा काबू रहे तो हम अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में हो सकते हैं आगे

Interim Budget Rajasthan 2024 बजट विशेष....

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वित्तमंत्री दिया कुमारी ने ‘विकसित और उन्नत राजस्थान’ की संकल्पना को मूर्तरूप देने और जनसंख्या पिरामिड के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने, उनका सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन दूर कर मुख्य धारा में लाने के मकसद से लेखानुदान विधानसभा में पेश किया।

वित्तमंत्री ने वित्त वर्ष 24-25 के लिए 4.86 लाख करोड़ रुपए का अनुमानित व्यय प्रस्तुत किया, जो वित्तवर्ष 2023-24 के बजट 2.97 लाख करोड़ करीब दुगना है। 2023-24 में राजकोषीय घाटा 67 हजार करोड़ अनुमानित है, जो कि राजस्थान अर्थव्यवस्था की क्षमता से अधिक है। इस परिस्थिति में 4.86 करोड़ की वित्त व्यवस्था करना यानि राजस्थान अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा, लेकिन राजकोषीय घाटा बढऩा आर्थिक रूप से धारणीय नहीं हैं।
राजकोषीय घाटा राज्य सकल घरेलू उत्पाद का 3.95त्न तथा जो कि एफआरबीएम एक्ट के तहत तय सीमा 3त्न से अत्यधिक है। तदनुरूप ऋण-जीडीपी 35-48त्न है। उसमें अधिकतम अल्पकालीन ऋण भार है, जो 5 वर्षों के भीतर राजस्थान सरकार को पुन: भुगतान करना है। इसलिए आगामी 5 वर्ष राजस्थान सरकार के लिए आर्थिक चुनौतीपूर्ण मिलेंगे। हालांकि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और अर्थशास्त्री डगलस एलमेंडोर्फ और प्रोफ ग्रोगरी मेनकियू ने आईएमएफ के प्रस्तुत पेपर में ऋण-जीडीपी अनुपात 50त्न तक चिंता मुक्त रहने की वकालत की है।

मानव जाति की अति महत्वपूर्ण आवश्यकता शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली और बेरोजगारी के निराकारण के लिए ‘सूर्योदय योजना’, 500 इलेक्ट्रिक बसें, इन सीटू योजना, श्री अन्न योजना, युवा साथी केंद्र योजना, निशुल्क शिक्षा जैसे नए कार्यक्रम सार्थक व प्रशंसनीय हैं, जिन्हें पूर्ण क्षमता से लागू करने की जरूरत है।
केंद्र सरकार की राजकोषीय नीति स्वायत्त होती है, लेकिन राज्य सरकार की राजकोषीय नीति उधार अभिगम्यत नियंत्रित होती है। ऐसे में राज्य सरकार का अल्पकालीन ऋण-भार और राजकोषीय-घाटा दोनों ही नियंत्रित और धारणीय अनुकूलतम अनुपात में अवश्य होना चाहिए। अन्यथा दीर्घकालीन पुनर्भुगतान विफलता की समस्या पैदा हो जाती है।

पूर्व क्षेत्र नहर योजना-ईआरसीपी, जो कि राजस्थान के 21 जिलों में पेयजल के साथ संभावित सिंचाई योजना राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी, जिससे एक तरफ किसान वर्ग की आय बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता वर्ग को सबलता मिलेगी।
‘उदय योजना’, ‘बिजनेस प्लान’, ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना’, ‘लखपति दीदी योजना’, ‘आयुष्मान भारत’, ‘गति शक्ति’ इत्यादि आधारभूत केंद्र सरकार संचालित योजनाओं के अधिकतम परिलाभ के लिए लेखानुदान में अनुगमन प्रस्ताव किया गया है, जो कि प्रशंसनीय है। राजस्थान की जनता को इनका पूरा लाभ मिलेगा।

युवाओं को मजबूत और सशक्त कर के लिए ‘युवा नीति’ बनाने की आवश्यकता है, ताकि 4 करोड़ युवाओं को मानवीय संसाधनों में तब्दील किया जा सके।
25 लाख प्रवासी राजस्थानियों को अपनी माटी के प्रति विशेष लगाव है। उनके लिए निवेश आमंत्रित हों। ‘प्रवासी राजस्थानी नीति’ का सूत्रपात करने की जरूरत है, ताकि राजस्थान में अधिकाधिक निवेश बढ़ सके, संपूर्ण राजस्थानी सुखी-समृद्ध रहें और मजबूत राजस्थानी विरासत संभाल सकें। वित्तमंत्री ने ठीक ही कहा कि युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं, किसानों और वंचित वर्गों का समावेशन करते हुए विकसित और उन्नत राजस्थान की प्राकल्पना को निहितार्थ करना है।

- सोहनलाल गोसाईं, विशेषज्ञ, अर्थशास्त्र