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डाकघरों में तीन माह से नहीं हो रही आपूर्ति

नहीं मिल रहे पोस्टल ऑर्डर, उपभोक्ता परेशान , दस की जगह 50 रुपए का पोस्टल ऑर्डर खरीदने को मजबूर है लोग

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डाकघरों में तीन माह से नहीं हो रही आपूर्ति

राजसमंद. शहर-देहात के डाकघरों में पांच, दस और बीस रुपए तक के पोस्टल ऑर्डर नहीं मिलने से लोग 50 रुपए का पोस्टल ऑर्डर खरीदने को मजबूर है। इससे डाकघर की आमदनी तो बढ़ रही है, मगर आमजन के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई। पिछले तीन माह से पोस्टल ऑर्डर की कम आपूर्ति के चलते लोगों का अर्थतंत्र ही गड़बड़ा गया है।
जानकारी के अनुसार उप डाकघर से लेकर प्रधान डाकघर कांकरोली में भी इन दिनों 5, 10 व 20 रुपए के पोस्टल ऑर्डर उपलब्ध ही नहीं है। इसके चलते प्रतियोगी परीक्षा देने वाले छात्र, अभ्यर्थियों से लेकर सूचना अधिकार अधिनियम के आवेदन करने वाले लोग भी मजबूर 10 की जगह 50 रुपए का पोस्टल ऑर्डर खरीदने को मजबूर है। तीन माह में कम आपूर्ति के चलते लोग काफी परेशान है, मगर कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। गंभीर समस्या के बावजूद न तो डाकघर द्वारा कोई ध्यान दिया जा रहा है और ही डाक विभाग के उच्चाधिकारी गंभीर है। इसका खमियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।


इधर से उधर भटकने को मजबूर
उप डाकघर में पोस्टल ऑर्डर खरीदने के लिए जाने पर केशियर द्वारा दूसरे डाकघर से लेने की सलाह दी जा रही है, जिससे लोग एक से दूजे डाकघर के चक्कर काट रहे हैं। फिर भी उन्हें न तो छोटा पोस्टल ऑर्डर मिल पा रहा है और न ही समस्या का समाधान हो रहा है।


सूचना अधिकार में सर्वाधिक उपयोग
10 रुपए के पोस्टल ऑर्डर का सर्वाधिक उपयोग सूचना का अधिकार अधिनियम के आवेदन में किया जा रहा है। स्थानीय कार्यालयों से लेकर प्रदेश व देशभर में सूचना के लिए भेजे जा रहे आवेदन का शुल्क भी दस रुपए ही तय है। पोस्टल ऑर्डर के चलते तमाम सरकारी दफ्तरों में भी रसीद बुक की बजाय पोस्टल ऑर्डर ही लिए जा रहे हैं। इस कारण आरटीआई एक्टीविस्ट परेशान है।

क्या है पोस्टल ऑर्डर
डाक विभाग द्वारा जारी एक प्रकार का पैसा प्रदान करने का वचनपत्र या धनादेश है। उक्त पत्र को किसी भी संबंधित विभाग के नाम भेजने पर शुल्क अदायगी के लिए मान्य है। डाक विभाग द्वारा यह वचनपत्र 13 नवंबर 1995 को जारी किया गया। राजपत्र के अनुसार इसकी वैधता अवधि 24 माह मानी गई है।