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Cheat on the name of honor: सरपंच को पकड़ाया कॉफी मग, लखनऊ में सम्मान के नाम पर ठगी गईं सरपंच! मोदी के हाथों पुरस्कार का झूठ सोशल मीडिया पर आया सामने

स्वच्छ शक्ति सम्मान के लिए नहीं बुलाया मंच परआमंत्रण में ही नहीं है सम्मान का जिक्र, सिर्फ भागीदारी के लिए बुलाया था

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देवगढ़. लखनऊ में हाल ही में राजसमंद की दो महिला सरपंचों को स्वच्छ शक्ति-२०१८ का पुरस्कार मिलने का झूठ सामने आ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों उन्हें सम्मान देने की जो बात प्रचारित की गई थी, वह पूरी तरह गलत निकली। यही नहीं, सम्मान के नाम पर वहां उन्हें एक कॉफी मग देने पर वे खुद को ठगा सा महसूस कर रही हैं, जो मुख्यमंत्री के हाथों तक नहीं मिला। मामला यह है कि मण्डावर की महिला सरपंच प्यारी रावत और लापस्या सरपंच सपना शर्मा को स्वच्छ शक्ति-२०१८ के पुरस्कार समारोह में शामिल होने का बुलावा राजस्थान के पंचायती राज मंत्रालय के जरिये आया था। इसे मण्डावर सरपंच पति जसवंत सिंह ने सोशल मीडिया पर यह प्रचारित किया कि समारोह में प्रधानमंत्री के हाथों सम्मान दिया जाएगा। समारोह में मंच पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में २९ महिला सरपंचों को सम्मानित किया गया, जिसमें दोनों सरपंच शामिल नहीं थीं। राजस्थान से कुल १६ महिला सरपंच गई थीं, लेकिन उन्हें केवल सहभागिता के लिए बुलाया गया था। समारोह से लौटने के बाद भी कुछ लोगों द्वारा लगातार यह झूठ फैलाया जाता रहा।

सरपंचों को भी नहीं था ऐसा भरोसा
मोदी के हाथों पुरस्कार पाने को लेकर उत्साहित होकर राजसमंद से गईं महिला सरपंचों के साथ वहां ऐसा बर्ताव हुआ, तो उन्होंने खुद को ठगा सा महसूस किया। मण्डावर सरपंच पति ने भी सम्मान की बात गलत होना स्वीकारा है। लापस्या सरपंच ने समारोह में सहभागिता को अपने लिए गौरव का विषय बताया, लेकिन सम्मान नहीं मिलने का उन्हें भी अफसोस रहा। लापस्या सरपंच सपना शर्मा ने बताया कि लखनऊ गए थे। हमें वहां मोमेंटो मिला है। प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिलने की बात पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। कहा कि समारोह में शामिल होना ही हमारे लिए गर्व की बात है।
सुनीता की पोस्ट से खुली असलियत
मगरा क्षेत्र में इन दिनों चर्चित सुनीता रावत नाम की आईडी से चल रहे फेसबुक अकाउंट पर जब इस असलियत का खुलासा हुआ, तो लोग बहस में कूद पड़े और इस बहस में झूठ फैलाने वालों ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया कि लखनऊ में मंच पर उन्हें कोई सम्मान या प्रशस्ति-पत्र नहीं मिला। सरपंच को महज एक कॉफी मग दिया गया, वह भी समारोह समाप्त होने के बाद स्मृति चिह्न के तौर पर। मुख्यमंत्री योगी द्वारा उन्हें कोई सम्मान नहीं मिला।
आरोप द्वेषतापूर्ण लगाए जा रहे
&सोशल मीडिया पर जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे पहले खुद कुछ अच्छा करके दिखाएं। जो खुद कुछ करते नहीं, वही दोषारोपण करते हैं। सभी आरोप राजनीतिक द्वेषतापूर्ण लगाए हैं।
प्यारी देवी रावत, सरपंच, मंडावर
जैसा हुआ, उसकी अपेक्षा नहीं थी
&हमारे घर में शादी थी, वह छोडक़र हम लखनऊ गए। आनन-फानन में टिकट करवाए। बड़े पुरस्कार की आस थी। वहां जैसा हुआ, उसकी अपेक्षा नहीं थी। मुख्यमंत्री योगी और उमा भारती ने यूपी की ही महिला सरपंचों का सम्मान किया। जसवंत सिंह, सरपंच पति, मण्डावर