
फरियादी को टरका रही पुलिस, अपराधियों को शह : थानों की मनमानी आई सामने
केस 1 : जूणदा में अवैध बजरी 3 जून 18 की रात को ग्रामीणों ने अवैध बजरी खनन करते ट्रेक्टर पकड़ा, जबकि खननकर्ता फरार हो गए। रात दस बजे रामचंद्र गाडरी ने खंडेल चौकी के पुलिस जवान रामचंद्र को फोन कर शिकायत की। इस पर मौके पर आने की बजाय रामचंद्र व कथित हैड कांस्टेबल चंद्रपालसिंह द्वारा गाली गलोच करते हुए धमकाया। ट्रेक्टर खाली है तो सूचना क्यों दी। सुबह थाने पर आ जाना। गाली गलोच कर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
केस 2 : चारभुजा थाना में भोजेला निवासी प्रताबीबाई (70) पत्नी धनसिंह की सुनवाई नहीं हो रही। उसे पति व बेटे ने घर से बेदखल कर दिया। फरियाद लेकर रिछेड़ चौकी से लेकर थाने तक पहुंची। फिर भी सुनवाई नहीं हुई। 27 नवंबर 2017 को प्रकरण दर्ज कराया, तो पुलिस ने जबरन उसे दिनभर थाने में बिठाए रखा। इसकी डीएसपी से लेकर एसपी तक शिकायत कर दी गई। फिर भी न्याय नहीं मिला।
केस 3 : देलवाड़ा की युवती को छोडऩे के लिए आए सोनलाई, घासा (उदयपुर) निवासी पप्पुलाल पुत्र लोगर डांगी को गांव के कुछ युवकों ने पेट्रोल पम्प के पास पकड़ धुनाई कर दी व कार के शीशे तोड़ डाले। पंप संचालक की सूचना पर करीब 31 मार्च 18 को पहुंची पुलिस ने भी हमलावरों को पकडऩे की बजाय पप्पूलाल को ही शांतिभंग में गिरफ्तार कर लिया। फिर जमानत पर छोडऩे की एवज में 50 हजार रिश्वत तत्कालीन देलवाड़ा थानेदार द्वारा मांगी गई। इसकी शिकायत पर एसीबी द्वारा थानेदार माधवसिंह व सरपंच दिनेश को 20 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।
राजसमंद. हर पुलिस थाने व चौकी में लिखा ‘आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर’ का नारा अब राजसमंद में मजाक बनकर रह गया है। अब हर कोई फरियादी पुलिस थाने की चौखट चढऩे में भी हिचकने लग गए हैं। घटना- दुर्घटना, चोरी- चकारी व अवैध गतिविधी की सूचना देने वाले को ही पुलिस के जवानों द्वारा खुलेआम डराया, धमकाया जा रहा है। कुछ बेगुनाह पीडि़तों को पुलिस ने सलाखों में ही डाल दिया और उन्हें छोडऩे की एवज में रिश्वत मांगने से भी नहीं हिचक रहे हैं। अपराध पर नियंत्रण की बजाय लोगों को ब्लैकमेल कर रुपए ऐंठने के मामले दिनोंदिन बढ़ते जा हे हैं। इससे न सिर्फ पुलिस से भरोसा उठ रहा है, बल्कि अपराधी बेखौफ होकर संगीन वारदातों को अंजाम देने लग गए हैं।
फरियादी की नहीं होती सुनवाई
पुलिस थाने में जाने वाले फरियादी को बोलने का ही मौका नहीं देते और अगर बोल भी गया, तो उसकी रिपोर्ट दर्ज ही नहीं होती। इसके चलते मजबूर पीडि़त न्यायालय में इस्तगासा दायर करता है, तब पुलिस एफआईआर दर्ज करती है। सिपाही से लेकर थानेदार पीडि़त को सांत्वना देने के बजाय सख्त रवैये में सवाल पर सवाल पूछने से अक्सर वह घबरा जाता है।
आईजी ने भी स्वीकारी बात
गत 16 मई को राजसमंद में निरीक्षण पर आए आईजी रेंज उदयपुर आनंद श्रीवास्तव ने भी थाने, चौकी के पुलिस जवानों व अधिकारियों का जनता के प्रति व्यवहार ठीक नहीं होने की बात स्वीकार की। थाने में फरियादी के प्रति पुलिस का सख्त रवैये में बदलाव को लेकर सुधार की जरूरत बताई। साथ ही आईजी ने जिले के एसपी सहित सभी थानेदारों को भी स्पष्ट निर्देश दिए कि वे थाने में आने वाले हर शख्स की बात धैर्यपूर्वक सुने। फिर जैसा संभव हो, वैसी कार्रवाई करें।
चोरी, गुमशुदगी से किनारा
आजकल पुलिस मुख्यालय की नजर में यह है कि जहां कम से कम प्रकरण दर्ज होते हैं, वहां अपराध नहीं होते, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट होती है, जहां चोरी, नकबजनी, लूट व गुमशुदगी के ज्यादातर प्रकरण पुलिस दर्ज ही नहीं करती।
Published on:
17 Jun 2018 12:16 pm
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