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जानिए अस्पतालों में मरीजों के स्वास्थ्य से किस तरह होता है खिलवाड़

एक ही दिन की रिपोर्ट में अंतर: निजी और सरकारी अस्पताल की लैब में सामने आई जांच की अलग-अलग रिपोर्टें

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जानिए अस्पतालों में मरीजों के स्वास्थ्य से किस तरह होता है खिलवाड़

राजसमंद. सरकारी अस्पतालों व निजी लैब में जांच के अलग-अलग मापदंड व तरीके मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में मरीज व उसके परिजन न केवल भ्रमित हो रहे हैं, बल्कि मानसिक प्रताडि़त हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है शिशोदा क्षेत्र का। यहां २४ अगस्त को शिशोदा खुर्द निवासी एक महिला की तबीयत खराब होने पर उसे शिशोदा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया। यहां उसकी मलेरिया, टाइफाइड व हिमोग्लोबिन की जांच हुई, यहां मलेरिया और टाईफाइड निगेटिव तथा हिमोग्लोबिन १०.५ बताया गया, तथा यूरिन टेस्ट बाहर से करवाने का कहा। इसपर महिला के परिजनों ने नाथद्वारा की एक निजी लैब में उसी तारीख को सभी टेस्ट करवाए। यहां की रिपोर्ट में मलेरिया और टाइफाइड पॉजिटिव तथा हिमोग्लोबिन ९.१ सामने आया। ऐसे में परिजनों के होश उड़ गए तथा परिजनों का आरोप है कि अगर वह सरकारी अस्पताल की जांच के भरोसे रहते तो उनका मरीज और गम्भीर बीमार हो सकता था। इधर जांच रिपोर्ट सामने आने पर चिकित्सा महकमा निजी लैब की जांच रिपोर्ट पर खामियां बता रहा है, वहीं निजी लैब के चिकित्सक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जांच को गलत बता रहे हैं। मामला कुछ भी लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते मरीजों के साथ खुला खेल हो रहा है।


पूर्व में भी शिशोदा पीएचसी की जांच पर उठे सवाल
कुछ माह पूर्व दड़वल गांव की एक गर्भवती महिला का शिशोदा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ममता कार्ड बनाया गया। इस कार्ड में महिला का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव दर्ज किया गया। जब महिला प्रसव के लिए राजसमंद के राजकीय जिला चिकित्सालय में भर्ती हुई और उसे ममता कार्ड में दर्ज ब्लड उपलब्ध करवाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जब ब्लड चढ़ाने से पूर्व जांच की तो उनके होश उड़ गए, क्योंकि गर्भवती का ब्लडग्रुप एबी पॉजिटिव निकला।

इनका कहना है...
निजी लैब में जो मलेरिया की जांच हुई है, वह पूरी तथ्यात्मक नहीं है। मलेेरिया की जांच स्लाइड से होनी चाहिए जबकि कार्ड से हुई है। इसके लिए निजी लैब व अस्पतालों को पाबंध किया जाएगा। साथ ही शिशोदा पीएचसी के लैब टैक्नीशियन को भी पाबंध किया जाएगा। क्योंकि किसी का ब्लडग्रुप गलत लिखना गम्भीर है।
डॉ. पंकज कुमार गौड़, सीएमएचओ, राजसमंद


हमारी जांच सही है...
लैब की जांच एकदम सही है, जांच के लिए आए परिजनों ने बताया था कि पूर्व में भी इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जांचे गलत आई थीं, हमने मलेरिया की जांच कार्ड से की है, जिसका ९० फीसदी परिणाम सही आता है।
डॉ. मोहित, आचार्य तुलसी, डायग्नोस्टिक सेंटर, नाथद्वारा